
एमसीबी/ ग्राम पंचायत खोहरा के आश्रित गांव के ठोरगी, जो कि ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 60,65 किलोमीटर दूर बिहड़ वन अच्छादित ग्राम पंचायत खोहरा का आश्रित ग्राम है, यहां की आबादी लगभग 100 है एवम 14,15 घर की बस्ती है।
यहां के प्रथमिक शाला ठोरगी में लगभग 12,14 बच्चो के नाम दर्ज है, लेकिन यहां के विद्यालय में बच्चो को मध्यान भोजन के नाम पर केवल चावल दाल ही दिया जाता है जबकि यह भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है कि ग्रामीण अंचलों में बच्चों को शिक्षा के साथ शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो लेकिन दुर्भाग्य यहां के बच्चों को यह भी नसीब नहीं है बच्चों को शुद्ध चावल दाल भी नहीं दिया जाता जो चावल वहां पकाया जाता है वह सड़ा हुआ खराब है

विद्यालय के शिक्षक के द्वारा बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
शिक्षक की कहानी
ग्रामीणों और बच्चों ने बताया कि शिक्षक इस विद्यालय में रहकर मदिरापान करते हैं। इतना ही नहीं, गांव के जनप्रतिनिधि यों ने बताया कि शिक्षक मदिरापान कर विद्यालय में ही निवास करते हैं। शिक्षक को राष्ट्र निर्माता कहा जाता है, लेकिन यहां के शिक्षक मदिरापान कर विद्यालय में निवास कर बच्चों को क्या शिक्षा देते हैं, यह एक बड़ा सवाल है।

ग्रामीणों की जवानी
ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षक की इस हरकत से बच्चों का भविष्य खतरे में है। बच्चों को बेसिक जानकारी भी नहीं है, जो उनके क्लास का है। ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे शिक्षक को तुरंत हटाया जाए और बच्चों के भविष्य को बचाया जाए।
विद्यालय की स्थिति
विद्यालय की स्थिति बहुत ही खराब है। बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई भी सुविधा नहीं है। शिक्षक की अनुपस्थिति में बच्चों को कुछ भी नहीं सिखाया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षक की इस हरकत से गांव का विकास भी प्रभावित हो रहा है।
छात्रों की आपबीती

प्राथमिक शाला ठोरगी का छात्र बी एल सिंह ने बताया कि हम उसी चावल को खा रहे हैं जो अभी भी विद्यालय में उपलब्ध है। प्राथमिक शाला ठोरगी का छात्र अजीत कुमार सिंह ने बताया कि दीदी तो धो कर खिलाती है पूछने पर बताया कि वही खराब चावल को रोज तक खिलाया जाता है एवम शिक्षक रोज शाम को दारू भी पिता है और कुर्सी में पलथी मार कर बैठा रहता है।
सही मॉनिटरिंग ना होने की वजह से वनांचल क्षेत्र के विद्यालयों में इस तरह की लापरवाही अवस्था का आलम बना रहता है जबकि शासन स्तर पर मॉनिटरिंग के लिए कई पोस्ट रखी गयी है लेकिन इनकी मॉनिटरिंग जमीनी स्तर में शून्य है।
ग्रामीणों की अपील
ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे शिक्षक को तुरंत हटाया जाए और बच्चों के भविष्य को बचाया जाए। शासन प्रशासन को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और गांव के विकास के लिए काम करना चाहिए।
आइये जानतें हैं क्या कहते हैं विकाश खण्ड शिक्षा अधिकार
जब हमारी बात ठोरगी के विद्यालय और वहां के अव्यवस्था के बारे में विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी से कार्यालय जाकर चर्चा की गई तब विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी सच्चिदानंद साहू के द्वरा बोला गया की यह क्षेत्र दूरस्थ वनांचल एवम पहुच विहीन क्षेत्र होने के कारण वहां की व्यवस्थता ठीक नहीं है जिसके लिये मुझे जैसे ही इसकी जानकारी मिली है मैं तत्काल सीएसी को निर्देशित किया और वहां की व्यवस्था को सही करने का निर्देश दिया गया।
देखना यह होगा की विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी के निर्देशन के उपरांत वनांचल क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था में सुधार होता है या बड़ी-बड़ी डींगे हां कर अपने कर्तव्य का इतिश्री ली जाती है



