
बैकुन्ठपुर/ शासकीय रामानुज प्रताप िंसंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैकुण्ठपुर में वंदे मातरम् गीत के 150 वीं वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में वर्षभर चलने वाले कार्यक्रम के अंतर्गत इसकी शुभारंभ महाविद्यालय के सभागार में प्राचार्य, डॉ. एम.सी.हिमधर के संरक्षण एवं मार्गदर्शन तथा रासेयो कार्यक्रम अधिकारी द्वय अनुरंजन कुजूर एवं श्रीमती जयश्री प्रजापति के संयोजन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रारंभ में प्रोजेक्टर के माध्यम से राष्ट्रव्यापी शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय स्टॉफ ने देखा तथा प्रधानमंत्री के सम्बोधन को सुना।

प्रधानमंत्री जी ने वंदे मातरम् को सिर्फ एक राष्ट्र गीत ही नहीं बल्कि एक मंत्र और एक संकल्प कहा जो राष्ट्र की एकता, आत्म गौरव और मातृभूमि के प्रति समपर्ण का अनुभूति कराता है। वंदे मातरम् के गीत ने 140 करोड़ देशवासियों के अंदर राष्ट्र प्रेम को जगाता है हमारी पीढ़ियों ने वंदे मातरम् में भारत के एक जीवंत और भव्य स्वरूप के दर्शन किये हैं आज भारत आत्मनिर्भरता और विकास की नई यात्रा पर अग्रसर है। इस यात्रा की मूल प्रेरणा वही है जो 150 वर्ष पुर्व बंकिमचंद चटर्जी ने दी थी। मातृभूमि पर गर्व करने की भावना और कर्म को सेवा मे बदलने की भावना। यह आयोजन नई पीढ़ी को भारत की इतिहास स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को याद कराते हुए उनमें देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठता, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय चेतना की भावना को मजबूती देगा। प्राचार्य ने सभी का सम्बोधित करते हुए कहा कि यह गीत सम्पूर्ण भारत की सामूहित चेतना का प्रतिक है वह चेतना जो हजारों वर्षों की सभ्यता, संस्कृति और अध्यात्म से निर्मित हुई है। वंदे मातरम् गीत हर भारतीय के हृदय मे राष्ट्र के प्रति देशभक्ति की भावना जागृत करता है नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार कर देश के प्रति कर्तव्यनिष्ठ बनाता है। अंत में महाविद्यालय के समस्त स्टाफ एवं छात्र/छात्राओं के द्वारा वंदे मातरम् गीत सामूहिक रूप से गाया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त स्टॉफ एवं छात्र/छात्राएं उपस्थित रहे।



