
कैश बुक में सरपंच के संपूर्ण हस्ताक्षर,पूर्व सचिव द्वारा सरपंच और ठेकेदारों पर टिकरा कितना सही और भी कई जांच के विषय
सतीश मिश्रा
जनकपुर एमसीबी/ हरचौका सीतामढ़ी मवई नदी जहां से प्रभु श्री रामचंद्र जी ने छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था विगत दिनों रेत माफियाओं द्वारा अवैध उत्खनन को लेकर जनहित संघ अंतर्गत पण्डो विकास समिति के द्वारा रेत सत्याग्रह केंद्रीय उपाध्यक्ष संवर्त कुमार रूप के मार्गदर्शन में ग्रामीणों की भारी संख्या में उपस्थिति में किया गया। रेत सत्याग्रह को राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल व अखबारों सहित स्थानीय यूट्यूब पोर्टल सहित लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का पूर्ण सहयोग मिला जिले के कलेक्टर डी राहुल वेंकट ने स्पष्ट किया कि पूर्व ग्राम सभा के प्रस्ताव को निरस्त करके नवीन प्रस्ताव पर संपूर्ण शक्ति ग्राम पंचायत को देखकर राज्य को भेज दिया जाएगा और हुआ भी यही। जनहित संघ के 22 सूत्रीय ग्रामीण जनहितैषी तर्कपूर्ण सवाल रहे जो यह सिद्ध करते थे कि उक्त खनन प्रक्रिया कई तरह से अवैध है ऐसा राज्य के कई हिस्सों में हुआ है ।इन सबके बीच कुछ प्रश्न सामने आ रहे हैं
जिसमें 1) पूर्व में पंचायत पदाधिकारियों ने अवैध उत्खनन को समर्थन देकर वैध क्यों बनाया इसके पीछे कौन सा स्वार्थ निहित था?
2) ग्राम पंचायत के प्रमुख कई वर्षों से मौन क्यों रहे यह उत्खनन तत्कालीन तो है नहीं?
3) सारे अधिनियम को ताक में रखकर खनन दायरा व एनजीटी के नियम के विरुद्ध ग्राम पंचायत के कुछ ओहदेदार रसूखों ने पूर्व में इसका विरोध क्यों नहीं किया?
4) विरोध जब अचानक हुआ तब इसके पीछे क्या वजह थी?
5) ग्रामीणों के अनुसार पंचायत के कुछ प्रमुख व्यक्तित्व, कुछ जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत है वे ऊपर से विरोध दिखाकर अंदर से रेत माफियाओं से सेटिंग करके मोटी रकम वसूल लेते हैं?
6) यह रकम वसूली मासिक व दैनिक, कभी कभी एक बार में ही लंबी रकम का समझौता कर लिया जाता है। यह नाम न छापने के शर्त पर कुछ ग्रामीणों का कथन रहा इसकी सत्यता की पुष्टि समाचार संस्थान नहीं करता लेकिन यदि ऐसा है तो यह भी गंभीर जांच का विषय है।
7) रकम न मिलने व समझौते के करार पर दरार पड़ने पर विरोध हुआ क्या यह सही है?
8) ग्राम हरचौका मे रेत माफियाओं का आतंक सर्व विदित रहा जो अब रेत सत्याग्रह के बाद से बंद है और संपूर्ण शक्ति ग्राम पंचायत के पास है पंचायत अब रेत का खनन सभी नियमों के अधीन क्यों नही कर रहा भविष्य में संसाधन की सुरक्षा देखते हुए पारदर्शिता के साथ? वहीं जिला प्रशासन द्वारा रॉयल्टी को लेकर दी गई नोटिस ग्राम पंचायत की भूमिका पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है।
9) ग्राम्य मजदूरों को रोजगार देने की जगह सरपंच क्यों चलवा रहे जेसीबी?
10) वनांचल में रेत हो या लकड़ी या पशु तस्करी,इन तस्करों और माफिया वर्ग से सांठगांठ करके रुपया लेकर अपने संसाधनों को कब तक नष्ट करते रहेंगे?
आपको बता दें सरपंच ग्राम प्रधान होता है सरपंच को छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम के अधीन कार्य करना होता है। ग्राम सभा करके समय-समय पर सारा आय व्यय,खनिज व अन्य संसाधनों की रॉयल्टी, अन्य सभी मद से किया जा रहे निर्माण व विकास कार्यों का लेखा-जोखा स्पष्ट करना होता है जो ऐसा नहीं करता उसे पर छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम की उप धारा 3 के तहत संबंधित पंचायत के सरपंच को 6 वर्ष तक की काल अवधि के लिए पंचायत का सदस्य या पदाधिकारी होने के लिए निरर्हित किया जाता है।
प्रकरण में पंचायत की भूमिका संदिग्ध, घुघरी निवासी संतोष कुमार शर्मा ने कलेक्टर से की शिकायत

ग्राम पंचायत हरचौका घुघरी निवासी संतोष कुमार शर्मा ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत विकास 4/ 6 /2025 को रेत रायल्टी की राशि का
गबन करने संबंधी आरोप लगाकर उल्लेखित किया है कि तहसील भरतपुर में ग्राम पंचायत हरचोका खसरा नंबर 336 रकबा 10 हे० पर्यावरण अवधि दिनाक 22/04/2017 से दिनांक 21/04/2019 तक के लिए खनिज रेत खदान सरपंच/सचिव ग्राम पंचायत हरचोका के पक्ष में स्वीकृत था स्वीकृत रेत खदान से दिनांक 28/10/2017 से दिनांक 04/01/2019 तक 166200 घन मीटर रायल्टी पर्ची तत्कालीन सरपंच लालसाय ग्राम पंचायत हरचोका द्वारा 2054200.00 रु रायल्टी राशि जमा नही की गई जबकि उपरोक्त राशि जमा करने हेतु सरपंच/सचिव ग्राम ग्राम पंचायत हरचोका को कलेक्टर खनिज शाखा कोरिया ने पत्र क्रमांक 162 खनिज / 2019 द्वारा दिनांक 03/05/2019 को सात दिवस अंदर जमा करने के लिए पत्र दिया गया था। आज दिनांक तक 2054200.00 रू का गबन कर पंचायत व सरकार की रॉयल्टी अपवंचन किया गया है।
उन्होने निवेदन किया है कि उक्त रॉयल्टी राशि का गबन के संबंध मे सचिव / सरपंच कि खिलाफ उचित कार्यवाही करने की कृपा करें।
शिकायत पर कलेक्टर एमसीबी द्वारा सरपंच सचिव को नोटिस:–

आपको बता दें हरचौका घुघरी निवासी संतोष कुमार शर्मा के शिकायत पत्र पर जिला कलेक्टर द्वारा ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव को नोटिस दिया गया गया है जिसमे उल्लेखित है कि
संदर्भित पत्र के द्वारा आवेदक संतोष कुमार शर्मा निवासी -घुघरी द्वारा रायल्टी की राशि रूपये 2054200/- गबन करने के संबंध में शिकायत पत्र प्राप्त हुआ है।रेत खदान की मूल नस्ती के अवलोकन उपरांत ज्ञात हुआ कि तत्कालीन जिला कोरिया अन्तर्गत ग्राम हरचोका, ग्राम पंचायत हरचोका, तहसील भरतपुर के शासकीय भूमि खं०क्र० 336 रकबा 5.00 हे० क्षेत्र में गौण खनिज रेत हेतु छत्तीसगढ़ गौण खनिज रेत का उत्खनन एवं व्यवसाय विनियमन निर्देश, 2006 के तहत् रेतघाट अधिसूचित की गई थी, जिसका संचालन आपके ग्राम पंचायत हरचोका द्वारा किया गया। छत्तीसगढ़ गौण खनिज रेत का उत्खनन एवं व्यवसाय विनियमन निर्देश, 2006 के कण्डिका 8 के अनुसार संबंधित ग्राम पंचायत हरचोका द्वारा प्राप्त रायल्टी की जानकारी प्रारूप 2 में प्रतिमाह उपलब्ध कराई जानी थी।
उक्त रेतघाट के संबंध में माह मई, 2018 से 23.04.2019 तक मासिक पत्रक प्राप्त नहीं हुआ, तत्कालीन जिला-कोरिया (छ.ग.) के कलेक्टर द्वारा खनिज शाखा जिला-कोरिया, के कार्यालयीन अभिलेख अनुसार संरपच/सचिव ग्राम पंचायत हरचोका द्वारा 2054200/- रायल्टी राशि पंचायत के निर्धारत मद में जमा नहीं होने के संबंध सचिव ग्राम पंचायत हरचोका को पत्र क्रमांक 162/ खनिज /2019 / कोरिया वैकुण्ठपुर दिनांक 03.05.2019 के द्वारा 07 दिवस के भीतर बकाया राशि जमा करने हेतु निर्देशित किया गया था। आगे वर्णित है कि रेत खदान की मूल नस्ती के अवलोकन पश्चात पाया गया की आपके द्वारा आज दिनांक तक बकाया राशि 2054200/- को निर्धारित पंचायत के खाते में जमा नहीं किया गया. उक्त संबंध में आप अपना जवाब 07 दिवस के भीतर प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।
इस संबंध में हरचौका सरपंच से बात की गई तब उनका जवाब अति गैरजिम्मेदाराना रहा जो यह बताता है कि उन पर लगे आरोप निराधार नहीं है जिसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई प्रशासन को चुना ना लगा सके साथ ही संसाधनों और ग्रामीण जनता के हितों के साथ खिलवाड़ ना कर पाए। सरपंच का कहना है :– “मैं थोड़ी लिया हूं,मेरे को पीट पास ही नहीं मिला है तो मैं कहां से लूंगा।सचिव दे ।सचिव अभी मेरे को कुछ दिहे नहीं है।”
यह कहना है सरपंच लालसाय का एक तरफ सरपंच सचिव पर टिकरा फोड़ रहे हैं वहीं पूर्व सचिव सरपंच पर।
मैंने कैश बुक मे हस्ताक्षर नहीं किया है, हम गए ही नहीं पहले सरपंच बाद में ठेकेदार जाते थे : पूर्व सचिव महेश मिश्रा

इस गंभीर विषय पर जहां साफ रेट घोटाला प्रतीत हो रहा है रॉयल्टी की रकम के नाम पर प्रशासन को चूना लगाया दिख रहा है वहीं ग्रामीणों के साथ भी छलावा करते हुए झोली भरी गई है फिर भी पंचायत पदाधिकारी बेतुका बयान मीडिया को देकर अपना पल्ला झाड़ रहे है जिस कैश बुक में हस्ताक्षर नहीं करने की बात पूर्व सचिव महाशय कर रहे हैं उसी में सरपंच और सचिव दोनों के सील लगे हुए है कहीं कहीं पर सचिव का हस्ताक्षर भी है l।

हमारे संवाददाता ने जब सचिव से पूछा कि जो रॉयल्टी की रकम निकाली गई थी पुलिया टैंकर, मिक्सर मशीन, रोड लाइट के लिए वैसा कोई भी कार्य विकास नहीं दिख रहा है इस पर आपका पक्ष क्या है? सचिव का कहना रहा “रोड लाइट लगी थी।” अगर रोड लाइट लगी थी तो उसे जमीन निकल गया या आसमान खा गया क्योंकि जितना का एस्टीमेट दिखा दिया गया है उतने का तो रोड लाइट दिख ही नहीं रहा है। पुलिया निर्माण किसके तहत हुआ पूछने पर सचिव का कहना रहा–” रास्ता नहीं था तो अध्यक्ष जी लालसाय जी बनवाए थे। यह पूछने पर कि वह मनरेगा से बना और रेट रॉयल्टी से पैसा निकाला गया ? सचिव ने कहा –”मनरेगा से अलग बना है। उसका रसीद वह रेत खदान वाले नहीं दिए थे,लालसाय सरपंच ने बताया था कि कोई मतलब नहीं रखते थे बैकुंठपुर वाले। वह अपने से जाते थे ठेकेदार और पैसा देकर लेकर चले आते थे।यह पूछने पर कि पंचायत के कैश बुक में आपका हस्ताक्षर कई जगह नहीं है एक दो जगह बस हस्ताक्षर है तब सचिव का कहना था पहले सरपंच का ही रहता था सचिव का कोई रोल नहीं था। फिर एक जगह आपका हस्ताक्षर कैसे हैं पूछने पर सचिव ने कहा “अच्छा है।फिर प्रश्न किया गया जब सरपंच का होता था सचिव का रोल ही नहीं था फिर आपने हस्ताक्षर कैसे कर दिया तब सचिव का जवाब था मेरे को ध्यान नहीं है सर 17 की बात है। कैश बुक के अंत में होगा। रॉयल्टी उठाने सरपंच लालसाय ही जाते थे पहले हम नहीं जाते थे ठेकेदार लोग जाते थे बाद में हम। उन्होने साफ कर दिया कि “सर हम गए ही नहीं है कभी।”
ग्राम पंचायत हरचौका के सरपंच सचिव के मीडिया को दिए बयान से स्पष्ट रूप से पता चल रहा है कि रॉयल्टी के रकम के साथ जरूर घोटाला व बंदर बाट किया गया है ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच सचिव/वर्तमान सरपंच आदि की भूमिका संदिग्ध है सरपंच द्वारा बही खाता दुरुस्त किया गया है बकायदा हस्ताक्षर और सील भी लगा है और जो हिसाब बनाया गया है वह स्थल पर दृष्टिगत नहीं है इसकी जांच भी होनी आवश्यक है केवल सरपंच के हस्ताक्षर होने पर भी सरपंच मुकर रहे हैं कि उन्हें कुछ पता ही नहीं है सचिव जाने। पूर्व सचिव ने स्पष्ट कर दिया है कि वह गया ही नहीं केवल लालसाय सरपंच जाते थे और उनके बाद ठेकेदार।

अब प्रश्न यह भी उठना है की मायनिंग का 2054200 रुपए एवं पंचायत का 46 लाख 55422 कुल 67 लाख 9622 की रकम का बिना जिला पंचायत खनिज न्यास को रॉयल्टी पटाए आखिर कहां गायब कर दिया गया या खुद की झोली भर ली गई?
सरपंच और ठेकेदार के कहने पर जेसीबी लेकर आया : जेसीबी ड्राइवर
इसी बीच एक ग्रामीण द्वारा निर्मित वीडियो सामने आता है जिसमे जेसीबी के ड्राइवर से पूछा जा रहा है :– “किसका मशीन है? तब जवाब मिलता है : “अशोक जायसवाल का मशीन है” ग्रामीण कहता है मालिक आपको बोले हैं? ड्राइवर:–” हां और सरपंच जी से भी बात हुआ है। इस पर ग्रामीण कहते हैं : सरपंच है तो कुछ भी करेगा ।अवैध कार्य कर सकता है क्या? अपने अपने मनमर्जी से सरपंच हो गया है।
इसे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि सरपंच एक तरफ मुकर रहे हैं कि उन्हें कुछ मालूम नहीं उन्हें पीट पास नहीं मिला है सचिव जाने लेकिन दूसरी तरफ ठेकेदार आदि से सांठगांठ करते हुए ग्रामीण मजदूरों के आजीविका को मारते हुए जेसीबी चला रहे हैं उक्त वीडियो में ड्राइवर का साफ कहना है कि मालिक और सरपंच के कहने पर वह जेसीबी लेकर मवई नदी के किनारे रेत उठाने पहुंचा है कुछ ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच हरचौका द्वारा लगातार मिथ्या कथन करते हुए प्रशासन की आंखों में धूल झोंका जा रहा है।क्षेत्र की जनता को भी ठगा जा रहा है।उनका मुखिया बनकर अपनी झोली भरी जा रही है। लाखों का रेत घोटाला किया गया है।संतोष शर्मा घुघरी निवासी के आवेदन पर कलेक्टर ने नोटिस भेज दिया है और 2054200 रु रॉयल्टी की राशि जो ना तो पंचायत के खाते में ही जमा किया गया है उसे 07 दिवस के भीतर जमा करने को निर्देशित किया है। देखना आगे होगा कि जिला प्रमुख कलेक्टर सहित प्रशासनिक अमला सरपंच सचिव के रेत रायल्टी के गबन के मामले को लेकर पंचायत की राशि के बंदर बाट करने को लेकर कौन से कठोर कानून बनाते हैं और कड़ी कार्रवाई करते हैं।



