परीक्षा केंद्र बना सुरक्षा शिविर : इंसानी गरिमा, निजता और ज़रूरतों की अनदेखी कर , दुपट्टे लटकते रहे,चप्पलें पड़ी रहीं, परीक्षा के पहले ही मनोबल तोड़ दी गई

सतीश मिश्रा
मनेंद्रगढ़/ आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान मनेंद्रगढ़ जिला मुख्यालय के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र के बाहर शनिवार को जो दृश्य नजर आया, उसने परीक्षा की शुचिता के नाम पर की जा रही “कड़ाई” को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। परीक्षा में बैठने आई लड़कियों के दुपट्टे, स्कार्फ, ‘क्रक्स चप्पल’ तक उतरवा लिए गए। गेट पर दुपट्टों की कतारें लटक रही थीं, मानो ये परीक्षा नहीं, कोई तलाशी शिविर हो। “दैनिक सम्यक क्रांति” की टीम ने यह दृश्य कैमरे में कैद किया, जो अब प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

नकल रोकने के नाम पर लड़कियों की गरिमा के साथ ऐसा सुलूक
जब परीक्षार्थियों ने इस अतिरेक का विरोध किया, तो केंद्र प्रशासन ने सख्ती का हवाला देते हुए चुप करा दिया। उनका तर्क था कि बिलासपुर में पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग परीक्षा में हाईटेक नकल प्रकरण के बाद शासन ने सभी परीक्षा केंद्रों को सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या नकल रोकने के नाम पर लड़कियों की गरिमा के साथ ऐसा सुलूक जायज है? क्या हर परीक्षार्थी को अपराधी मानकर ही केंद्र में प्रवेश मिलेगा?
क्या यह ज़रूरत से ज़्यादा सख्ती नहीं ?
बिलासपुर नकल कांड का खामियाजा अब पूरे प्रदेश के परीक्षार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
लड़कियों की गरिमा और सुविधा को ताक पर रखकर बनाई गई गाइडलाइंस पर पुनर्विचार की ज़रूरत।
दैनिक सम्यक क्रांति की अपील :
सुरक्षा और अनुशासन जरूरी हैं, परंतु इंसानियत और संवेदनशीलता को दरकिनार करके कोई व्यवस्था टिकाऊ नहीं हो सकती। प्रशासन को चाहिए कि पुनर्विचार करे – कैसे नकल भी रोकी जाए और सम्मान भी बचाया जाए।
परीक्षा_या_प्रताड़ना
दुपट्टा_गरिमा_का_प्रतीक



