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छतौड़ा सीतामढ़ी धाम: एक प्राचीन और पवित्र स्थल अपने बदहाली के लिए बहा रहा आंसू कब होगा जीर्णोद्धार

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मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर/ पुरातत्व विभाग के संरक्षण के अभाव में सीतामढ़ी धाम छतौड़ा अपनी दुर्दशा के लिये आशु बहा रहा है वनवास काल में यहाँ प्रभु श्री राम दंडकरयन्ड जब प्रवेश किया तब उनके द्वरा बीच बीच में विश्राम किया गया और उनके द्वरा पत्थरों को काट कर अपने विश्राम के लिये जगह बनायी थी लेकिन पुरातत्व विभाग के अनदेखी में यह सीतामढ़ी धाम छतौदा धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होते जा रहा है ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है सीतामढ़ी धाम छतौड़ा के जीर्णोद्धार के लिये कदम उठाये जय जिससे हमारी पुरातत्व धरोहर सुरक्षित, संरक्षित हो सके।

1-12 छतौड़ा सीतामढ़ी धाम: एक प्राचीन और पवित्र स्थल अपने बदहाली के लिए बहा रहा आंसू कब होगा जीर्णोद्धार

बता दें सीतामढ़ी धाम छतौड़ा विकासखंड भरतपुर दूरस्थ वनांचल क्षेत्र के ग्राम छतौड़ा में स्थित सीतामढ़ी धाम एक प्राचीन और पवित्र स्थल है, जो भगवान राम के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान एक महत्वपूर्ण स्थल रहा है। यह धाम विकाशखण्ड भरतपुर से 45 किलोमीटर दूर स्थित है और चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और भी बढ़ा देता है।सीतामढ़ी धाम की प्राकृतिक सुंदरता अद्वितीय है। चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ यह स्थल प्रकृति की गोद में स्थित है। यहां की हरियाली और शांति मन को शांति प्रदान करती है सीतामढ़ी धाम की धार्मिक महत्ता बहुत अधिक है। यह स्थल भगवान राम के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान एक महत्वपूर्ण स्थल रहा है। यहां पर भगवान राम ने कुछ दिन रुककर भगवान शिव की पूजा की थी और सीता माता ने भी यहां पूजा की थी।सीतामढ़ी धाम स्थानीय लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वे इस धाम को अपनी आस्था और श्रद्धा का केंद्र मानते हैं। स्थानीय लोगों की भावनाएं सीतामढ़ी धाम से जुड़ी हुई हैं और वे चाहते हैं कि इस धाम का विकास हो।सीतामढ़ी धाम के विकास के लिए शासन को कदम उठाने चाहिए। यहां पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का अभाव है, जिसे दूर करने की आवश्यकता है। शासन को सीतामढ़ी धाम के सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्य के लिए कदम उठाने चाहिए।

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छतौड़ा आश्रम केंद्र सरकार के पर्यटन विकास परिपथ में क्रमांक 72 पर सूचीबद्ध है, जो इसके भविष्य में विकसित होने की संभावनाओं को मजबूत करता है। इसके अलावा,हरचौका और सीतामढ़ी घाघरा क्रमांक 70 और 71 पर पंजीकृत हैं, जो इन स्थलों के महत्व को दर्शाता है। छतौड़ा आश्रम तक पहुंचने के लिए मनेन्द्रगढ़ मुख्यालय से कठौतिया होते हुए जनकपुर से कोटाडोल मार्ग से कमर्जी मार्ग पर बढ़ना होगा। जनकपुर से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर छतौड़ा ग्राम स्थित है। सड़क किनारे छतौड़ा आश्रम का स्थाई बोर्ड भी लगा दिया गया है, जो दर्शाता है कि शासन ने इस स्थल के महत्व को पहचाना है। एक पुकार शासन से आज भी छतौड़ा आश्रम, सीतामढ़ी हरचौका और सीतामढ़ी घाघरा जैसे ऐतिहासिक स्थलों तक पहुँचने के लिए कोई सुविधाजनक पर्यटन विकास कार्य नहीं हुए हैं। यदि शासन ध्यान दे तो यह स्थल राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बन सकता है।

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ग्राम छतौड़ा के निवासी शिवनारायण मौर्य ने बताया कि सीतामढ़ी धाम में शासन के द्वारा आज तक कोई निर्माण कार्य नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा कि यह राम वन गमन पथ का सबसे प्रथम स्थान है और छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम भगवान राम आकर यहां पर ठहरे थे।शिवनारायण मौर्य ने मीडिया के माध्यम से शासन प्रशासन से मांग की है कि सीतामढ़ी धाम में सौंदर्यीकरण के लिए कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि इससे यहां का विकास हो सकेगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा शिवनारायण मौर्य ने आरोप लगाया कि बड़े-बड़े नेता यहां आए हैं और सीतामढ़ी धाम के विकास की बात कही है, लेकिन आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की मांग है कि सीतामढ़ी धाम का विकास किया जाए।

ग्राम छतौड़ा के भरतलाल ने बताया कि सीतामढ़ी धाम प्राचीनकाल से बना हुआ है और उनके पूर्वजों के आशीर्वाद से यह धाम बसा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह धाम उनके लिए बहुत पवित्र है और शासन प्रशासन से मांग की है कि सीतामढ़ी धाम के सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्य के लिए कदम उठाए जाएं सीतामढ़ी धाम में श्रद्धालुओं के लिए कोई सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि वहां न तो शेड है, न चबूतरा है और न ही आने-जाने के लिए ठीक से रास्ता है।

पवन कुमार ने कहा कि श्रद्धालुओं के बैठने की भी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें पूजा-पाठ करने में दिक्कत होती है।पवन कुमार ने कहा कि ग्रामीणों ने कई बार नेताओं से सीतामढ़ी धाम की व्यवस्था सुधारने की मांग की है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सीतामढ़ी धाम उपेक्षा का शिकार हो रहा है और शासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।

जवाहर लाल मंदिर के पुजारी ने बताया कि उनके गांव में कई समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि गांव में प्रशासन के द्वारा कोई सुविधा नहीं दी गई है और न ही कोई लाभ दिया गया है। गांव के लोग अपने स्तर पर ही समस्याओं का समाधान करने की कोशिश करते हैं गांव में एक पुराना मंदिर है, जो लगभग सात पीढ़ी पुराना है। उन्होंने कहा कि मंदिर की देखभाल गांव वाले ही करते हैं और प्रशासन के द्वारा कोई मदद नहीं की जाती है। उनके गांव में कई समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि गांव में प्रशासन के द्वारा कोई सुविधा नहीं दी गई है और न ही कोई लाभ दिया गया है। गांव के लोग अपने स्तर पर ही समस्याओं का समाधान करने की कोशिश करते हैं।गांव में एक पुराना मंदिर है, जो लगभग सात पीढ़ी पुराना है। उन्होंने कहा कि मंदिर की देखभाल गांव वाले ही करते हैं और प्रशासन के द्वारा कोई मदद नहीं की जाती है।

नोडल अधिकारी पुरातत्व विभाग डॉ विनोद पांडे ने बताया कि भगवान राम के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान सीतामढ़ी एक महत्वपूर्ण स्थल है। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने सीतामढ़ी में कुछ दिन रुककर भगवान शिव की पूजा की थी और सीता माता ने भी वहां पूजा की थी।डॉ विनोद पांडे ने बताया कि सीतामढ़ी में कई पुरातात्विक अवशेष प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के प्रयास से रायपुर के पुरातत्व विभाग की टीम ने हाल ही में सीतामढ़ी का निरीक्षण किया है और डॉक्यूमेंटेशन किया है।भविष्य में सीतामढ़ी के विकास के लिए कई योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग की टीम द्वारा किए गए डॉक्यूमेंटेशन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और स्थानीय लोगों को सूचित किया जाएगा।

शासन को सीतामढ़ी धाम के विकास के लिए एक विस्तृत योजना बनानी चाहिए और स्थानीय लोगों की मांगों को सुनना चाहिए। इससे सीतामढ़ी धाम का विकास होगा और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।स्थानीय लोगों को भी सीतामढ़ी धाम के विकास में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। वे शासन के साथ मिलकर सीतामढ़ी धाम के विकास के लिए काम कर सकते हैं और इसकी महत्ता को बढ़ावा दे सकते हैं।सीतामढ़ी धाम के विकास से पर्यटन के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।

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