
एस. के.‘रूप’
बैकुंठपुर–कोरिया/ रविवार 03 नवंबर को कायस्थ समाज के बंधुओं ने अपने आराध्य भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज का विधि-विधान से पूजन किया । आपको बता दें यह पूजन दीपावली के तीसरे दिन भाईदोज तथा गोवर्धन पूजा के साथ ही सम्पन्न किया जाता है , किंतु इस वर्ष अमावस्या दो दिन होने के कारण इसका शुभ संयोग दीपावली के चौथे दिन बन पाया है।

उक्त विषय पर विस्तार से बताते हुए कायस्थ परिवार से आने वाले वरिष्ठ गज़लकार एवम ह्यूमन राइट्स के साथ समाज सेवा में तत्पर शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि कार्तिक माह के यम द्वीतिया तिथि को पूरे विश्व के कायस्थ जन अपने इष्ट भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज का पूजन विधि-विधान से करते है । इस दिन हम अपने इष्ट का आवाहन कर कलम-दावात की पूजा करते हैं तथा उनके श्री मंत्र का लेखन करते हैं । पुराणों के अनुसार , हमारे आराध्य श्री चित्रगुप्त श्री महाराज जी की उत्पत्ति ब्रम्हा जी के काया अर्थात उनके शरीर से हुई है इसीलिए संसार में हमारा परिचय कायस्थ के रूप में है । हाथ में कलम दावात लेकर उत्पन्न हुए श्री चित्रगुप्त जी महाराज के बही-खाते में संसार में सभी प्राणियों के कर्मों का लेखा है । उन्होंने आगे कहा कि श्री चित्रगुप्त जी महाराज ने चराचर जगत को कलम के रूप में अक्षरों का वरदान दिया है । लेखकों को अक्षरों की जीविका देने वाले भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज को बारम्बार प्रणाम है ।



