जंगलों में फिर गूंजेगी बाघों की दहाड़
देश का 56वां टाइगर रिजर्व बना गुरु घासीदास-तमोर पिंगला, बाघ संरक्षण के साथ पर्यटन और रोजगार का खुलेगा नया अध्याय

कोरिया/एमसीबी/ छत्तीसगढ़ के उत्तर में फैले घने साल एवं मिश्रित वनों के बीच स्थित गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व अब देश के 56वें टाइगर रिजर्व के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है। गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और तमोर पिंगला अभयारण्य को मिलाकर अधिसूचित यह संरक्षित क्षेत्र न केवल क्षेत्रफल की दृष्टि से छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, बल्कि
देश के महत्वपूर्ण बाघ संरक्षण क्षेत्रों में भी तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।
वन विभाग का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण का मजबूत केंद्र बनने के साथ-साथ कोरिया एवं
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगा
। जंगल सफारी, ईको-टूरिज्म, होम-स्टे, नेचर ट्रेल और स्थानीय रोजगार के नए अवसर इस पूरे क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
वर्षों बाद लौटे जंगलों के असली राजा
कुछ वर्ष पूर्व गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में पहली बार बाघों के पदचिह्न और कैमरा ट्रैप में उनकी तस्वीरें सामने आई थीं। वैज्ञानिक अध्ययन एवं वन विभाग की जांच में स्पष्ट हुआ कि ये बाघ मध्यप्रदेश के संजय नेशनल पार्क से प्राकृतिक कॉरिडोर के माध्यम से इस क्षेत्र तक पहुंचे हैं।
इसी जैव विविधता और रणनीतिक महत्व को देखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार ने गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान तथा तमोर पिंगला अभयारण्य को मिलाकर
देश का 56वां टाइगर रिजर्व घोषित किया। इसे छत्तीसगढ़ के वन संरक्षण इतिहास का एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
चार से पांच बाघों की नियमित मौजूदगी
वन विभाग के अनुसार वर्तमान में टाइगर रिजर्व क्षेत्र में नियमित रूप से चार से पांच बाघों की मौजूदगी के प्रमाण मिल रहे हैं। कैमरा ट्रैप, पदचिह्न, मल विश्लेषण और नियमित गश्त के माध्यम से उनकी गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि संरक्षण की वर्तमान व्यवस्था जारी रही तो आने वाले वर्षों में यहां बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
बाघों के सुरक्षित भविष्य की तैयारी
टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद वन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है। कोर एरिया में गश्त बढ़ाई गई है, कैमरा ट्रैप की संख्या में वृद्धि की जा रही है तथा आधुनिक डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
बाघों के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चीतल सहित अन्य शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला मजबूत हो और बाघों के लिए स्थायी एवं सुरक्षित आवास विकसित हो सके।
प्राकृतिक टाइगर कॉरिडोर की सबसे बड़ी ताकत
गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व की सबसे बड़ी विशेषता इसका विस्तृत प्राकृतिक टाइगर कॉरिडोर है। यह कॉरिडोर मध्यप्रदेश के संजय नेशनल पार्क से शुरू होकर एमसीबी, कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर के जंगलों से गुजरते हुए झारखंड के बेतला टाइगर रिजर्व तक फैला हुआ है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यह प्राकृतिक मार्ग बाघों के सुरक्षित आवागमन, नए क्षेत्रों में विस्तार तथा आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
टाइगर रिजर्व बनने के बाद वन विभाग क्षेत्र को प्रमुख वन पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। भविष्य में यहां जंगल सफारी, ईको-टूरिज्म, होम-स्टे, नेचर ट्रेल, ट्रैकिंग रूट, बर्ड वॉचिंग, स्थानीय गाइड व्यवस्था तथा वन व्याख्या केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना है।
इन योजनाओं के साकार होने पर कोरिया एवं एमसीबी जिले देश के प्रमुख ईको-टूरिज्म स्थलों में शामिल हो सकते हैं।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
टाइगर रिजर्व बनने से स्थानीय युवाओं के लिए भी रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। जंगल सफारी, पर्यटन वाहन संचालन, स्थानीय गाइड, होम-स्टे, होटल व्यवसाय, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों की बिक्री तथा पर्यटन आधारित सेवाओं के माध्यम से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
वन विभाग की प्रमुख प्राथमिकताएं
*बाघ संरक्षण को मजबूत करना
प्राकृतिक आवास का संरक्षण
अवैध शिकार पर प्रभावी रोक
आधुनिक निगरानी प्रणाली का विस्तार
स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाना
ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देना
रोजगार के अवसर सृजित करना
एक नजर में
गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व
देश का 56वां टाइगर रिजर्व
राज्य : छत्तीसगढ़
क्षेत्रफल के आधार पर प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व
प्रमुख जिले : कोरिया एवं एमसीबी
वर्तमान में बाघों की अनुमानित मौजूदगी : 4 से 5
प्राकृतिक कॉरिडोर : *
संजय नेशनल पार्क (मध्यप्रदेश) → एमसीबी → कोरिया → सूरजपुर → बलरामपुर → बेतला टाइगर रिजर्व (झारखंड)
अधिकारी ने क्या कहा
गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर सौरभ सिंह ठाकुर ने बताया कि यह क्षेत्र बाघों का प्राकृतिक विचरण क्षेत्र है। कोरिया और सूरजपुर जिले की सीमा से लगे जंगलों में समय-समय पर बाघों की आवाजाही होती रहती है। वर्तमान में टाइगर रिजर्व की टीम लगातार निगरानी कर रही है और बाघों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि न हो।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्राकृतिक कॉरिडोर सुरक्षित रखा गया, मानव हस्तक्षेप नियंत्रित रहा और स्थानीय समुदाय को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा गया, तो गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व आने वाले वर्षों में देश के सबसे सफल टाइगर लैंडस्केप में शामिल हो सकता है। यह रिजर्व केवल बाघों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल, जंगल, जैव विविधता और स्थानीय अर्थव्यवस्था के संरक्षण का भी मजबूत आधार बनेगा।



