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जैविक खेती में हैं भविष्य की अपार संभावनाएं – श्रीमती रोक्तिमा

कलेक्टर ने केशगवा में जैव उत्पादक केंद्र का किया शुभारंभ

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REPORTER

कोरिया, 25 जुलाई 2026/
वनांचल सोनहत के विभिन्न ग्राम पंचायतों में जैविक खेती करने वाले किसानों को कृषि उपचार संबंधी सहूलियत देने के लिए केशगंवा में जैव उत्पादक केंद्र का औपचारिक शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी हुई दीदीयों द्वारा संचालित होने वाले जैव उत्पादक केंद्र का कलेक्टर कोरिया श्रीमती रोक्तिमा यादव ने फीता काटकर शुभारंभ किया।शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत सीईओ श्री योगेंद्र श्रीवास, जनपद सीईओ श्री मनोज जगत, बिहान टीम से तरुण सिंह, मसत राम सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

जैविक खेती में ही भविष्य

ग्राम पंचायत केशगंवा में सरस्वती महिला स्व सहायता समूह द्वारा शुरू किए गए जैव उत्पादक केंद्र के औपचारिक शुभारंभ कार्यक्रम में पंहुची कलेक्टर कोरिया श्रीमती रोक्तिमा यादव ने कहा कि आने वाला समय जैविक खेती के लिए सुनहरा समय है। बाजारों में प्रत्येक जैविक उत्पाद ग्राहकों द्वारा हाथों हाथ मंहगे दामों में खरीदा जा रहा है। इसलिए जैविक खेती से आर्थिक विकास के लिए असीम संभावनाएं बनी हुई हैं। उन्होंने क्षेत्र के किसानों को ज्यादा से ज्यादा जैविक कृषि अपनाने का सुझाव देते हुए कहा कि समूह की महिलाओं द्वारा प्राकृतिक वनस्पति का उपयोग कर बनाए जा रहे कीटनाशक और उत्पादवर्धक घोल का उपयोग फसलों में करें।

केशगंवा में 70 किसान जुड़ेA-1-1024x681 जैविक खेती में हैं भविष्य की अपार संभावनाएं - श्रीमती रोक्तिमा
स्व सहायता समूह की महिलाओं ने कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव को बताया कि पहले हमें भी इसके फायदे पता नहीं थे, जब हमने अपने खेतों में सब्जी और अन्य फसलों में इसका प्रयोग किया तो अच्छा परिणाम मिला। इसके बाद हमने अपने आस पास के किसानों को इन उत्पादों के बारे में जानकारी दी। कुछ ही समय में आस पास के 70 किसान इस जैव उत्पादक केंद्र से जुड़ चुके हैं और वह अपनी फसलों में जैविक कृषि अपनाते हुए कीट नाशक और उत्पादवर्धक घोल का उपयोग कर रहे हैं।

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बेहद कम कीमत पर उपलब्ध
ग्राम संगठन और सीएलएफ से आर्थिक सहायता प्राप्त करके शुरू किए गए इस जैव उत्पादक केंद्र में नीमास्त्र, दशपर्णी जैविक घोल, फूल्बिक एसिड घोल जैसे कुल आठ तरह के जैविक कीटनाशक और उर्वरक बनाए जा रहे हैं। इनकी प्रति लीटर कुल कीमत भी बेहद कम है। दीदियों ने बताया कि दवा को थोड़ी सी मात्रा में लेकर एक टंकी दवा बनती है जो बड़े क्षेत्र में उपयोग की जा सकती है। इस तरह एक लीटर जैविक घोल से एकड़ भर फसल का सही उपचार किया जा सकता है।

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