छत्तीसगढ़सरगुजा संभाग

सिस्टम का ‘शॉर्ट सर्किट’: तीन सालों से अंधेरे में ग्रामीण, फिर भी थमाया जा रहा बिजली का बिल

न सड़क, न रोशनी, न साफ पानी खेतों की मेड़ और लालटेन के भरोसे छाता टाँगर

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​सोनहत। जहाँ एक ओर देश 5G और डिजिटल क्रांति की बात कर रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के सोनहत जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कैलाशपुर का छाता टाँगर मोहल्ला बीते 3 साल से अधिक दिनों से ‘पाषाण काल’ में जीने को मजबूर है। विकास के तमाम दावों की पोल खोलता ग्राम पंचायत कैलाशपुर का छाता टाँगर मोहल्ला आज के दौर में भी आदिम युग की चुनौतियों से जूझ रहा है। यहाँ के ग्रामीण न केवल 3 साल से अंधेरे में रहने को मजबूर हैं, बल्कि उनके पास गाँव से बाहर निकलने के लिए एक अदद सड़क व साफ पानी तक मयस्सर नहीं है।

 

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​शॉर्ट सर्किट ने छीनी रोशनी, विभाग ने मारी कुंभकर्णी नींद
​मामला आज से तीन साल पहले का है, जब एक मामूली शॉर्ट सर्किट ने खंभों के तारों को अपनी चपेट में ले लिया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि विभाग चंद दिनों में तार दुरुस्त कर देगा, लेकिन दिन हफ्तों में बदले और हफ्ते सालों में। आज तीन साल बीत जाने के बाद भी तार खंभों पर जलकर लटक रहे हैं, लेकिन बिजली विभाग के पास इन्हें बदलने की फुर्सत नहीं है।

​अंधेरे का ‘महंगा’ तमाशा: बिना बिजली, समय पर आ रहा बिल

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​विभागीय लापरवाही की पराकाष्ठा तो देखिए—जिस मोहल्ले में तीन साल से एक बल्ब नहीं जला, वहाँ के ग्रामीणों को हर महीने ‘बिजली का बिल’ समय पर थमाया जा रहा है। ​हैरानी की बात तो यह है कि जब बिजली की खपत शून्य है, तो बिल किस आधार पर बन रहा है?

 

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​विकास की पहुँच से कोसों दूर: खेतों की पगडंडी ही सहारा

​हैरानी की बात है कि छाता टाँगर मोहल्ले तक पहुँचने के लिए आज भी कोई पक्की या कच्ची सड़क उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों को अपने घरों तक पहुँचने के लिए दूसरों के खेतों को पार कर पैदल जाना पड़ता है। खेती के सीजन में जब खेतों में फसल खड़ी होती है या पानी भरा होता है, तब सभी रास्ते बंद हो जाते हैं यदि कोई बीमार पड़ जाए या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो उबड़-खाबड़ मेड़ों और कीचड़ भरे खेतों को पार करना किसी जंग जीतने से कम नहीं है।

​ग्रामीणों का आक्रोश: ग्रामीणों का कहना है कि यह बिलों का बोझ निरंतर बढ़ता जा रहा है, जो उनके साथ एक क्रूर मजाक है।

​प्रशासनिक तंत्र पर उठते गंभीर सवाल

​क्या बिजली विभाग के आला अधिकारियों को इस बात की खबर नहीं कि एक पूरा मोहल्ला अंधेरे में है?

​बिना मीटर रीडिंग और बिना बिजली आपूर्ति के बिल जारी करना क्या ग्रामीणों के साथ अन्याय नही है ?

​क्या जनप्रतिनिधि चुनाव खत्म होते ही जनता की बुनियादी समस्याओं को भूल गए हैं?

बिलों को माफ कर बिजली व्यवस्था चालू करे विभाग-पुष्पेंद्र

उक्त मामले में कोरिया जन सहयोग समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र राजवाड़े ने कहा है कि यदि जल्द ही तारों को नहीं बदला गया और फर्जी बिलों को माफ नहीं किया गया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या छाता टाँगर की किस्मत में अभी और अंधेरी रातें लिखी हैं।

 

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क्या कहते है लोग
हम तीन साल से अंधेरे में हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जंगली जानवरों का डर बना रहता है, लेकिन विभाग को सिर्फ पैसे वसूलने की चिंता है। जब बिजली ही नहीं तो बिल कैसा?”

रमेश कुमार ग्रामीण

छाता टाँगर के ग्रामीण 3 साल से परेशान हैं यहां जल्द बिजली व्यवस्था बहाल कर पुराने बिलो को विभाग शून्य घोषित करे,साथ ही प्रशासन सड़क की भी व्यवस्था बनाये

राजू कुमार साहू ग्रामीण कैलाशपुर पँचायत

छाता टाँगर में ग्रामीण मूल भूत सुविधाओ से जूझ रहे हैं बिजली नही मिल रही पर बिल मिल रहा है यह कैसा खिलवाड़ किया जा रहा है

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