मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर

कलेक्टर साहब! फसल कट गई, ‘वादा’ कब कटेगा? नक्शे से गायब पण्डो जनजाति का गांव ‘पौड़ीडोल’ आज फिर खटखटाया कलेक्ट्रेट का दरवाजा!

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प्रदीप पाटकर 

​मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर /विशेष कवरेज।​शासन-प्रशासन के दावों की हवा निकालती एक कड़वी सच्चाई मनेन्द्रगढ़ के तहसील कोटाडोल से सामने आई है। जहाँ विशेष पिछड़ी जनजाति (पण्डो परिवार) अपनी पीढ़ियों पुरानी जमीन को सरकारी नक्शे में दर्ज कराने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। 18 नवंबर को मिले आश्वासन के बाद भी आज तक प्रशासन की नींद नहीं खुली है।

​प्रशासन की ‘तारीख पर तारीख’: नवंबर का वादा, मार्च का सन्नाटा।

​ग्रामीणों ने पिछले साल 18 नवंबर 2025 को जनदर्शन में (टोकन नंबर 2290125001290) अपनी व्यथा सुनाई थी। तब साहब ने कहा था— “फसल कटने दो, सीमांकन हो जाएगा।” आज खेत खाली हैं, फसल कट चुकी है, लेकिन प्रशासन की फाइलें अभी भी बंद हैं। आज मंगलवार को ग्रामीण पुनः कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी जमीन और वजूद की गुहार लगाएंगे।

WhatsApp-Image-2026-03-24-at-7.31.46-PM-1-736x1024 कलेक्टर साहब! फसल कट गई, 'वादा' कब कटेगा? नक्शे से गायब पण्डो जनजाति का गांव 'पौड़ीडोल' आज फिर खटखटाया कलेक्ट्रेट का दरवाजा!

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​हाथ में पट्टा, पर जमीन पर वन विभाग का ‘हंटर’।

​विडंबना देखिए, पण्डो परिवारों के पास ‘तिरंगा और राजस्व पट्टा’ तो है, लेकिन सीमांकन न होने का फायदा उठाकर वन विभाग उनकी पट्टे वाली जमीन पर धड़ल्ले से प्लांटेशन (पौधरोपण) कर रहा है। आदिवासी अपनी ही जमीन पर ‘अतिक्रमणकारी’ बनाए जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में विवाद और तनाव की स्थिति बनी हुई है।

​सरकारी रिकॉर्ड की ‘जादुई’ चूक: पट्टे तो मिले, पर नक्शे से गांव ही गायब!

​ग्राम पंचायत घाघरा के आश्रित ग्राम पौड़ीडोल का अस्तित्व राजस्व नक्शे में स्पष्ट न होना प्रशासन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। नक्शा दुरुस्त न होने के कारण भू-माफियाओं और बाहरी तत्वों की नजर आदिवासियों की कीमती जमीन पर है। ग्रामीण डरे हुए हैं कि अगर जल्द सीमांकन नहीं हुआ, तो उनकी पुश्तैनी जमीन छीन ली जाएगी।

​”साहब! जमीन गई तो हम मर जाएंगे”: विशेष पिछड़ी जनजाति का दर्द।

​पण्डो जनजाति के ग्रामीणों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से यहाँ काबिज हैं। भू-स्वामी मद में नाम दर्ज होने के बावजूद उन्हें अपने ही अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। आदिवासियों के लिए जमीन सिर्फ मिट्टी नहीं, उनका जीवन है। अगर यह छीनी गई, तो यह एक पूरी जनजाति के साथ ‘अपूर्णनीय क्षति’ होगी।

​आज फिर ‘न्याय’ की आस में उमड़ा जनसैलाब।

​आज मंगलवार को पौड़ीडोल के समस्त ग्रामवासी भारी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंच रहे हैं। उनकी मांग स्पष्ट है कि ​तत्काल सीमांकन राजस्व विभाग की टीम तुरंत मौके पर भेजी जाए।​नक्शा सुधार पौड़ीडोल को घाघरा के आधिकारिक नक्शे में जोड़ा जाए।​अवैध दखल पर रोक वन विभाग और बाहरी लोगों का हस्तक्षेप तुरंत बंद हो।

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