कोरियामनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर

रामवनगमन पथ बदहाल करोड़ों के दावों के बीच राम की तपोस्थली रो रही बदहाली के आंसू

सीतामढ़ी में टपक रही मंदिरों की छत, बंद पड़ी हाईमास्ट लाइट और धूप-पानी से जर्जर हो रही भगवान राम की प्रतिमा; पर्यटन और पुरातत्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

[responsivevoice_button voice="Hindi Male"]

एमसीबी/ छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनगमन पथ को धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाने के दावे किए जा रहे हैं। योजनाओं और करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की बातें भी सामने आती रही हैं, लेकिन मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के हरचौका स्थित सीतामढ़ी रामवनगमन पथ की जमीनी तस्वीर इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़ी मान्यताओं और श्रद्धालुओं की आस्था के इस महत्वपूर्ण केंद्र में रखरखाव का अभाव, जलभराव, टूट-फूट और बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिखाई दे रही है।

टपकती छत के नीचे पूजा, मंदिर में पहुंच रहा बारिश का पानी

बरसात शुरू होते ही सीतामढ़ी मंदिर परिसर की व्यवस्था की खामियां सामने आ गई हैं। कई जगहों पर मंदिर की छत से पानी टपक रहा है और बारिश का पानी मंदिर के भीतर तक पहुंच रहा है। भगवान भोलेनाथ के मंदिर सहित मां काली, उनकी सातों बहनों, माता दुर्गा, माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु और 12 ज्योतिर्लिंग वाले परिसर में श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के दौरान परेशानी उठानी पड़ रही है।

स्थानीय निवासी संतोष प्रसाद तिवारी के अनुसार मंदिर की छत कई वर्ष पहले बनाई गई थी, लेकिन इसके बाद पर्याप्त मरम्मत नहीं हुई। उनका कहना है कि छत जगह-जगह क्षतिग्रस्त है और बारिश में पानी अंदर टपकता है। धार्मिक आयोजन, कथा और प्रवचन भी बारिश के मौसम में प्रभावित होते हैं।

20 हजार श्रद्धालु आते हैं, लेकिन व्यवस्था बेहाल

[wp1s id="1076"]

रामवनगमन पथ समिति के अध्यक्ष एवं हरचौका के सरपंच लालसाय मरावी के मुताबिक खुजलैया और धार्मिक आयोजनों के दौरान करीब 20 हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके बावजूद परिसर में टूट-फूट, जलभराव और अन्य अव्यवस्थाएं बनी हुई हैं। उनका कहना है कि पंचायत के पास इतने बड़े धार्मिक एवं पर्यटन स्थल की मरम्मत के लिए पर्याप्त फंड नहीं है और पिछले एक-दो वर्षों में पर्यटन विभाग की ओर से भी रखरखाव को लेकर कोई विशेष पहल नहीं की गई।

राम की विशाल प्रतिमा भी रखरखाव के इंतजार में

हरचौका में स्थापित भगवान श्रीराम की विशाल प्रतिमा भी नियमित रखरखाव के अभाव में धूप और बारिश की मार झेल रही है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जिस स्थल को धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की बात कही जाती है, वहां स्थापित प्रमुख प्रतिमा का ही संरक्षण नहीं हो रहा तो विकास के दावों का वास्तविक लाभ श्रद्धालुओं को कैसे मिलेगा?

हाईमास्ट लगी, लेकिन रोशनी गायब

परिसर में रात के समय रोशनी और सुरक्षा के लिए हाईमास्ट लाइट लगाई गई थी। ग्रामीणों के मुताबिक यह लंबे समय से खराब पड़ी है। बिजली गुल होने की स्थिति में भी परिसर को रोशन रखने की व्यवस्था का दावा किया गया था, लेकिन अब हाईमास्ट खुद अंधेरे में है। इससे रात में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

पत्थरों में इतिहास, संरक्षण की जिम्मेदारी किसकी

सीतामढ़ी के आसपास प्राचीन मंदिरों के अवशेष और विशाल पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियां मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन अवशेषों का संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन अब तक अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ। यदि ये अवशेष ऐतिहासिक महत्व के हैं तो इनके संरक्षण की जिम्मेदारी किस विभाग की है और अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसका जवाब सामने नहीं आया है।

धार्मिक आस्था का केंद्र, सुविधाओं का टोटा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान चित्रकूट से आगे बढ़ते हुए हरचौका पहुंचे थे। मवई नदी, गुफाओं, 12 ज्योतिर्लिंग और विभिन्न देवी-देवताओं से जुड़े धार्मिक स्थलों के कारण हरचौका का महत्व और बढ़ जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था के बावजूद यहां श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव चिंता का विषय बना हुआ है।

पूर्व विधायक प्रतिनिधि ने सरकार पर साधा निशाना

हरचौका की बदहाल व्यवस्था को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक प्रतिनिधि अंकुर प्रताप सिंह ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हरचौका को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए योजनाएं लाई गई थीं, लेकिन वर्तमान में रखरखाव के अभाव में कई सुविधाएं खराब हो रही हैं और परिसर में पानी भर रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार खुद को सनातन और हिंदू धर्म की हितैषी बताती है, लेकिन भगवान श्रीराम से जुड़ी इस पवित्र धरती की स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने हरचौका की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और नियमित रखरखाव की मांग की।

करोड़ों के दावे, फिर हरचौका की सुध कौन लेगा

रामवनगमन पथ को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने की योजनाएं और करोड़ों रुपये के खर्च के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन हरचौका की जमीनी हकीकत अलग कहानी बयां कर रही है।

– मंदिरों की क्षतिग्रस्त छतों की मरम्मत अब तक क्यों नहीं हुई?
– बारिश में परिसर में पानी भरने की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया?
– भगवान श्रीराम की विशाल प्रतिमा के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
– वर्षों से खराब हाईमास्ट लाइट अब तक क्यों नहीं सुधारी गई?
– प्राचीन मंदिर अवशेषों के संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग ने क्या कदम उठाए?
– पिछले एक-दो वर्षों में पर्यटन विभाग ने यहां कौन-कौन से रखरखाव कार्य कराए?
– जब पंचायत के पास पर्याप्त फंड नहीं है तो संबंधित विभाग जिम्मेदारी क्यों नहीं उठा रहे?

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मांग है कि रामवनगमन पथ, सीतामढ़ी मंदिर परिसर, 12 ज्योतिर्लिंग, गुफाओं, धार्मिक स्थलों और प्राचीन अवशेषों का तत्काल सर्वे कराया जाए। केवल योजनाओं और घोषणाओं के बजाय जमीन पर स्थायी काम दिखाई दे।

आज मवई नदी बह रही है, जंगल हरियाली से भरे हैं और श्रद्धालुओं की आस्था बरकरार है। लेकिन टपकती छत, बंद हाईमास्ट और जर्जर होती प्रतिमा एक ही सवाल पूछ रही है रामवनगमन पथ के नाम पर विकास के दावे आखिर हरचौका की जमीन तक कब पहुंचेंगे?

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!