PMGSY में ‘तीन बंदर राज’: न गड़बड़ी दिखती, न शिकायत सुनाई देती, न कार्रवाई की आवाज करोड़ों की सड़क में खेल
रिटर्निंग वॉल कागज़ों में मजबूत, ज़मीन पर खोखली

कोरिया/ जिले के सोनहत–रामगढ़ मार्ग (T-01) से कछाड़ी तक बन रही करीब 16 किलोमीटर लंबी सड़क इन दिनों सवालों के घेरे में है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए जा रहे रिटर्निंग वॉल और अन्य निर्माण कार्य में शुरू से ही भारी गड़बड़ियों की बू आ रही है। लेकिन जिम्मेदार अफसर मानो “तीन बंदरों” की भूमिका में हैं—न कुछ देखना, न सुनना, न बोलना।

जमीन पर हकीकत: बनते ही बिखर रही दीवार
निर्माण स्थल पर हालात चौंकाने वाले हैं। रेत, गिट्टी और सीमेंट का अनुपात मानकों से कोसों दूर बताया जा रहा है। नतीजा—दीवार बनते ही जगह-जगह से झड़ रही है। क्योरिंग (पानी तराई) के अभाव में दीवारों में शुरुआती दरारें साफ दिखने लगी हैं, जो आने वाले समय में बड़े हादसे का संकेत दे रही हैं।
नींव कमजोर, सरिया गायब!
सबसे गंभीर आरोप रिटर्निंग वॉल की नींव को लेकर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बेस कमजोर है और ऊंचाई के अनुपात में मजबूती नदारद। वहीं, सरिया (लोहे की रॉड) का उपयोग भी या तो बेहद कम है या कई जगहों पर दिख ही नहीं रहा। जबकि स्टीमेट में इसकी व्यवस्था है या नहीं—यह अब जांच का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
शिकायतें बेअसर, अधिकारी बेखबर या बेपरवाह?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो मौके पर गंभीर निरीक्षण हुआ और न ही किसी पर कार्रवाई। फोन कॉल्स तक रिसीव नहीं किए जा रहे। सवाल उठता है—क्या सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं?
“तीन बंदर” बन गए जिम्मेदार अधिकारी
ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि अधिकारी गड़बड़ी “देखना नहीं चाहते”, शिकायत “सुनना नहीं चाहते” और कार्रवाई “बोलना नहीं चाहते”। यही वजह है कि लोग अब खुलेआम इनकी तुलना गांधी जी के तीन बंदरों से कर रहे हैं।
करोड़ों की लागत, लेकिन भरोसा शून्य
अगर समय रहते इस निर्माण की गुणवत्ता नहीं सुधारी गई, तो यह सड़क विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की मिसाल बनकर रह जाएगी। करोड़ों रुपये पानी में जाने से पहले प्रशासन जागेगा या फिर खामोशी ही इस घोटाले की सबसे बड़ी ढाल बनी रहेगी—यह देखने वाली बात होगी।



