शिक्षा मंदिर फिर हुआ शर्मसार शिक्षा के मंदिर का ही पुजारी शराब के नशे में बच्चों को पढ़ा रहा शिक्षक, मेहदौली स्कूल में अंधकार की ओर बढ़ता भविष्य

सतीश मिश्रा
एमसीबी/छत्तीसगढ़ सरकार एक ओर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर योजनाएं और प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षक सरकार की इस मेहनत पर पानी फेरने में जुटे हुए हैं।यह मामला एमसीबी जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र भरतपुर विकासखंड के मेहदौली ग्राम पंचायत के शासकीय प्राथमिक शाला से जुड़ा हुआ है, यहां पदस्थ शिक्षक शराब के नशे में धुत होकर स्कूल आता है और बच्चों को पढ़ाने के बजाय उनके साथ आपत्तिजनक हरकतें तक करने से नहीं चूकता।

गांव में जब प्राथमिक शाला की स्थापना हुई थी तब ग्रामीणों में उम्मीदों की लहर दौड़ गई थी। लोगों ने सोचा था कि अब उनके बच्चों को शिक्षा का उजाला मिलेगा और वे भी पढ़-लिखकर जिले और राज्य का नाम रोशन करेंगे। लेकिन यह सपना अब धीरे-धीरे टूटता दिख रहा है।
शिक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर मॉनिटरिंग और निरीक्षण की बात तो कही जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से स्कूल में किसी भी उच्चाधिकारी का औचक निरीक्षण नहीं हुआ है। ऐसे में शराबी शिक्षक की लापरवाहियों को बढ़ावा मिल रहा है।
मीडिया के माध्यम से जागे अधिकारी, जांच की बात
जब इस विषय को लेकर मीडिया ने सवाल उठाया और मामले को जिला शिक्षा अधिकारी के संज्ञान में लाया गया, तब जाकर अधिकारियों की नींद टूटी। जिला शिक्षा अधिकारी आर. पी.मिरे ने कहा कि, “आपके माध्यम से यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
हालांकि ग्रामीणों का सवाल वाजिब है कि जब तक मीडिया या बाहरी दबाव न हो, तब तक शिक्षा विभाग की आंखें क्यों बंद रहती हैं? क्या शिक्षा विभाग सिर्फ कागज़ों में सुधार दिखाने में जुटा है?
बच्चों का भविष्य अधर में
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना उसका हक है, लेकिन जब शिक्षक ही नशे में धुत होकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करें, तो यह हक एक मज़ाक बनकर रह जाता है।
मेहदौली जैसे आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी है ऐसे शराबी और गैर-जिम्मेदार शिक्षकों पर तत्काल कार्रवाई करना।
फिलहाल ग्रामीणों को सरकार से यही उम्मीद है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और शराबी शिक्षक को स्कूल से तत्काल हटाकर ऐसे मामलों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बना रहे और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।



