
एस. के.‘रूप’
बैकुंठपुर/”अब नए लगाने नहीं, पहले लगाए गए वृक्षों की सुध लेने का वक्त है।हर वर्ष वृक्षारोपण के नाम पर बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाते हैं, फोटो खिंचवाए जाते हैं, समाचार छपते हैं और फिर सब कुछ भुला दिया जाता है। इन वृक्षों का क्या हुआ? कितने बचे, कितने सूख गए, कितनों को देखभाल मिली?
अब जरूरत है केवल पौधारोपण नहीं, पूर्व में लगाए गए पौधों की तहकीकात की।देखें कि किसने जिम्मेदारी निभाई और किसने केवल औपचारिकता पूरी की।अभियान का उद्देश्य होना चाहिए पूर्व वर्षों में लगाए गए पौधों का भौतिक सत्यापन,
उनके संरक्षण की स्थिति का मूल्यांकन,
देखभाल के लिए जवाबदेही तय करना,
बचे हुए पौधों की पुनः देखभाल की योजना बनाना। वृक्ष खोजो अभियान केवल वृक्षों को खोजने का नहीं,वृक्षों से जुड़ी जिम्मेदारियों को पहचानने और निभाने का अभियान है।”

यह कहना है अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के प्रांत प्रमुख एवं समाज के हितकर आवाज उठाने वाले सेवानिवृत्ति प्रधान पाठक राजेंद्र सिंह का जिसका समर्थन करते हुए जनहित संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष एस. के. ‘रूप’ ने कहा कि –‘यह अत्यंत आवश्यक है

पौधा लगाकर उसका संरक्षण व संवर्धन ना हो तो वह औचित्यहीन है।पौधे लगाना सही है पर्यावरण के प्रति हितकर है उससे कहीं ज्यादा उसका संरक्षण जरूरी है जो आमतौर पर नहीं हो पता है संरक्षण के कमी के कारण पूर्व में लगाए गए पौधे ठूंठ में बदल गए। कई जगहों पर नामोनिशान नहीं है। वृक्ष खोजो अभियान वृक्ष के प्रति,पौधों के प्रति नैतिक जिम्मेदारी विकसित करेगी।’



