एक युग का अंत : डा सुरेद्र दुबे… डा कुमार विश्वास, सीएम साय सहित राजनीतिक,सामाजिक गलियों शोक की लहर सोशल मीडिया में लगातार दे रहे श्रद्धांजलि …..

एस. के.‘रूप’
रायपुर/ आज छत्तीसगढ़ माटीपुत्र जिसने देश विदेश में प्रदेश का गौरव बढ़ाया जिसने छत्तीसगढ़ को ही परिभाषित कर दिया जिसने राजभाषा आयोग के अध्यक्ष का दायित्व निभाया और साहित्य जगत में नूतन कीर्तिमान स्थापित किया ऐसे पद्मश्री डा सुरेंद्र दुबे का चले जाना छत्तीसगढ़ वासियों के लिए गहरे शोक का दिन है। कई राजनीतिक सामाजिक हस्तियों ने शोक प्रगट किया है। सुरेंद्र मरते नही…..ये जीवंत ही रहते है और रहेंगे..!!










साथ अधूरा छोड़ कर चले गए कका
पद्मश्री डॉ सुरेन्द्र दुबे जी से बीस-तीस वर्षों का पारिवारिक संबंध था। तीन पीढ़ियों की पुस्तकों को प्रकाशित करने का अवसर इस परिवार ने दिया। पिता श्री गर्जन सिंह दुबे, स्वयं डॉ सुरेन्द्र दुबे और पुत्र डॉ अभिषेक दुबे।

पिछले चार महीने से उनके अभिनंदन ग्रंथ पर काम कर रहा था। परसों लंबी बातचीत हुई। अगले महीने लोकार्पण की तैयारी थी। दुर्लभ फोटो, पुराने लेखों और रचनाओं को हमने मिलकर चुना। इस बीच आज वे धोखा देकर चले गए। छत्तीसगढ़ महतारी का यह लाडला पुत्र छत्तीसगढ़ का अंतरराष्ट्रीय गौरव थे।
उनके साथ 2007 में अमेरिका और 2018 में न्यूयॉर्क जाने का अवसर मिला। अनेक यात्राओं, समारोह और कवि सम्मेलन में छोटे भाई की तरह साथ रहा। मुझ पर अतिरिक्त स्नेह के कारण छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सम्मेलनों का मैं सूत्रधार रहा।
छत्तीसगढ़ को वैश्विक क्षति हुई है। सदियों तक यह कमी पूरी नहीं हो सकती। सदियों में एक सुरेन्द्र दुबे जन्म लेते हैं। कोशिश करूंगा यह ग्रंथ उनके सपनों के अनुरूप निकल सके। छत्तीसगढ़ी को यह बहुत बड़ी क्षति है। सादर नमन। डॉ सुधीर शर्मा और डॉ तृषा शर्मा एवं परिवार।



