
एस. के.‘रूप’
एमसीबी/ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम, वन्य प्राणी संरक्षण कार्यक्रम का आयोजन और वन्य प्राणी का ग्रामों के ओर ही रुख तलाश भोजन और आवास की क्योंकि जंगल अब जंगल नही रह गया है।
और कुछ जगह खासतौर पर जंगल के रक्षक ही भक्षक बन बैठे है। चाहे वो बाघ तेंदुआ आदि की रहस्यमई मौत हो या फिर नए नवेले बायसन की अथवा अन्य वन्य प्राणियों की। चाहे खानापूर्ति के लिए प्लांटेशन हो या वर्षों से काबिज अधिकार के लिए विशेष पिछड़ी जनजातियों को डरा धमकाकर खदेड़ना यह हाल है वनाचल एमसीबी के जनकपुर क्षेत्र का।
ऐसा ही एक संरक्षित वन्य प्राणी भालू जनकपुर के ग्राम कंजिया में उस समय कौतूहल का विषय बन गया जब बुधवार की सुबह ग्रामीणों ने भालू को तारों के बीच फंसा देखा। अंदाजा लगाया जा रहा है कि भालू गांव में भोजन आदि की तलाश में आया होगा और बारवेट वायर में फंस गया। प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीण प्रकाश से मिली जानकारी के अनुसार यह भालू तारों के बीच में फंस गया था हम सबने देखा अन्यथा भालू की मौत हो सकती थी उसे निकाल दिया गया है भालू अब सुरक्षित है। जो कार्य वन अमले को करना चाहिए उसे ग्रामीण कर रहे है। यह ग्रामीणों के लिए प्रशंसनीय तो वन अमले के लिए निंदनीय है। जबकि ग्रामीणों ने वन अमले को इसकी सूचना दी लेकिन कोई भी नही पहुंचा यही है क्या यही है वन विभाग और उसका कार्य।वन अमले के बीट प्रभारी गार्ड्स रक्षक प्रभृति अपने कार्यक्षेत्र का दौरा ही नही करते । फिलहाल भालू की जान बच गई है उसे देखने लोगो का हुजूम उमड़ पड़ा था।



