मूलभूत सुविधाओं से वंचित आदिवासी वनाश्रित ग्राम वासियों ने लोकसभा चुनाव का किया बहिष्कार
कहा: सरकारें ध्यान ही नही देती हमारे गांव में सड़क,पानी,नेटवर्क,शिक्षा, ईलाज,बिजली तक नही।

सतीश मिश्रा
जनकपुर/ जब पूरा गांव ही लोकतंत्र के महापर्व का बहिष्कार कर दे तो समझ लेना चाहिए कि व्यवस्था भ्रष्टाचार की भेंट इस कदर चढ़ गई है कि वन आश्रित आदिवासी समाज के पास कोई दूसरा विकल्प ही नही बचा। उन्हे विश्वास ही नहीं है रह गया है कि आने वाला कोई भी शासन उन्हे पानी सड़क स्वास्थ्य जैसी मूलभूत और अत्यंत जरूरी आवश्यता पूरी कर सकेगा क्योंकि हर एक बार चुनाव के समय वोट के लिए नेतागण उसने यही वायदा किया करते है और फिर किसी ने अपना शक्ल नही दिखाया ना तो वायदा निभाया और हाल वही बेहाल ।

बस सरकार बदल रही है बन रही है और पनप रही है केवल आदिवासी ही ज्यों के त्यों सुविधाविहीन जीवन जी रहे है और स्वास्थ्य,कुपोषण,शिक्षा ,जीवन स्तर के लिए संघर्ष कर रहे है।
बार बार विनती करने पर भी,आवेदन पर आवेदन देने पर भी इनके साथ न्याय नहीं हुआ यह केवल एक गांव की बात नही है ऐसे कई कई गांव है लेकिन हम बात कर रहे है एमसीबी जिले के जनकपुर के पोंडी ग्राम की। जहां कोई सुविधा नहीं है। और ग्रामीण आदिम जीवन जीने को मजबूर है शनिवार को ग्रामीणों ने आगामी लोकसभा के चुनाव में वोटिंग करने से मना कर दिया। सभी ग्रामवासियों ने एक स्वर में चुनाव मतदान का बहिष्कार कर दिया। इस भीषण गर्मी में महिलाएं बच्चो को लिए बूढ़े वृद्ध और युवा सभी ने अनुविभागीय दंडाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर आगामी लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार कर दिया।
ज्ञापन में क्या लिखा है :
“मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण दयनीय स्थिति होने पर समस्त ग्राम वासियों द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाता है।ग्राम पोड़ी थाना कोटाडोल पोस्ट घघरा तहसील भरतपुर जिला एमसीबी छत्तीसगढ़ के हम समस्त ग्रामवासी आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

हमारे ग्राम में जीवन जीने के लिए अत्यंत आवश्यक पीने का पानी का भी अभाव है हमें नाला, उबका, आदि का दूषित पानी पीकर जीवन रक्षा करना पड़ता है जिससे कई बार उल्टी दस्त बीमारी का सामना करना पड़ता है और इलाज के अभाव में जान जाने का भय रहता है।हमारे गांव में बिजली की सुविधा भी नहीं है खंभे टूट गए हैं साथ ही कभी कभार बिजली आ गई तो अधिकतर अंधेरे में ही गुजारा करना पड़ता है वर्षा के मौसम में करैत आदि सांप के काट लेने का भय भी बना रहता है इसके पूर्व में भी सर्पदंश से कई जाने जा चुकी हैं।हमारे गांव में इलाज की सुविधा नहीं है बीमार पड़ने पर एक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है कि वहां इलाज कराया जा सके मजबूरन जंगली जड़ी बूटी आदि के द्वारा या बीमार व्यक्ति को कई किलोमीटर खटिया पालकी आदि में ढोकर अन्य ग्राम ले जाकर इलाज कराया जाता है हमारे ग्राम में स्वास्थ्य विभाग के कोई भी अधिकारी कर्मचारी कभी नजर नहीं आते ना ही तो महिला बाल विकास के कर्मचारियों द्वारा कुपोषित बच्चों गर्भवती महिलाओ का ध्यान रखा जाता है ।हमारे गांव पोड़ी में मोबाइल नेटवर्क तक की सुविधा नहीं है किसी आवश्यक कार्य अथवा परिजन आदि से जरूरी संपर्क स्थापित करने के लिए सुदूर पहाड़ में जाकर नेटवर्क ढूंढना पड़ता है और वहां पर भी कभी-कभी नेटवर्क प्राप्त नहीं होता है जिसके कारण हम जरूरी संदेशों का आदान-प्रदान तक नहीं कर पाते।

हमारे गांव में सड़क ही नहीं है किसी आपातकाल स्थिति में मरीजों को बीमार वृद्ध महिला या गर्भवती महिला बच्चों को बीमार पड़ने पर खटिया डोली आदि के माध्यम से ढोकर इलाज कराने ले जाया जाता है सड़क नहीं होने के कारण हमारा गांव आधुनिक सुविधाओं से भी वंचित व दरकिनार है कोई विशेष अथवा निम्न अधिकारी तक ग्राम में प्रवेश नहीं करता जनप्रतिनिधियों का तो तभी चेहरा तक नहीं दिखता।हमारे गांव में बच्चों के उज्जवल भविष्य एवं पढ़ाई हेतु प्राथमिक शाला के अतिरिक्त अन्य कोई विद्यालय नहीं है जिससे नवनिहालों का भविष्य अंधकारमय है विद्यार्थी अच्छी शिक्षा ग्रहण करके आने वाले समय में अपने परिवार समाज और देश के कर्णधार भी साबित होते हैं लेकिन हमारे गांव के बच्चों को उज्ज्वल भविष्य निर्माण में शिक्षा का अभाव है।हमें आज दिनांक तक सौ वर्षों से अधिक का जंगल जमीन में घर परिवार के साथ कब्जा होने पर भी वन अधिकार पत्रक नहीं मिला है, हमने कई कई बार ग्राम पंचायत में फॉर्म भरने से लेकर तहसील कलेक्ट्रेट आदि के चक्कर लगा लिए लेकिन किसी भी ग्रामीण को उसका पट्टा नहीं मिला, जमीन में हेरा फेरी कर दी गई है किसी ग्रामीण को उसके हद का नक्शा का आदि का कोई पता नहीं है जमीन का पट्टा नहीं होने के कारण एक भय बना रहता है कि कहीं इतने वर्षों से हम जहां पर निवास कर रहे हैं वह स्थान ही ना छीन लिया जाए ।
अतः मजबूरन दुखी होकर एवं मूलभूत सुविधाओं के अभाव एवं किसी प्रकार से प्रशासनिक व प्रतिनिधियों के द्वारा ध्यान नहीं देने केवल चुनाव के समय वोट के लिए दिखाई देने से क्षुब्ध होकर हम समस्त ग्रामवासी ग्राम पौड़ी आगामी लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लेते हैं लेकिन हम यह भी कहते हैं कि इस लोकतंत्र में अपने मत का प्रयोग करना हमारा अधिकार है अगर हमारी मांगे पूरी कर दी जाए अगर हमें मूलभूत सुविधाएं बिजली सड़क पानी स्वास्थ्य आदि उपलब्ध करा दिया जाए तो हम लोकतंत्र के इस महापर्व में अवश्य हिस्सा लेंगे लेकिन महोदय जिसके घर में ही दुख हो दरिद्रता हो कुपोषण हो लाचारी हो तो वह कैसे पर्व माना पाएगा।
ज्ञापन देने में सुखमंती सिंह,रामशरण पण्डो, नंदलाल पंडो,बृजलाल पण्डो अर्जुन पण्डो,कमलसाय,बुद्धलाल, महाबली,अनारकली,सुंदरलाल, चमेली,गीता,श्यामकली,जगधारी, नंदलाल यादव,सोनसाय,कमलभान,मोहनराम,शिवधारी,रामधनी,बेलावती,लखन,सहित भारी संख्या में ग्रामीण जन मौजूद रहे।



