मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर

हजारों लोगों की जान बचाता है ये शांत जीव गोहरा

दुर्भाग्य से जानकारी के अभाव में जहरीला समझ कर मार दिया जाता है

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भरतपुर स्वास्थ्य केन्द्र क्षेत्र में अमरदीप गुप्ता ने किया भ्रम का scientifically खंडन

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर / क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भरतपुर के आसपास इन दिनों मॉनिटर लिजार्ड यानी गोहरे को लेकर भ्रम और भय का माहौल देखा जा रहा है।

इसी क्रम में वन्य जीव प्रेमी व सांप-गोहरा रेस्क्यू करने वाले अमरदीप गुप्ता ने जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस शांत जीव के बारे में जरूरी जानकारी साझा की है।

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अमरदीप गुप्ता का कहना है कि गोहरा को लोग अब भी एक बेहद जहरीला और खतरनाक जानवर मानते हैं। गांव-शहरों में प्रचलित इस मिथक के चलते जैसे ही किसी को गोहरा दिखता है, उसे मारने का प्रयास किया जाता है। जबकि सच्चाई ये है कि गोहरा न केवल जहरीला नहीं होता, बल्कि यह इंसानों का जीवन रक्षक जीव है, जो प्रकृति में सांपों की जनसंख्या को नियंत्रित करता है।

उन्होंने बताया कि गोहरा एक बड़ी छिपकली की प्रजाति है जिसकी लंबाई ढाई से तीन फीट तक हो सकती है। इसके पास सांप जैसी दो-मुंही जीभ होती है, जिससे लोग भ्रमित होकर इसे सांप या जहरीला जीव समझ बैठते हैं। मगर यह बिल्कुल शांत प्रवृत्ति का जीव होता है, जो सिर्फ छोटे जीव-जंतुओं, पक्षियों व सांपों के अंडों को खाकर अपना जीवन व्यतीत करता है।

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गोहरा हर साल हजारों इंसानों की अप्रत्यक्ष रूप से जान बचाता है। क्योंकि यह जहरीले सांपों और उनके अंडों को खाकर खाद्य शृंखला को संतुलित बनाए रखता है। इसके बावजूद गांवों में यह भ्रांति आज भी फैली हुई है कि ‘गोहरे का काटा पानी भी नहीं मांगता’। अमरदीप गुप्ता इस धारणा को पूरी तरह से झूठा और मिथक बताते हैं।

भारत में पाई जाने वाली कोई भी छिपकली जहरीली नहीं होती। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि छिपकली की त्वचा में विषाक्त तत्व मौजूद हो सकते हैं, लेकिन उनके काटने से कोई विष नहीं फैलता। विशेषज्ञों के अनुसार, दुनियाभर में छिपकलियों की 3200 से अधिक प्रजातियां हैं, जिनमें से केवल दो—हिलोडरमा सस्पेक्टम और हिलोडरमा हरीडियम—ही जहरीली होती हैं, और ये अमेरिका व मैक्सिको में पाई जाती हैं। भारत में मौजूद 165 छिपकली प्रजातियों में किसी में भी विष नहीं होता।

अमरदीप ने कहा कि गोहरे को अंग्रेजी में मॉनिटर लिजार्ड, बंगाल मॉनिटर, मॉनिटर ड्रैगन जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह प्रजाति प्राचीन जीवों की श्रेणी में आती है और इसके पूर्वज डायनासोर जैसे विशालकाय जीव माने जाते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि जैसे छिपकलियां घरों में दीमक, मक्खी और कीड़े खाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाती हैं, उसी तरह गोहरा भी सांपों और जहरीले जीवों का नियंत्रण करता है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे इस जीव से भयभीत होने के बजाय इसके संरक्षण के प्रति जागरूक हों।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भरतपुर के आसपास गोहरे के दिखाई देने पर लोगों ने अमरदीप गुप्ता को सूचना दी थी, जिसके बाद उन्होंने मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित रेस्क्यू किया और जंगल में छोड़ दिया। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि यदि कहीं गोहरा या सांप दिखे तो खुद कुछ न करें, बल्कि वन विभाग या स्थानीय विशेषज्ञो को सूचित करें।

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