छत्तीसगढ़

वन विभाग और उसके अधिकारियों में ई कुबेर का भय,सहमे परिक्षेत्र अधिकारी यही कर रहे है बयां

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एस. के.‘रूप’

बैकुंठपुर/ ई-कुबेर भारतीय रिजर्व बैंक का एक ‘कोर बैंकिंग समाधान’ प्लेटफ़ॉर्म है। यह भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शुरू की गई एक भुगतान प्रणाली है जिसका लक्ष्य सरकारी भुगतान और अन्य के पारंपरिक तरीकों को बदलना है। बैंक देश भर में अपने एकल चालू खातों को जोड़ने के लिए ई-कुबेर का उपयोग कर रहा है।

आपको बता दें देश भर में जहां जहां ई-कुबेर लागू है सभी ई-भुगतान तेजी से संबंधित हितग्राहियों के बैंक खाते में प्राप्त हो रहे है। यह प्रणाली सभी कार्य दिवस पर 24घंटे उपलब्ध रहती है।नई प्रणाली के लागू होने से आंकड़ों का मिलान आसान हो गया है। पूर्व में बैंकों द्वारा प्राप्ति एवं भुगतान की जानकारी भौतिक रूप से कोषालय को दी जाती थी जो भारतीय रिजर्व बैंक और महालेखाकार को भेजी जाती थी ।इसमें आकड़ों की भिन्नता की कई समस्याएं थी। ई-कुबेर प्रणाली के लागू होने से भारतीय रिजर्व बैंक से सीधे व्यवहार हों रहे है। लेकिन दिया तले अंधेरा वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है वन अमला । यह प्रणाली अन्य किसी भी विभाग की तुलना में वन अमले को भयाकांत कर दिया है। ई कुबेर की मार से सहमे परिक्षेत्र अधिकारी तो नाम जप कर रहे है। उन्हे किसी की समस्या के मजदूरी भुगतान आदि से अवगत कराने पर भी ई कुबेर का रोना रोया जा रहा है।

विडंबना है के व्यवस्थाओं के इस नूतन आयाम में पारदर्शिता के साथ कार्य और त्वरित निर्वहन के साथ न्याय की उम्मीद जगी लेकिन नोटों का बंडल और बैंकों के खाते में राशि का आहरण और उसका मनमाना उपभोग पर कुछ लगाम लगा जो प्रशासन के फंड में हो रहे भ्रष्टाचार पर कुछ ध्यान और जनता के हित को दिखा रहा है जिसका परिणाम सकारात्मक होना चाहिए लेकिन जानकारी के अनुसार वन अमले ने केवल इसी ई कुबेर प्रणाली का हवाला देना शुरू कर दिया है।

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