ग्रामीणों के संघर्ष की कहानी: फिसलन, काई ,कीचड़ भरा रास्ता और राशन के लिये बारिश के मौसम में महिलाएं बुजुर्ग ग्रामीण किसानी छोड़ कर चढ़ रहे पहाड़, मोबाइल नेटवर्क विहीन ग्राम में ऑफलाइन दुकान संचालन की मांग

सतीश मिश्रा
भरतपुर/ छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा मानसून सीजन में एक साथ तीन महीने का राशन दे दिया जा रहा है. एमसीबी जिले में भी गांवों में राशन देने की प्रक्रिया ऑनलाइन जारी कर दी गयी है. विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत गड़वार के तहत 5 आश्रित ग्राम हैं जिसमें लगभग 400 राशन कार्डधारी हैं,
लेकिन इन गांवों में राशन वितरण की समस्या बहुत गंभीर है. ग्रामीण बताते हैं कि पहले ऑफलाइन राशन देने के दौरान गांव में ही ग्रामीणों को राशन मिल जाता था. लेकिन जब से राशन की प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है, गांव वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
ऑनलाइन राशन लेना बना जी का जंजाल :

ग्रामीणों ने बताया कि भरतपुर विकासखंड के अंतर्गत गढ़वार ग्राम पंचायत और उसके आश्रित गांव पटपरटोला, चंदेला, दर्रीटोला, मनटोलिया के लोगों को हर महीने राशन के लिए पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है. गांव से पांच किलोमीटर दूर जंगल में लगभग 50 फीट ऊंचे पहाड़ पर चढ़कर गांव वालों को राशन के लिए ऑनलाइन एंट्री करवानी पड़ती है.

बारिश के दिनों में भी गांव वालों को पहाड़ चढ़ना पड़ता है. इनकी मजबूरी है कि भीगते हुए, फिसलन भरे रास्ते पर जिसमें बारिश के कारण काई लगे पहाड़ पर चढ़कर राशन लेने जाना पड़ता है. इस दौरान महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।

राशन के लिए ये कैसी जद्दोजहद ग्रामीण बारिश के बीच पहाड़ पर उस जगह पहुंचा रहे हैं जहां राशन के लिए e-POS मशीन में ग्रामीणों की एंट्री करवाई जा रही थी. बारिश के बीच ही राशन कार्ड धारी महिला, बुजुर्ग और पुरुष पहाड़ पर पहुंचे हुए हैं.

कुछ ग्रामीणों के हाथों में छाते और बारिश से बचने की व्यवस्था है तो कुछ ऐसे ही बारिश में भीगते हुए e-POS मशीन में एंट्री करवाने पहुंचे हुए हैं. ऐसा भी नहीं है कि वहां पहुंचने के बाद तुरंत उनका काम हो जा रहा है. ग्रामीण बताते हैं कि इस काम में कई बार पूरा दिन बीतने के साथ ही कई दिन भी लग जा रहे हैं.

राशन के लिए पहाड़ की चढ़ाई, ग्रामीणों के संघर्ष की कहानी –
बारिश के मौसम में खेती बाड़ी का काम छोड़कर ग्रामीणों को हर रोज पहाड़ चढ़ना उतरना पड़ रहा है।छत्तीसगढ़ सरकार मानसून सीजन में एक साथ तीन महीने का राशन दे रही है. एमसीबी जिले में भी गांवों में राशन देने की प्रक्रिया ऑनलाइन जारी है. भरतपुर विकासखंड के 5 गांवों में लगभग 400 राशन कार्डधारी हैं, लेकिन इन गांवों में राशन वितरण की समस्या बहुत गंभीर है. ग्रामीण बताते हैं कि पहले ऑफलाइन राशन देने के दौरान गांव में ही ग्रामीणों को राशन मिल जाता था. लेकिन जब से राशन की प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है, गांव वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
ऑनलाइन राशन लेना बनी समस्या: ग्रामीणों ने बताया कि भरतपुर विकासखंड के अंतर्गत गढ़वार ग्राम पंचायत और उसके आश्रित गांव पटपरटोला, चंदेला, दर्रीटोला, मनटोलिया के लोगों को हर महीने राशन के लिए पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है. गांव से पांच किलोमीटर दूर जंगल में लगभग 50 फीट ऊंचे पहाड़ पर चढ़कर गांव वालों को राशन के लिए ऑनलाइन एंट्री करवानी पड़ती है. बारिश के दिनों में भी गांव वालों को पहाड़ चढ़ना पड़ता है. इनकी मजबूरी है कि भीगते हुए, फिसलन भरे पहाड़ पर चढ़कर राशन लेने जाना पड़ता है. इस दौरान महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है.
राशन के लिए ये कैसी जद्दोजहद ग्रामीणों की परेशानी जानने बारिश के बीच पहाड़ पर उस जगह पहुंचा, जहां राशन के लिए e-POS मशीन में ग्रामीणों की एंट्री करवाई जा रही थी. बारिश के बीच ही राशन कार्ड धारी महिला, बुजुर्ग और पुरुष पहाड़ पर पहुंचे हुए हैं. कुछ ग्रामीणों के हाथों में छाते और बारिश से बचने की व्यवस्था है तो कुछ ऐसे ही बारिश में भीगते हुए e-POS मशीन में एंट्री करवाने पहुंचे हुए हैं. ऐसा भी नहीं है कि वहां पहुंचने के बाद तुरंत उनका काम हो जा रहा है. ग्रामीण बताते हैं कि इस काम में कई बार पूरा दिन बीतने के साथ ही कई दिन भी लग जा रहे हैं.
ग्रामीण पंचलाल ने बताया कि
राशन के लिए इंट्री करवाने पहाड़ पर बारिश के बीच इंतजार
चावल लेने के लिए आए हैं. अभी तक फिंगर नहीं लगा है. पूरा दिन पहाड़ पर बैठना पड़ता है. बारिश के मौसम में भी जंगल में 50 फीट पहाड़ चढ़कर ऑनलाइन एंट्री करवाने आना पड़ता है
सुंदरलाल सिंह, ग्रामीण ने बताया कि आने जाने में बहुत समस्या होती है. लेकिन राशन लेने के लिए जाना पड़ता है. 5 किलोमीटर पहाड़ पर ऊपर जाना पड़ता है
रामकरण, ग्रामीण ने बताया कि जब जब राशन लेने आना पड़ता है दूसरा कोई काम नहीं हो पाता, 2 से तीन दिन लगातार आना पड़ता है।
गांवों में नेटवर्क की समस्या, इसलिए पहाड़ की चढ़ाई: ग्रामीण बताते हैं कि भरतपुर विकासखंड के कुछ गांवों में मोबाइल नेटवर्क की भारी समस्या है, जिससे ई-पॉस मशीन गांव में काम नहीं करती. राशन लेने के लिए e-POS मशीन में एंट्री करवाने गांव वालों और राशन दुकान संचालक को पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है, क्योंकि ऊंचे स्थान पर जाने से नेटवर्क मिलने लगता है. लेकिन बारिश के दिनों में नेटवर्क की समस्या से e-POS में एंट्री करवाने के लिए ग्रामीणों को कई दिनों तक पहाड़ी का चक्कर लगाना पड़ता है.
सुमित्रा बाई, ग्रामीण महिला ने कहा पहाड़ पर नेटवर्क मिलने से e-POS मशीन में होती है एंट्री
ना रोड है, ना कोई सुविधा है. गांव में ऑनलाइन नहीं होने से हमें चावल लेने के लिए आना पड़ता है. आज काम नहीं होगा तो चले जाएंगे, फिर आना पड़ेगा. पूरा महीना गुजर जा रहा है
श्यामबाई, बुजुर्ग महिला ने बताया पहाड़ पर चढ़ने में थक जाते हैं. कई बार गिर जाते हैं. गरीब हैं, पेट के लिए डोंगरी चढ़ते हैं
रामफल पंडो, सरपंच ने आपबीती बताया कि राशन दुकान संचालक ने खाद्य विभाग को दी जानकारी: ऐसा नहीं है कि ऑनलाइन पीडीएस सिस्टम में होने वाली इस परेशानी के बारे में खाद्य विभाग को पता नहीं है. गांव के सरपंच और राशन दुकान संचालक रामफल पंडो बताते हैं “मैं कई बार खाद्य विभाग में जानकारी दे चुका हूं कि गांवों में नेटवर्क की समस्या के कारण बहुत परेशानी होती है. ऑफलाइन दुकान की मांग की. सर ने बताया कि ऑफलाइन दुकान नहीं होगा. अब सिर्फ ऑनलाइन राशन दुकान ही चलेगी. मैंने बताया कि 4जी नेटवर्क नहीं होने के कारण ई पॉस मशीन नहीं चल पाती, पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है. लेकिन अधिकारी कहते हैं कि धीरे धीरे मशीन चलेगी. बारिश के दिनों में गांव वालों को बहुत परेशानी उठानी पड़ती है.”
भरतपुर के कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या
गांव वाले ऑफलाइन राशन दुकान की मांग करते हैं, जिसके बारे में अधिकारियों को कई बार बताया जा चुका है. ग्रामीणों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ती है
भरतपुर एसडीएम के द्वरा दिया गया आश्वासन: विकाशखण्ड भारतपुर के गांवों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या और ग्रामीणों को होने वाली परेशानी के बारे में एसडीएम शशि शेखर मिश्रा से बात की गयी उन्होंने कहा- “मेरे संज्ञान में नहीं है, आप लोग बोल रहे हैं तो देखता हूं. हो सकता है तो करवा दूंगा.”
राशन के लिए ग्रामीणों को चढ़ना पड़ता है पहाड़
ग्रामीणों की मांग: गांव वालों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को गांवों में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा देने के लिए कदम उठाने चाहिए और तब तक वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए ताकि उन्हें अपना काम छोड़कर राशन के लिए बार बार पहाड़ चढ़ने की जरूरत ना पड़े।



