जिला तो बना पर किस्मत नहीं बदली: मनेंद्रगढ़-जनकपुर रोड आज भी अपनी बदहाली पर रोने को मजबूर।
विकास की 'रीढ़' ही पड़ी है बीमार

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर/ किसी भी क्षेत्र के विकास की रीढ़ वहां की सड़कें मानी जाती हैं। यदि सड़कें दुरुस्त हों, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार की रफ्तार तेज़ होती है। लेकिन MCB (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले की महत्वपूर्ण मनेंद्रगढ़-जनकपुर रोड पिछले कई वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। हालात ऐसे हैं कि यहाँ विकास की रफ्तार गड्ढों में दबकर दम तोड़ रही है।
अस्तित्व की लड़ाई और नेताओं की कारगुज़ारी।
यह सड़क वर्षों से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि चुनाव आते ही इस रोड को बनाने के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही नेता और प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेते हैं। नेताओं की इसी ‘कारगुज़ारी’ का खामियाजा आज आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
तीन ब्लॉकों के विकास का सपना, हकीकत में अधूरा।
तत्कालीन सरकार ने मनेंद्रगढ़, चिरमिरी और भरतपुर—इन तीन प्रमुख ब्लॉकों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए इस जिले का गठन किया था। उद्देश्य था कि प्रशासनिक दूरियां कम हों और बुनियादी ढांचा मजबूत हो। किंतु जमीनी हकीकत यह है कि इन क्षेत्रों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क ही आज भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है।
विकास के बजट पर पुत रही ‘कालिख’।
हैरानी की बात यह है कि नया जिला बनने के बाद विकास के नाम पर करोड़ों का बजट आवंटित होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जनकपुर रोड की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि यह बजट विकास के नाम पर केवल कागजों पर ही दौड़ रहा है। वर्तमान में यह सड़क विकास के दावों के चेहरे पर ‘कालिख’ पोतती नजर आ रही है।
जनता का सवाल: आखिर कब तक झेलेंगे ये दंश?
बदहाल सड़क के कारण न केवल आवागमन बाधित हो रहा है, बल्कि आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। धूल के गुबार और गहरे गड्ढों के बीच सफर करना अब लोगों की मजबूरी बन गया है। अब जनता सीधे प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि क्या जिला बनने का सुख केवल फाइलों तक ही सीमित रहेगा?



