वनांचल क्षेत्र में शिक्षा की चुनौतियाँ: प्राथमिक शाला खतौली की कहानी –शिक्षिका महीने में 4 या 5 दिन आती है पढ़ाने, बच्चो का भविष्य दांव पर

सतीश मिश्रा
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर/ वनांचल क्षेत्र भरतपुर विकासखंड के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला खेतौली में शिक्षिका की अनुपस्थिति एक बड़ी समस्या है। एक शिक्षिका महीने में केवल 5 से 10 दिन ही आती हैं, जबकि शासन द्वारा उनका पूरा माह का वेतन दिया जाता है। इस कारण प्रिंसिपल को अकेले ही सभी कक्षाओं को संभालना पड़ता है और बच्चों पर ध्यान देना पड़ता है। स्कूल में 47 छात्र-छात्राएं हैं।
शिक्षिका की अनुपस्थिति के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। साक्षी ने बताया कि मैडम महीने में 5 दिन ही स्कूल आती हैं। प्रमिला ने बताया कि महीने में केवल 4-5 दिन ही मैडम स्कूल आती हैं। सरपंच बाबूलाल मरावी ने बताया कि दो शिक्षक पदस्थ होने के बावजूद केवल एक शिक्षिका ही स्कूल आती हैं, और वह भी महीने में केवल 8-10 दिन।
इस समस्या के समाधान के लिए कुछ सुझाव हो सकते हैं
– शिक्षिका की उपस्थिति सुनिश्चित करना: स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग को शिक्षिका की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह शिक्षिका की कमी को दूर करने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए। इसके लिए नए शिक्षिका की भर्ती की जा सकती है या अन्य स्कूलों से शिक्षकों को स्थानांतरित किया जा सकता है।
– वैकल्पिक व्यवस्था: जब तक नियमित शिक्षिका नहीं आते, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अन्य शिक्षिका या योग्य व्यक्तियों को नियुक्त किया जा सकता है।
– अभिभावकों की भागीदारी: अभिभावकों को भी स्कूल की गतिविधियों में शामिल होने और शिक्षकों के साथ संवाद करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे स्कूल की समस्याओं का समाधान निकालने में मदद मिल सकती है।
– स्कूल में ही रहने की व्यवस्था: यदि शिक्षक दूर से आते हैं, तो उनके लिए स्कूल में ही रहने की व्यवस्था करने से उनकी अनुपस्थिति कम हो सकती है।
प्राथमिक शाला खतौली में मध्यान भोजन के चावल की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें मिली हैं। सुमनलता सिंह ने बताया कि चावल में झिल्ली और चमकीला लगा हुआ है, जिसे उन्होंने जनपद सदस्य, सीईओ और सरपंच को बताया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
शिक्षिका की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए स्कूल प्रशासन को कदम उठाने चाहिए। सरस्वती देवी के बारे में बताया गया कि वह स्कूल आती हैं और दस्तखत करके चली जाती हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति की जांच होनी चाहिए।
जिला शिक्षा अधिकारी आर पी मिरे ने बताया कि वे संबंधित विकासखंड भरतपुर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी और सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी को जांच करने के निर्देश देंगे। यदि जांच में आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो दोषी शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस समस्या के समाधान के लिए कुछ सुझाव हो सकते हैं:
– चावल की गुणवत्ता की जांच: स्कूल प्रशासन और मध्यान भोजन संचालक समूह को चावल की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए और खराब चावल को बदलना चाहिए।
– मध्यान भोजन संचालक समूह की जिम्मेदारी: मध्यान भोजन संचालक समूह को अपनी जिम्मेदारी का पालन करना चाहिए और खराब चावल को बदलने के लिए कदम उठाने चाहिए।
अभिभावकों को भी स्कूल की गतिविधियों में शामिल होने और सरपंच को भी शामिल करना चाहिए। इससे स्कूल की समस्याओं का समाधान निकालने में मदद मिल सकती है।



