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POK: कश्मीर का पश्चिमी उत्तरी हिस्सा पीओके, आखिर कैसे हुआ पाक अधिग्रहित,क्या हुआ था सन 47–48 में

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1947 में जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, तब ब्रिटिश भारत के तहत 562 रियासतों को यह विकल्प दिया गया कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल हों या स्वतंत्र रहें।

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जम्मू-कश्मीर, जो एक प्रमुख रियासत थी, वहां के शासक महाराजा हरि सिंह ने शुरू में स्वतंत्र रहने का फैसला किया। उनकी रियासत में बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी थी, लेकिन वे स्वयं हिंदू थे, और भौगोलिक रूप से रियासत भारत के करीब थी। यह स्थिति भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए महत्वपूर्ण थी।अक्टूबर 1947 में, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर कबायली और सैन्य समर्थन से हमला कर दिया। ये हमलावर पश्तून कबायली और पाकिस्तानी सेना के जवान थे, जिन्होंने श्रीनगर की ओर बढ़ना शुरू किया। महाराजा हरि सिंह के पास अपनी रियासत को बचाने के लिए पर्याप्त सैन्य शक्ति नहीं थी। मजबूरन, उन्होंने भारत से मदद मांगी।

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भारत ने सहायता देने से पहले महाराजा से विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर करवाए, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया। इसके बाद भारतीय सेना ने हमलावरों को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया।1947-48 का यह युद्ध कई महीनों तक चला। भारतीय सेना ने हमलावरों को काफी हद तक खदेड़ दिया, लेकिन युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने कश्मीर के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों पर कब्जा कर लिया। यही क्षेत्र आज पीओके कहलाता है। 1948 में, भारत ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र (UN) में उठाया। UN ने युद्धविराम का प्रस्ताव रखा और जनमत संग्रह की बात कही, लेकिन इसके लिए शर्त थी कि दोनों देश अपनी सेनाएं हटाएं और क्षेत्र को अशस्त्रीकरण करें। पाकिस्तान ने इन शर्तों का पालन नहीं किया, और जनमत संग्रह कभी नहीं हो सका। इस तरह, युद्धविराम रेखा (जो बाद में नियंत्रण रेखा या LoC बनी) ने कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया: एक भारत के पास, दूसरा पाकिस्तान के पास।यह कहना गलत होगा कि भारत ने पीओके को पाकिस्तान को “दे दिया”। यह क्षेत्र युद्ध और बंटवारे की अराजकता का परिणाम था। भारत हमेशा से मानता है कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें पीओके भी शामिल है, उसका हिस्सा है। 1994 में भारतीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट किया कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है और इसे वापस लिया जाएगा।

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सोशल मीडिया प्राप्त आलेख के अनुसार।

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