कोरिया

जहरखुरानी से हुई थी बाघ की मौत …शव तीन दिन पुराना सबसे पहले सम्यक क्रांति ने जताया था जहरखुरानी का अंदेशा खबर पर लगी मुहर

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एस. के.‘रूप’

बैकुंठपुर/ कोरिया वन मंडल अंतर्गत विगत 8 नवंबर को गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के ऑरेंज एरिया में एक पूर्ण व्यस्क बाघ की मौत कटवार के पास खनकोपर नाले के किनारे हुई थी।

बाघ की मौत और अनसुलझे सवाल:
बाघ के शरीर के अंग स्किन, नाखून, दांत आदि नहीं थे यह कहना है प्रत्यक्ष दर्शियों का वायरल फोटो में भी साफ दर्शित नहीं हो रहा है वन विभाग द्वारा पीएम पश्चात जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है के सभी अंग सुरक्षित हैं फिर वन विभाग पीएम के पूर्व की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी साझा क्यों नहीं कर रहा है?जबकि यह जनहित में जरूरी है। इसे कार्यालयीन गोपनीयता के दायरे में रखकर खुद पर प्रश्न खड़े क्यों कर रहा है ?

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गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व घोषित करने के बाद यह बड़ी नाकामी वन विभाग की उजागर हुई है जिसमें एक बाघ के साथ जहर खुरानी की गई है इस पर संबंधित अधिकारी कर्मचारियों पर कार्यवाही क्यों नहीं?

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ग्रामीणों के मत अनुसार और क्षेत्र के भ्रमण के दौरान मिली जानकारी के अनुसार वन विभाग के गार्ड, कर्मचारी अधिकारी कटवार देवसील, मुर्किल बड़गांव ठिसकोली कोरिया व एमसीबी के बॉर्डर वनांचलों का दौरा नहीं करते केवल रामगढ़ व सोनहत के विश्राम गृह में डेरा जमाए रहते हैं उन पर कार्यवाही कब होगी या ऐसे ही राष्ट्रीय धरोहरों को देश खोता रहेगा?

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वन विभाग बाघ को लेकर अलर्ट क्यों नहीं रहा जब वह उसे क्षेत्र में कई दिन से विचरण कर रहा था और सूत्रों के अनुसार किसी ग्रामीण के भैंस का शिकार कर लिया था?

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जहरखुरानी, अग्निअस्त्र,स्टीलजाल,विद्युतप्रवाह इन चार माध्यमों से होने वाले शिकार में जहर खुरानी सबसे प्रचलित और आसानी से किए जाने वाला दुष्कृत है बाघ के साथ जहरखुरानी हुई है ऐसे में दोषियों पर व वन अमले पर कार्यवाही शून्य?

अतिक्रमण वनभूमि में अवैध कब्जाधारियों का जमावड़ा और वन्य जीवों का पलायन पर वन हमला मौन?

भूख व मानसिक रूप से बीमार हिंसक पशुओं की ट्रैकिंग करके उन्हें उचित सुविधा मुहैया क्यों नहीं?

प्रबोधन या जागरण व जनता को देश के धरोहर विलुप्त प्रजाति के जीव संरक्षण के साथ वन्य प्राणी संरक्षण की धाराओं एवं सजा की जानकारी क्यों नही दी जाती ताकि आगे ऐसे कृत्य पर लगाम कसा जा सके।

पशु तस्करी, पशु अंगों की तस्करी को किन का संरक्षण क्या निचले स्तर के वन अधिकारी करते हैं सांठ घाट ?

विगत वर्षों इसी क्षेत्र में तीन बाघों की मौत हो चुकी बाघ राष्ट्रीय पशु है राष्ट्रीय धरोहर की मौत को वन विभाग और इसके उच्च अधिकारी हल्के में ले रहे हैं ?

जंगल की अवैध कटाई हरे भरे वृक्षों का दोहन व जानवरों का गांव से शहर की ओर पलायन इन सभी तथ्यों का जिम्मेदार कौन?

सम्यक क्रांति की खबर पर लगी मुहर…सबसे पहले जहरखुरानी का जताया था अंदेशा :–

आपको बता दें दैनिक अखबार सम्यक क्रांति ने सबसे पहले बाघ की मौत होने के का कारण पीएम रिपोर्ट आने से पहले ही अपने सूत्रों ग्रामीण व क्षेत्र का भ्रमण करने से मिली जानकारी पर उक्त घटना के प्रकाश में आते ही उसी रात को ही यह बता दिया था की मृत बाघ के साथ जहरखुरानी की गई है।सम्यक क्रांति के संवाददाता सबसे पहले और एवं अर्ध रात्रि क्षेत्र का भ्रमण करते रहे और अपने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का निष्पक्षता के साथ दायित्व का दायित्व का पालन कर रहे थे हमें जानकारी प्राप्त हो गई थी कि उक्त बाघ के साथ जहरखुरानी ही की गई है इसलिए सम्यक क्रांति ने लोगों के सामने सबसे पहले मौत के कारणों में जहरखुरानी का अंदेशा व्यक्त कर दिया था।

पढ़िए पीएम रिपोर्ट के बाद जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में वन विभाग ने क्या कहा है:–

“दिनांक 08.11.2024 को समय अपरान्ह 1.00 बजे ग्रामीणों से परिसर रक्षक गरनई को सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम कटवार के पास खनखोपड़ नाला के किनारे एक बाघ की मृत्यु हुई है। घटना स्थल बीट गरनई, सर्किल रामगढ़, परिक्षेत्र सोनहत, कोरिया वनमण्डल के असीमांकित वनक्षेत्र (कक्ष कमांक पी 196) के समीप है। संबंधित वनरक्षक के द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया।तत्काल वनमण्डलाधिकारी कोरिया, संचालक गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान बैकुन्ठपुर, उपवनमण्डलाधिकारी उत्तर बैकुन्ठपुर, मुख्य वन संरक्षक सरगुजा वन वृत्त अम्बिकापुर, वन संरक्षक (वन्यप्राणी) सरगुजा मौके पर पहुंचे। वन विभाग के कर्मचारियों की टीम के द्वारा घटना स्थल के आसपास 1.5 से 2 कि.मी. परिधि में तलाशी की गई। प्रथम दृष्टया शव 2-3 दिन पुराना प्रतीत होता है।दिनांक 09.11.2024 को वन विभाग, पुलिस विभाग, NTCA प्रतिनिधि एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में 4 सदस्यीय पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा शव विच्छेदन किया गया। उक्त टीम के अभिमत अनुसार बाघ की मृत्यु का कारण “जहरखुरानी” संभावित है।
शव विच्छेदन उपरांत शव को नियमानुसार दाह संस्कार किया गया। शव विच्छेदन के दौरान मृत टाईगर के आवश्यक अंगों को प्रयोगशाला परीक्षण हेतु प्रिजर्व किया गया। घटना स्थल के आसपास के क्षेत्र में गोमार्डा अभ्यारण्य के डॉग स्क्वायड टीम द्वारा पतासाजी किया गया तथा कोरिया वनमण्डल एवं गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान बैकुन्ठपुर की संयुक्त टीम के 4 दलों के द्वारा आसपास के क्षेत्रों में निरीक्षण किया गया। सम्पूर्ण कार्यवाही के दौरान अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) रायपुर उपस्थित रहे एवं समस्त वन अधिकारियों/कर्मचारियों को अपराधियों की पतासाजी करने एवं वाईल्ड लाईफ काईम नियंत्रण हेतु निर्देश दिया गया।मृत टाईगर के स्किन, नाखून, दाँत एवं सभी अंग सुरक्षित थे, किसी भी प्रकार का अंग-भंग नहीं पाया गया। टाईगर मृत्यु के सभी संभावित कारणों की विवेचना की जा रही है।

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