मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर

विद्यालय के बच्चे शौच के लिये पहाड़ के नीचे नाले पर जाने मजबूर.. शौचालय जर्जर बारिश के मौसम में संक्रमित बीमारी और करैत आदि विषधरों से जानमाल को खतरा

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सतीश मिश्रा

भरतपुर/ मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र भरतपुर विकासखंड अंतर्गत गढ़वार ग्राम पंचायत और उसके आश्रित गांव पटपरटोला के प्राथमिक विद्यालय में शौचालय की व्यवस्था न होने के कारण बच्चों को पहाड़ के नीचे नाले पर जाना पड़ता है। जिससे बीमारी और विषधरों का डर है। विद्यालय की स्थिति भी काफी दयनीय है, जिसमें बारिश के दौरान पानी भर जाता है और शौचालयों की स्थिति भी खराब है शौचालयों के दरवाजे क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और शौचालय 300-400 मीटर दूर पहाड़ के नीचे नाले में हैं। इससे बच्चों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है।ग्राम पटपरटोला के प्राथमिक विद्यालय में बारिश के दिनों में दिया तले अंधेरा जैसी स्थिति निर्मित होती है। जवाबदारों की अनदेखी के चलते वर्षाकाल में स्कूल बुरी तरह जर्जर हो चुका है। शौचालयों की स्थिति भी खराब है, चारों तरफ घास फूस जमी हुई है। सांप और जंगली जानवरों का डर बना रहता है इससे बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है और वे स्कूल जाने से डरते हैं। जिला मुख्यालय से महज 150 किमी दूर होने के बावजूद इस स्कूल की स्थिति दयनीय है। सुधार की आवश्यकता है।

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विदित हो कि शौचालय की आवश्यकता सभी बच्चों की बुनियादी और जैविक जरूरत है। बच्चे स्कूल में 5 से 6 घंटे बिताते हैं और शौचालय का इस्तेमाल करना स्वाभाविक है। शौचालय की व्यवस्था न होने से बच्चों को परेशानी होती है और वे स्कूल छोड़ देते हैं। सरकारी स्कूलों में शौचालयों की व्यवस्था और उनकी स्थिति में सुधार करने की आवश्यकता है। शौचालयों की सफाई, पानी की व्यवस्था इससे बच्चों को परेशानी नहीं होगी और वे स्कूल जा सकेंगे। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए और सरकारी स्कूलों में शौचालयों की व्यवस्था करनी चाहिए। सरकार को स्कूलों की स्थिति में सुधार करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
इससे बच्चों को परेशानी नहीं होगी और वे स्कूल जा सकेंगे। शौचालय की व्यवस्था न होने से बच्चों को पहाड़ के नीचे नाले पर जाना पड़ता है, जो कि काफी दयनीय स्थिति है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए और सरकारी स्कूलों में शौचालयों की व्यवस्था करनी चाहिए। स्कूलों में शौचालयों की व्यवस्था और उनकी स्थिति में सुधार करने के लिए सरकार को आवश्यक धनराशि आवंटित होती है लेकिन उसका कितना सही प्रयोग होता है यह जरूरी है। इससे बच्चों को फायदा होगा और वे स्कूल जा सकेंगे।
बच्चों को शिक्षा का अधिकार है और सरकार को इस अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। स्कूलों में शौचालयों की व्यवस्था और उनकी स्थिति में सुधार करने से बच्चों को फायदा होगा और वे स्कूल जा सकेंगे।

सम्यक क्रांति और जनहित संघ पण्डो विकास समिति की संयुक्त टीम क्षेत्र के भ्रमण पर रही तब बच्चो को नाला और जंगल के पास शौच कर्म हेतु देखा । बच्चो से संपर्क करने पर यथास्थिति सामने आ गई।

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हमे प्रीतम छात्र ने बताया कि स्कूल में शौचालय नहीं होने के कारण उन्हें शौच के लिए जंगल जाना पड़ता है। शिक्षक भी उन्हें जंगल जाने के लिए कहते हैं।

इसी तरह रामप्रसाद छात्र ने बताया कि वह जंगल शौच करने आए थे। शिक्षक ने उन्हें जंगल जाने के लिए कहा था। खाने की छुट्टी के दौरान वे यहीं आते हैं क्योंकि स्कूल में शौचालय नहीं है।

सुनील छात्र ने बताया कि स्कूल में शौचालय नहीं होने के कारण वे शौच के लिए बाहर आते हैं। उसने बताया कि शौचालय तोड़ दिए गए हैं। जब सर जी से पूछा तो उन्होंने बाहर जाने के लिए कहा।

अंनु छात्रा ने बताया कि स्कूल में शौचालय नहीं होने के कारण उन्हें शौच के लिए जंगल जाना पड़ता है। शिक्षक भी उन्हें जंगल जाने के लिए कहते हैं। इससे उन्हें असुविधा होती है और उनकी सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है।

जब इस पर विद्यालय के प्रधानपाठक से बात की गई प्रधान पाठक चंद्रभान सिंह ने बताया कि स्कूल का शौचालय जर्जर स्थिति में है और विभाग से कोई कार्यवाही नहीं हुई है। सरपंच ने बताया कि अनुमति मिल गई है और जल्द ही शौचालय की व्यवस्था की जाएगी। जब उनसे पूछा गया कि बच्चे जंगल और नाले में शौच के लिए जाते हैं, जो बरसात के मौसम में खतरनाक हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि जंगल पास में ही है और कोई बड़ी दूरी नहीं है। प्रधान पाठक ने स्वीकार किया कि बच्चे जंगल और नाले में शौच के लिए जाते हैं, जो स्कूल से लगभग 300-400 मीटर दूर है। अभी तक इसका कोई समाधान नहीं है और बच्चों की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है।

सरपंच रामफल पंडो ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि प्राथमिक और माध्यमिक शाला के बच्चे शौच के लिए जंगल जाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को ध्यान देना चाहिए और बच्चों को रोकना चाहिए। सरपंच ने बताया कि अभी तक उन्हें कोई कार्यभार नहीं मिला है और शिक्षकों से कोई लिखित जानकारी नहीं मिली है। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल का शौचालय जर्जर है। सरपंच ने कहा कि अगर उन्हें कोई आदेश मिलेगा तो वह तत्काल शौचालय का निर्माण करवाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि बच्चों की सुविधा के लिए जल्द ही शौचालय की व्यवस्था की जाएगी। सरपंच ने ग्रामीणों और शिक्षकों से सहयोग की अपील की और कहा कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे।

इस समाचार पत्र के माध्यम से विद्यालय प्रबंधन,विद्यार्थी,क्षेत्र की जनता ग्रामीणों ने जिला प्रमुख सहित जिला शिक्षा अधिकारी से त्वरित संज्ञान लेकर छात्र छात्राओं के लिए शौचालय का जीर्णोद्धार अथवा नवीन शौचालय निर्माण की अपील की है ताकि वर्षाकाल में संक्रमित बीमारी और करैत आदि विषधरों से जानमाल को बचाया जा सके।

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