29 किलोमीटर साइकलिंग कर नदियों को प्रदूषित होने से बचाने की अपील -सतीश द्विवेदी

मनेन्द्रगढ़/ रविवार , सतीश द्विवेदी के द्वारा 29 किलोमीटर साइकलिंग कर नदियों को प्रदूषित होने से बचाने की अपील की, श्री द्विवेदी के द्वारा मनेन्द्रगढ़ बेलबहरा नर्सरी के पास, फिट इंडिया एंड सेव एनवायरमेंट अभियान अंतर्गत साइकिलिंग कर हसदेव नदी पहुंचकर एक वीडियो बनाया, उन्होंने बताया कि नदियां कैसे प्रदूषित हो रही हैं

उनके द्वारा वीडियो के माध्यम से नदी पड़े प्लास्टिक,पन्नी, थर्माकोल के गिलास , प्लेट जैसी अन्य प्लास्टिक की चीजें जो कुछ रेत में दबी हुई थी और बहुत कुछ ऊपर पड़ी हुई थी जिसके कारण नदी के किनारे का पानी काफी कुछ काला पड़ गया है तथा नीचे पानी के ऊपरी सतह पर विषैला तेल जैसी लेयर सी जमा हो गई है, बताया कि नदियों में लोग पिकनिक मनाने आते हैं और वहां पर पन्नी , प्लास्टिक, थर्मोकोल के ग्लास प्लेट आदि फेंक कर चले जाते हैं सिंगल यूज्ड प्लास्टिक नदियों में जमा होने से न केवल जल प्रवाह को अवरुद्ध करता है बल्कि माइक्रो प्लास्टिक के रूप में विषैला जल इंसानों के साथ जलीय जीवों के लिए भी खतरनाक है लोग नदी के किनारे कचरा फेंकते हैं जो बारिश में बहकर नदियों में मिल जाता है नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में रुकावट से जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है, अत्यधिक जल प्रदूषण होने से रसायन यूट्रॉफिकेशन को बढ़ाते हैं जिससे नदियों में ऑक्सीजन की कमी होती है, नदी के पानी को रास्ते में पढ़ने वाले शहर ग्राम के लोग पीते हैं, पानी प्रदूषित होने से टाइफाइड एवं अन्य गंभीर रोग पैदा होते हैं साथ ही नदियों में जो जलीय जीवित प्रजातियां हैं वह भी खत्म होती हैं नदियों के आध्यात्मिक छवि को भी धक्का लगता है नदियां किसी क्षेत्र की जीवन रेखा होती है इन्हें बचाने के लिए सामूहिक और शख्त नीतियां आवश्यक है, श्री द्विवेदी के द्वारा अपील की गई कि नदियों में पन्नी, पॉलीथिन, प्लास्टिक से बनी हुई चीजों को बिल्कुल ना फेंके, बल्कि पिकनिक के लिए दोना, पत्तल ,गनने का पत्तल गिलास का उपयोग करें, यह केवल हसदेव नदी ही नहीं बल्कि देश विदेश में जितनी भी नदियां हैं उन सबके लिए है,



