कोरियाछत्तीसगढ़

सम्यकक्रांति की पड़ताल प्राथमिक शाला कर्री में लटका ताला

प्राथमिक शाला कर्री : काग़ज़ों में दो शिक्षक, ज़मीन पर शून्य शिक्षा

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सरकारी दावों और ज़मीनी सच्चाई के बीच पिसता बचपन

जिला शिक्षा अधिकारी के जांच पर उठ रहा है सवाल ???

30 अक्टूबर को भी प्रकाशित थी दैनिक सम्यक क्रांति खबर कही भी गई थी जांच की बात लेकिन जांच शून्य

 

एमसीबी/ छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले का भरतपुर विकासखण्ड। घने जंगलों, पहाड़ियों और दूरस्थ गांवों से घिरा यह क्षेत्र प्रशासनिक फाइलों में भले ही “सामान्य” दिखता हो, लेकिन जमीनी हकीकत में यहां आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए लोग संघर्ष कर रहे हैं। इन्हीं संघर्षों के बीच ग्राम कर्री का प्राथमिक विद्यालय आज शिक्षा व्यवस्था की विफलता का एक जीवंत उदाहरण बन चुका है।

 

सरकारी काग़ज़ों में यह विद्यालय पूरी तरह संचालित है। शिक्षक पदस्थ हैं, बच्चों की संख्या दर्ज है, उपस्थिति रजिस्टर नियमित भरा जा रहा है, मध्यान्ह भोजन योजना लागू है और सब कुछ “नियम के अनुसार” चल रहा है। लेकिन जब इस विद्यालय की ग्राउंड रिपोर्ट की गई, तो जो तस्वीर सामने आई, उसने शिक्षा विभाग के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी।

 

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WhatsApp-Image-2026-01-30-at-5.19.35-PM-1024x768 सम्यकक्रांति की पड़ताल प्राथमिक शाला कर्री में लटका ताला

काग़ज़ों में शिक्षक पूरे, ज़मीन पर सन्नाटा

प्राथमिक शाला कर्री में आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार तीन शिक्षक पदस्थ हैं—
▪️ दो शिक्षिकाएं
▪️ एक पुरुष शिक्षक

हालांकि व्यवहारिक स्थिति यह है कि—
▪️ एक शिक्षिका को अन्यत्र अटैच कर दिया गया है
▪️ शेष एक शिक्षक और एक शिक्षिका भी नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित नहीं रहते

इसका नतीजा यह है कि कई दिनों तक विद्यालय पूरी तरह शिक्षकविहीन रहता है।

सरकारी रजिस्टरों में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, विद्यालय में बच्चों की संख्या निर्धारित मानकों के अनुरूप है और उपस्थिति भी “संतोषजनक” दिखाई जाती है। लेकिन जब वास्तविक स्थिति जानने के लिए ग्रामीणों, अभिभावकों और स्वयं बच्चों से बातचीत की गई, तो एक बेहद चिंताजनक सच्चाई सामने आई।

ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय का भवन तो रोज़ खुलता है, लेकिन शिक्षा का ताला वर्षों से बंद है।
▪️ बच्चे सुबह तय समय पर स्कूल पहुँचते हैं
▪️ सहायिका द्वारा मध्यान्ह भोजन कराया जाता है
▪️ इसके बाद बच्चे खेलते रहते हैं
▪️ घंटों इंतज़ार के बावजूद जब कोई शिक्षक नहीं आता
▪️ तो बच्चों को बिना पढ़ाई के ही छुट्टी दे दी जाती है

यानी विद्यालय अब शिक्षा का केंद्र न होकर सिर्फ मध्यान्ह भोजन वितरण स्थल बनकर रह गया है।

छोटे-छोटे बच्चे, जिनके हाथों में किताबें होनी चाहिए, वे मैदान में खेलते हुए अपने शिक्षकों का इंतज़ार करते हैं। कई बार बच्चों को यह तक नहीं पता होता कि आज पढ़ाई होगी भी या नहीं। धीरे-धीरे उनमें स्कूल के प्रति रुचि खत्म होती जा रही है।

 

राष्ट्रीय पर्व पर भी गैरहाज़िरी — संवैधानिक मूल्यों का अपमान

जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।
26 जनवरी – गणतंत्र दिवस, जो देश के हर नागरिक के लिए गर्व और जिम्मेदारी का दिन होता है, उस दिन भी प्राथमिक शाला कर्री में एक शिक्षक उपस्थित नहीं था।

यह सिर्फ एक दिन की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि संबंधित शिक्षक न केवल अपने विभागीय दायित्वों से, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से भी विमुख हो चुके हैं।

जब राष्ट्रीय पर्व जैसे अवसर पर भी शिक्षक स्कूल नहीं आते, तो आम दिनों की स्थिति का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है।

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर और चौंकाने वाला पहलू है उपस्थिति रजिस्टर।
ग्रामीणों और अभिभावकों के अनुसार, विद्यालय कई दिनों तक शिक्षकविहीन रहता है। इसके बावजूद—
रजिस्टर में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति दर्ज है
वेतन और अन्य लाभ समय पर मिल रहे हैं

यह स्थिति सीधे-सीधे फर्जी हाज़िरी, सरकारी धन के दुरुपयोग और नियमों के खुल्लमखुल्ला उल्लंघन की ओर इशारा करती है।

यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि
जब शिक्षक स्कूल में मौजूद ही नहीं हैं
तो उनकी हाज़िरी कौन और कैसे लगा रहा है?
क्या इसमें किसी स्तर पर मिलीभगत है?

प्राथमिक शाला कर्री की यह बदहाल स्थिति अचानक पैदा नहीं हुई है। यह वर्षों की लापरवाही और निगरानी तंत्र की विफलता का नतीजा है।

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी स्तर पर नियमित निरीक्षण नहीं
संकुल समन्वयक की भूमिका लगभग शून्य
उच्चाधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन का अभाव

नतीजा यह कि लापरवाह शिक्षक बिना किसी डर के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।

यदि समय-समय पर निरीक्षण होता, तो न तो शिक्षक अनुपस्थित रहते और न ही फर्जी हाज़िरी का खेल संभव होता।

सियासरण (ग्रामीण, विद्यालय के पड़ोसी) बताते हैं
“स्कूल खुला था। बच्चे आए हुए थे। सहायिका ने मध्यान्ह भोजन कराया और उसके बाद छुट्टी कर दी गई। आज कोई शिक्षक स्कूल में नहीं दिखा — न मैडम, न सर।”

उनके अनुसार यह कोई एक दिन की बात नहीं है, बल्कि यह स्थिति कई दिनों से बनी हुई है।

 

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राजकुमार सिंह (अध्यक्ष, शाला शिक्षा समिति, कर्री), जिनका घर भी स्कूल के सामने है, बताते हैं “मैंने करीब 10 मिनट पहले देखा था कि स्कूल में बच्चे थे। अभी 1:30–02 बजे के बीच स्कूल बंद हो चुका है। यहां दो शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन दोनों स्कूल में नहीं हैं।”
वे आगे कहते हैं “अगर शिक्षक किसी काम से बाहर जाते हैं, तो किसी वैकल्पिक व्यवस्था का होना जरूरी है। स्कूल 04 बजे तक खुला रहना चाहिए। यहां मैडम आती हैं और किसी न किसी बहाने चली जाती हैं। मदन सर तो कई दिनों से स्कूल नहीं आ रहे।”
राजकुमार सिंह के अनुसार “26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन भी मदन सर स्कूल में नहीं आए। परीक्षा का समय है, बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह डिस्टर्ब हो रही है। अगर ये शिक्षक नहीं आ सकते, तो दूसरे शिक्षक भेजे जाएं। हमारे बच्चों का भविष्य अंधकार में पड़ा हुआ है।”

नौनिहालों का भविष्य अधर में

शिक्षा की नींव प्राथमिक स्तर पर रखी जाती है। यहीं से बच्चा अक्षर ज्ञान, गणना, अनुशासन और आत्मविश्वास सीखता है। लेकिन कर्री के बच्चों को
न सही ढंग से पढ़ना सिखाया जा रहा है,न लिखना,न जोड़-घटाव जैसी बुनियादी गणना

यदि यही स्थिति बनी रही, तो इन बच्चों का पूरा शैक्षणिक जीवन प्रभावित होगा। ड्रॉपआउट की आशंका बढ़ेगी और शिक्षा से उनका भरोसा उठ जाएगा।

ग्राम कर्री के ग्रामीणों और अभिभावकों में इस स्थिति को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि वे कई बार मौखिक रूप से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें विद्यालय की तत्काल उच्चस्तरीय जांच
उपस्थिति रजिस्टर और वास्तविक उपस्थिति का भौतिक सत्यापन
दोषी शिक्षकों पर निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई
विद्यालय में स्थायी और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था

सवाल जो जवाब मांगते हैं
जब शिक्षक स्कूल नहीं आते, तो उनकी उपस्थिति कैसे दर्ज हो रही है?
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर अनुपस्थिति के बावजूद अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या शिक्षा विभाग को इस स्थिति की जानकारी नहीं है, या जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है?
क्या दूरस्थ गांवों के बच्चों का भविष्य इतना सस्ता है?

यह रिपोर्ट केवल एक विद्यालय की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सवाल है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कर्री जैसे कई गांवों के बच्चे इसी तरह सिस्टम की लापरवाही की कीमत चुकाते रहेंगे।

अब देखना यह है कि क्या यह एक्सपोज़े रिपोर्ट शिक्षा विभाग की नींद तोड़ पाएगी?
या फिर ग्राम कर्री के नौनिहाल यूँ ही काग़ज़ी व्यवस्थाओं और खोखले दावों के बीच अपना भविष्य गंवाते रहेंगे?

आइये जानते हैं क्या कहते हैं संकुल प्राचार्य
संकुल केंद्र मड़ीसरई के प्राचार्य अनिल तिवारी से जब असमय स्कूल बंद होना पाया गया और उनका पक्ष जनना चाहा गया तो संकुल प्राचार्य के द्वरा कहा गया कि मैडम दो बच्चों को लेकर गयी हुई थी कहां गयी हुई कुछ पता नहीं उसकी जानकारी संकुल प्राचार्य को भी नहीं थी।मैडम के द्वरा कोई जानकारी नहीं दी गयी थी।

क्या कहते हैं जिला शिक्षा अधिकारी
जिला शिक्षा अधिकारी आर. पी.मिरे से जब कर्री स्कूल के बारे में चर्चा की गई और उनका पक्ष जनना चाहा गया तो पत्रकार को भ्रमित करते हुए कहा गया कि साहू जी से मिल लो ??साहू जी कौन हैं क्या जिला शिक्षा अधिकारी से कोई ऊंचा ओहदा है क्या साहू जी का जो जिला शिक्षा अधिकारी पत्रकार को उनके पास भेज रहे हैं जब दुबारा उनसे उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो रटा रटाया जवाप दिया गया की भेज कर जांच की जाएगी दोसी पाये जाने में कार्यवही की जाएगी जिला शिक्षा अधिकारी कब तक जांच करेंगे और कब कार्यवाही करेंगे यहां का यह पहला मामला नहीं है कुछ महीने पहले भी ऐसा हुआ था और जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा जांच कर कार्रवाई करने की बात कही गई थी लेकिन आज तक स्कूल का हाल ऐसा क्यों है शिक्षक अपने मनमर्जी का कर रहे हैं बच्चों की पढ़ाई चौपट है।

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