स्वामी आत्मानंद विद्यालय महलपारा में टूटकर गिर रहा छत,
छात्राओं को वाशरूम में दिक्कत,शिक्षिकाओं के लिए वाशरूम नही कबाड़ में जाते है निस्तार के लिए

कुछ भवन और कमरे हुए औचित्यविहीन अत्यंत आवश्यक है जीर्णोद्धार और प्रसाधनों का सही निर्माण, प्रतिवेदन और इस्टीमेट के लिए सीईओ जिला पंचायत ने दिए निर्देश
संवर्त कुमार रूप
बैकुंठपुर/ सभ्य समाज में आवश्यक है कि महिलाओं का खासतौर पर सार्वजनिक मामले में सम्मान बने रहे और यह समाज का नैतिक दायित्व भी होना चाहिए इस पर साहित्यकार संपादक संवर्त कुमार रूप ने विस्तृत लेख लिखा था जो देश की राजधानी दिल्ली में पुरस्कृत हुआ था। आइए इसी पर गौर करते है।

आपको मालूम है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में भूपेश बघेल सरकार का शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कार्य और योजना जिसे माना जाता रहा है वह है स्वामी आत्मानंद विद्यालय भले ही इन विद्यालय में लॉटरी सिस्टम धांधली,ड्रेस एवम अन्य खरीदी में धांधली,मध्यान्ह पोषण में धांधली उजागर हुई हो और कही कही लीपा पोती भी हुई है। लेकिन अभी हम बात कर रहे है अत्यंत जरूरत की और साथ ही निजता की।
निजता का हनन :–
जैसा समाचार के शुरुवात में लिखा है कि छात्राओं को वाशरूम में दिक्कत ,सेजेस महलपारा में छात्राओं के प्रसाधन के कमरे में एक दरवाजा सामने की तरफ है खुलने बंद होने पर निजता का हनन का कारण बन सकता है। क्योंकि अक्सर विद्यालय के दौरान अल्पकालिक छुट्टी में ही छात्राएं प्रसाधन का प्रयोग करती है सामने मैदान होने से बालक वर्ग और अन्य वही रहते है जिससे निजता का हनन है। यह अत्यंत आवश्यक विषय है इसे आत्मानंद विद्यालय योजना के समिति जिला अध्यक्ष एवं अन्य को त्वरित ध्यान आकर्षण की जरूरत है।

शिक्षिकाओं के लिए सही प्रसाधन का अभाव
विद्यालय में शिक्षिकाओं के लिए उचित प्रसाधन का अभाव है। पुराने सड़े बंगले के पीछे कबाड़ के पास सड़े से प्रसाधन का इस्तेमाल करती है जो कितना कष्टकारी है। शिक्षक तो फिर भी किसी तरह समझ लेते है मुसीबत महिला शिक्षिकाओं को है लेकिन उन्होंने इसे ही अपने रूटीन का हिस्सा बना लिया है वे जानती है कि क्या कहे कुछ होना नही है लेकिन सम्यक क्रान्ति सदैव ऐसे बिंदु उठाता है और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करता है जिसे कर्तव्य के रूप यह क्रांतिकारी समाचार पत्र लेता है।
चेकरस टाइल्स नही लगे आधे,जो लगे वो गुणवत्ताविहीन
विद्यालय के मैदान में लगे चेकर्स टाइल्स भी सही ढंग से नहीं लगे है। कही आधा, कही उखड़ा,कही जमाव सही नही तो कहीं भराव सही नही है और आधा हिस्सा खाली है।बिना लगा टाइल्स सायकल स्टैंड के समीप जमा पड़ा हुआ है।
विद्यालय को रंगरोगन की जरूरत
हांथी के दांत खाने के कुछ और दिखाने के कुछ। ये हाल है इस विद्यालय का सड़क से देखेने से तो रंगरोगन ठीक दिखता है लेकिन अंदर देखने से पता चलता है कि कुछ कक्षाओं को रंगरोगन की जरूरत है।
पुराने भवन का छत गिर रहा, बंद कर दिए लगा रहता है ताला
पुराने भवन को ठीक ठाक करके यहां कक्षाएं बना दिए गया थे अब पुराना माल(वस्तु) कितना टिकाऊ होता है ? उसे बार बार रिपेयरिंग की जरूरत पड़ती है, शुरू में तो संबंध में भी काफी लगाव व जुड़ाव होता है लेकिन धीरे धीरे उसमे दरार पड़ जाती है जब माल(वस्तु) और संबंध में रिपेयरिंग और दरार भरने की जरूरत पड़ती है तब कुछ चल पाता है फिर यह तो सरकारी कार्य जिनमे कुछ बचाना भी है, कई अवसर पर कमीशन भी लेना देना है, फिर जो काम मिला उसमे भी हिस्सा बंटन।यह अमूमन देखा ही गया है।
बहरहाल इस पुराने जीर्ण शीर्ण विद्यालय के छत व कमरे को बढ़िया जीर्णोधार की जरूरत है ताकि शिक्षक विद्यार्थी बिना डर भय के पढ़ा और पढ़ सकें। यहां लगभग 10 कमरे है जो बंद है।
750 से ऊपर छात्र छात्राएं,दो पाली में लगाना मजबूरी है:–
शीतलहर के चपेट में कोरिया है, हाल ही में स्वास्थ्य अमला प्रमुख सीएमएचओ ने इसके प्रकोप से बचने के लिए दिशा निर्देश जारी किए है और आत्मानंद महलपारा जो पालकों की पहली पसंद बन गया है 750 से ऊपर छात्र छात्राएं है । कैसे पढ़ेंगे ? कहां बैठेंगे? समस्या यह है और पुराना भवन का छत तो गिर रहा है फिर किसी अनहोनी के डर से वहा शिक्षण कार्य कैसे हो? इसलिए 2 पाली में पढ़ाई होती है एक 7: 45 से 12: 30 और एक 12: 45 से 4: 30 यहां दोनो ही पाली शीतलहर के चपेट में है। क्योंकि पहली पाली में 6 बजे से तैयारी करनी होगी बच्चो को,नहाना धोना तो छूट ही जाएगा कई का, फिर विद्यालय में कई शिक्षिकागण पारिवारिक शादीशुदा है बाल बच्चे वाले है उनको कितनी दिक्कत होती होगी वो ही जानती है घर और स्कूल के बीच दायित्व का निर्वहन। फिर 4: 45 के बाद 5 बजे से इस मौसम में अमूमन अधेरा सा होने लगता है इसलिए पुराने भवन सही तरीके से, पुराना सब हटाकर नए सिरे से मरम्मत जरूरी है तब जाकर वहां विद्यार्थी रहें पढ़े साथ ही शीतकाल में कम से कम अगले वर्ष शिक्षक –शिक्षिका, और छात्रा– छात्रों को 10 से 4 के बीच अपने विद्यालय और घर का कुशल निर्वहन करते हुए आनंद आए ना की ठिठुर ठिठुर के और जल्दबाजी में अव्यवस्थित रूप से।
आंगनबाड़ी, विद्यालय के बीच एक शिक्षक भवन,और पीछे कबाड़ में सांप का आतंक,पुराने घटिया वाशरूम को तोड़कर नवीन उपक्रम की जरूरत:–
विद्यालय प्रांगण में एक पुराना जीर्ण आंगनबाड़ी है जिसका वहां कोई औचित्य नहीं है फालतू का जगह घेरा हुआ है, इसी तरह पीछे कबाड़ पड़ा हुआ है जहां से धमना सहित वेराइटी वेराइटी के सांप विद्यालय के छत और कमरों में जा पहुंचते है जो अनहोनी का सूचक है। साथ ही एक कमरा है जहां शिक्षक लंबा सा भूरा,मेज लगा कर छुट्टी के समय गपशप करते है या अन्य स्कूल के कार्यों का निर्वहन भी करते है इस भवन की आवश्यकता नहीं है प्रबंधन के अनुसार यदि इसे बीच से हटाकर कोई अन्य उपक्रम जैसे मैदान के किनारे सुव्यवस्थित प्रसाधन शिक्षक शिक्षिकाओं के लिए अलग अलग हो और छात्राओं के लिए तो उचित होता और जो पुराने और घटिया प्रसाधन है उनके स्थान पर नवीन और उचित मापदंड के प्रसाधन होना जरूरी है।
जिला शिक्षाअधिकारी से प्रतिवेदन और इस्टीमेट बनाने कहा गया: सीईओ आशुतोष चतुर्वेदी
इस संबंध में संवेदनशील कोरिया सीईओ श्री चतुर्वेदी को सम्यक क्रांति द्वारा बताया गया तब उन्होंने तत्परता दिखाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को प्रतिवेदन और इस्टीमेट बनाए जाने हेतु आदेशित किया है।
अब देखना होगा कि छात्र छात्रा, एवम शिक्षकगण हित के इस अत्यंत जरूरी विषय में शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन कितने जल्दी कार्य करवा पाता है।



