मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर

बारिश के मौसम में रामदाहा की सुंदरता अद्वितीय

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मनेद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर/ जिले में स्थित रामदाहा जलप्रपात बारिश के दिनों में अपनी सुंदरता का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। यह जलप्रपात अपनी आकर्षक छटा के लिए प्रसिद्ध है, साथ ही इसका पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक महत्व भी है।

प्राकृतिक सुंदरता

रामदाहा जलप्रपात में प्रकृति की सुंदरता देखने को मिलती है। चारों ओर घने जंगलो के बीच में यह जलप्रपात मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सबसे खूबसूरत जलप्रपात में से एक है। चट्टानों से टकराते हुए गिरता पानी दूध की तरह दिखाई देता है जो किसी पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए काफी है।

ऐतिहासिक महत्व

रामदाहा जल प्रपात से लगा हुआ मुरेलगढ़ का पहाड़ है, जिस पर जाने का रास्ता थोड़ा सा कठिन है। यहां के बारे में कहा जाता है कि ऊपर एक किला एवं तालाब है, जिसका कोई गुप्त मार्ग रामदहा वाटर फॉल तक आता है।

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स्थानीय महत्व

यहा के स्थानीय लोग इस रमदहा जलप्रपात को चांगभखार की शान के साथ साथ अपनी कुलदेवी का स्थान भी मानते हैं।

जलप्रपात की विशेषता

200 फीट ऊंचे पहाड़ से गिरता है पानी बनास नदी पर बसा यह जलप्रपात जिसे लोग रमदहा जलप्रपात के नाम से जानते हैं। 200 फीट की ऊंचाई से जब पानी नीचे गिरते हुए पत्थरों से टकराता है तो मानो ऐसा लगता है कि जैसे संगीत की कोई धुन बज रही हो।

पर्यटन स्थल

रामदाहा जलप्रपात की सुंदरता छत्तीसगढ़ के अलावा पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती शहरों से लोगों को अपनी ओर खींच लाती है। प्रकृति ने रामदाहा जलप्रपात और उसके आसपास के क्षेत्र को इस तरह सजाया और संवारा है कि पहली नजर में ही यह सैलानियों को भा जाता है।

प्रकृति की सुंदरता और ऋतुओं का महत्व

प्रकृति ने यहां तीन अलग-अलग ऋतुएं प्रदान की हैं जिनकी अलग-अलग विशेषता है। वर्षा ऋतु में जब प्रकृति पहाड़ों को नहला-धुला कर पेड़ पौधों से सजाकर उसको निहारती है, तब स्वयं अपने हाथों से एक काला डिठौना लगाना नहीं भूलती। वर्षा ऋतु हरियाली को अपने आंचल में बांधकर लाने वाली सर्वश्रेष्ठ ऋतु होने का गौरव प्राप्त करती है।

छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता

छत्तीसगढ़ की सीमाओं के 44% वन क्षेत्र से घिरे होने के कारण इसकी प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले की उंची नीची पहाड़ियों का सौंदर्य इतना खूबसूरत दिखाई देता है कि लगता है कि किसी तरह इसे हमेशा के लिए कैद कर लिया जाए।

रामदहा जल प्रपात: आकर्षण और इतिहास

रामदहा जल प्रपात अपनी आकर्षक छटा के लिए प्रसिद्ध है, साथ ही इसका पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक महत्व भी है। रामदहा जल प्रपात से लगा हुआ मुरेलगढ़ का पहाड़ है, जिस पर जाने का रास्ता थोड़ा सा कठिन है।

मुरेलगढ़ का इतिहास

यहां के बारे में कहा जाता है कि ऊपर एक किला एवं तालाब है, जिसका कोई गुप्त मार्ग रामदहा वाटर फॉल तक आता है। पुराने लोगों के बताने के अनुसार मुरेलगढ़ में एक राजा रहते थे, साथ में उनकी रानी भी रहती थीं।

रानी की कहानी

राजा किसी कार्य से बाहर गए थे, वहां रहने वाले एक नाई ठाकुर के मन में रानी को लेकर गलत भावना आ गई। उसने रानी के साथ अनाचार करना चाहा, नाई के इस कृत्य से रानी अत्यंत दुखी हुई। उन्होंने रामदहा में जा कर अपने प्राण त्याग दिए।

राजा की जल समाधि

जब राजा वापस आए तो उन्हें इस घटना की जानकारी मिली, रानी की खोज में जब राजा निकले तो रानी से आग्रह किया कि यदि आप इस प्रपात में हो तो अपना हाथ पानी से निकाल कर दिखाओ। रानी ने अपना हाथ पानी से निकाल कर इशारा किया तब राजा अपने घोड़े सहित रामदहा में जल समाधि ले लिए।

गुप्त रास्ता और रहस्य लोक

पुराने लोग बताते हैं कि रामदहा के नीचे से कोई गुप्त रास्ता है जो मुरेलगढ़ पहाड़ तक जाता है। पानी के नीचे सामान्य जीवन है। इस संबंध में एक और कहानी प्रचलित है कि सरपंच लालदास के पिता जी कई दिन तक घर नहीं आए तब उन लोगों ने उन्हें मरा हुआ मान कर क्रिया कर्म कर दिया।

पत्थर की चूड़िया और सिक्के

आज भी मुरेलगढ़ पहाड़ एवं उसके आस पास लोगों को पत्थर की चूड़िया एवं सिक्के मिल जाते हैं। यह रामदहा जल प्रपात के इतिहास और रहस्य को और भी रोचक बनाता है।

नीतीश ने बताया कि रमदहा जल प्रपात में हरे-हरे पेड़-पौधे और पानी का जल प्रपात बहुत अच्छा दिखता है। यहां बहुत सुकून मिलता है, लेकिन कुछ लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है जो सेल्फी के चक्कर में ज्यादा नजदीक जाते हैं। उन्होंने सावधानी बरतने की सलाह दी और कहा कि रास्ता खराब है, खासकर रमदहा घुसते ही रास्ता खराब हो जाता है। नीतीश ने बताया कि यह प्रपात जनकपुर से लगभग 25-30 किलोमीटर है। प्रशासन से मांग की कि रास्ता बन जाए तो बेहतर सुविधा हो जाएगी और बरसात में लोग गिरने-फंसने से बच जाएंगे। उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि दूर से प्राकृतिक का आनंद लें और सावधानी बरतें। नीतीश ने कहा कि अगर रास्ता सुधर जाए तो यहां और भी पर्यटक आ सकेंगे और इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि इस पर ध्यान दिया जाए।

मोनू सिंह ने बताया कि वह और उनके साथी अक्सर रमदहा जलप्रपात आते रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह जगह बहुत अच्छी है, लेकिन व्यवस्था की कमी है। गेट लगा हुआ है और टिकट लगता है, लेकिन वहां पर कोई देखरेख करने वाला नहीं है।मोनू सिंह ने कहा कि यहां पर देखरेख करने वाला होना चाहिए, जो लोगों को जलप्रपात की तरफ जाने से रोक सके। इससे दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

प्रभात कुमार ने बताया कि हम जनकपुर से आए हुए हैं और यह जगह बहुत अच्छी लगी। यहां दूर-दूर से लोग आते हैं और टिकट लगती है गेट से अंदर आने में। लेकिन यहां पर कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण लोग पास में चले जाते हैं और दुर्घटना हो जाती है। मैं चाहता हूं कि लोग यहां आएं और दूर से इसका लुत्फ उठाएं। प्रशासन को इसकी व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और वे इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकें।

देवलाल ने बताया कि इस जलप्रपात को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं, जिनमें दिल्ली, भोपाल, रायपुर, अंबिकापुर, शहडोल जैसे शहरों से पर्यटक आते हैं। पर्यटकों का कहना है कि यह जगह बहुत अच्छी है और ऐसी कोई दूसरी जगह नहीं है।

सचिन वर्मा प्रोफेसर ने बताया कि बनास नदी का यह जलप्रपात बहुत ही रमणीय और मनोरम है। सुरक्षा व्यवस्था अच्छी कर दी गई है, जिससे पर्यटकों को यहां आने में सुविधा होती है। दूर-दूर से पर्यटक यहां आते हैं और पिकनिक मनाते हुए इसकी छटा देखते हैं।मैं सभी से अपील करता हूं कि वे यहां आएं और इसके मनोरम दृश्य का लुत्फ उठाएं, लेकिन सावधानी बरतें। जलप्रपात के पास न जाएं, क्योंकि इससे बड़ी दुर्घटना हो सकती है। पूर्व में हुई दिल दहला देने वाली घटना 2022 का उल्लेख करते हुए मैं कहना चाहता हूं कि जलप्रपात की मनोरम छवि का दूर से ही आनंद लें और पास न जाएं।

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