छत्तीसगढ़

विश्व क्षय दिवस पर निकाली गई रैली

लोगों को क्षय रोग के संबंध में किया गया जागरूक

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गरियाबंद/ कलेक्टर दीपक अग्रवाल के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गार्गी यदु पाल के मार्गदर्शन में आज जिला चिकित्सालय गरियाबंद में कार्यक्रम आयोजित कर विश्व क्षय दिवस मनाया गया। जिसके अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग एवं शिवम कालेज ऑफ नर्सिंग के छात्र-छात्राओं, रेडक्रास सोसायटी के वालेंटियर के द्वारा जेन-जागरूकता रैली निकाली गई। रैली को गरियाबंद नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष रिखी राम यादव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जी.आर. मरकाम, उपाध्यक्ष आसिफ मेमन तथा पार्षद सुरेन्द्र सोनटेके द्वारा हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया।

रैली पश्चात जिला चिकित्सालय में आयोजित कार्यक्रम में क्षय रोग विषय पर संगोष्ठी, स्वास्थ्य परिचर्चा, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन करते हुए टी.बी. मरीजों को अतिरिक्त पोषण आहार कीट प्रदान किया गया। इस दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक टी.बी. मुक्त भारत का लक्ष्य रखा है। जिसे चिन्हाकिंत एवं समूह वाले क्षेत्रों तथा हाट बाजार टी.बी. खोज अभियान चलाकर प्राप्त किया जा रहा है। टी.बी. मुक्त करने जन समूह की सहभागिता को आवश्यक बताया गया। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। 07 दिसम्बर 2024 से 24 मार्च 2025 तक 100 दिवसीय निक्षय निरामय अभियान तहत उच्च जोखिम समूह के संभावित मरीजों का स्क्रीनिंग कर जांच एवं उपचार प्रदान किया जा रहा है।

नगर पालिका अध्यक्ष रिखी राम यादव ने सम्बोधित करते हुए कहा कि गरियाबंद नगर सहित जिले को टी.बी. मुक्त करने हेतु सभी नागरिकों को सहयोग प्रदान करने की अपील की। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जी.आर. मरकाम ने कहा कि जिले के सभी ग्राम पंचायतों को टी.बी. मुक्त ग्राम पंचायत बनाने हेतु विशेष प्रयास किया जायेगा।

जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ. अमन कुमार हुमने ने बताया कि विश्व क्षय दिवस के बारे में बताते हुए कहा कि टी.बी. रोग के लक्षण, जांच-उपचार संबंधी जानकारी दी। साथ ही दो हफ्ते से अधिक खॉसी होने पर अनिवार्य रूप से बलगम की जांच कराने की अपील की। इसके अलावा जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. बी.बारा, वरिष्ठ सर्जन डॉ. हरिश चौहान ने लोगो को स्कीन जांच कर सीवाय टीबी स्क्रीनिंग जांच का शुभारंभ किया गया। इससे टी.बी के संक्रमण का पता लगाकर आवश्यक उपचार देकर टी.बी. से बचाया जाता है।

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