सरगुजा संभाग के आयुक्त जी आर चुरेंद्र दूरस्थ वनांचल क्षेत्र जनकपुर में शासन समाज अधिकारी ग्रामीण के बीच सामंजस्य स्थापित करने लिए बैठक

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर/सरगुजा संभाग के आयुक्त जीआर चुरेन्द्र ने शनिवार को एमसीबी जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ से 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित विकासखंड मुख्यालय जनकपुर पहुंच कर कहा कि समन्वय के साथ समाज में नशा की रोकथाम करने से ही समाज का कल्याण होता है। नशा मुक्ति से स्वस्थ समाज व शासन प्रशासन तथा राज्य की परिकल्पना साकार होगी। उन्होंने शनिवार को भरतपुर विकासखंड़ के मुख्यालय जनकपुर में आयोजित विकासखंड़ स्तरीय जनोन्मुखी प्रशासन सुशासन की व्यवस्था को प्राप्त करने विकास खण्ड स्तरीय समन्वय एवं मार्गदर्शी बैठक में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पंचायत से लेकर जिला स्तर तक के जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है। ग्राम विकास की जिम्मेदारी आप सभी के आपसी समन्वय व तालमेल से ही संभव है।

उन्होंने सामाजिक कुरीतिया और बुराइया को विकास में बाधा बताते हुए ग्रामीणों से अपील किए कि शराब को समाज से पूरी तरह खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाएं। एकाएक पूरी तरह से नशा बंद नहीं हो सकता लेकिन नशा सेवन में धीरे धीरे कम करके रोक लगाया जा सकता है।उन्होंने आगे कहा कि हर गांव में सर्व समाज सामूहिक विवाह समिति गठित की जाए, ताकि विवाह समारोह में फिजूल खर्ची कम हो और समाज में आपसी भाईचारे को बढ़ावा मिले इसी तरह स्वच्छ भारत अभियान का उल्लेख करते हुए हुए ग्रामीणों से हर घर में शौचालय निर्माण और नियमित उपयोग सुनिश्चित करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता ही बीमारियों से बचाव का प्रभावी तरीका है। ग्राम सभा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर परिवार का एक सदस्य ग्राम सभा में भाग ले, ताकि गांव के विकास की सही रणनीति बनाई जा सके। आत्मनिर्भर पंचायत के लिए श्रमदान और पंचायत भवन के साथ ही साथ गांव की साफ-सफाई पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया। उन्होंने इस अवसर पर जल जंगल जमीन के बारे में कहा कि अपनी जमीन किसी को बिक्री नहीं करें और अच्छे से मान लगाकर खेती करें और शासन से मिलने वाली योजनाओं का लाभ लेकर उन्नति करें।ग्रामीण विकास पर बैठक में अव्यवस्था की पोल खुली, ग्रामीण बोले- अधिकारी सिर्फ औपचारिकता निभाने आते हैं

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर–सरगुजा संभाग के आयुक्त जीआर चुरेंद्र ने शनिवार को जनकपुर में विकासखंड स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की, जिसका उद्देश्य प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच समन्वय स्थापित करना था। बैठक में ग्रामीणों को नशा मुक्ति, सामूहिक विवाह, स्वच्छता अभियान और ग्राम सभा की महत्ता पर जागरूक किया गया। लेकिन इस कार्यक्रम में अधिकारियों की उदासीनता और अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आईं।
ग्रामीणों की अनदेखी, अधिकारी रहे लापरवाह
110 किलोमीटर दूर स्थित इस वनांचल क्षेत्र में आयोजित बैठक में आए ग्रामीण कुर्सियों पर ही सोते नजर आए। वजह साफ थी—अधिकारियों की ओर से पीने के पानी और बुनियादी सुविधाओं तक की व्यवस्था नहीं की गई। वहीं, अधिकारी आरामदायक कुर्सियों पर बैठकर चाय-नाश्ते का लुत्फ उठाते रहे।
जनप्रतिनिधियों ने लगाए गंभीर आरोप
जनपद पंचायत सदस्य करिया लाठी ने आरोप लगाते हुए कहा, “ग्रामीणों को केवल बुलाने की औपचारिकता की जाती है। अधिकारी खुद बढ़िया कुर्सियों पर बैठते हैं, चाय-नाश्ता करते हैं, और जनता के लिए पानी तक का इंतजाम नहीं होता। यह पूरी प्रक्रिया दिखावटी है।”
नशा मुक्ति पर जोर, लेकिन उपाय नहीं
आयुक्त चुरेंद्र ने अपने संबोधन में नशा मुक्ति की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि “समाज से नशा धीरे-धीरे खत्म किया जाना चाहिए। शराब और गांजे की लत समाज के विकास में बाधा है।” लेकिन ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि नशा रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
स्वच्छता और सामूहिक विवाह पर सुझाव
चुरेंद्र ने हर घर में शौचालय और सामूहिक विवाह समितियां बनाने पर जोर दिया। लेकिन ग्रामीणों ने कहा कि योजनाएं तो बनाई जाती हैं, लेकिन इनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों पर निभाई जाती है।
जल, जंगल और जमीन पर सलाह बेअसर
चुरेंद्र ने ग्रामीणों को जमीन न बेचने और खेती पर ध्यान देने की सलाह दी। हालांकि, जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जमीन पर अवैध कब्जों को हटाने की मांग पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
समाज में असंतोष बढ़ा
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस बैठक को औपचारिकता बताते हुए अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि अगर बैठक में ही जनता की अनदेखी हो रही है, तो रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान कैसे होगा?
सरगुजा संभाग के आयुक्त की बैठक में आई अव्यवस्थाओं की तस्वीर, ग्रामीणों में नाराजगी
इस घटना ने साफ कर दिया कि सरकार और प्रशासन की योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन केवल औपचारिकताएं निभाने में जुटा है, या वास्तव में सुधार के लिए प्रयास कर रहा है?



