कोरिया

पितृ दिवस पर विशेष : उन आम के फलों में है पिताजी की सीख और अपनेपन,की मिठास -उपाध्याय

[responsivevoice_button voice="Hindi Male"]

मनेद्रगढ़/ समाज में पिता की भूमिका और उनके योगदान के सम्मान देने हेतु -“पितृ दिवस “बनाया जाता है।

1-7-300x225 पितृ दिवस पर विशेष : उन आम के फलों में है पिताजी की सीख और अपनेपन,की मिठास -उपाध्याय

वार्ड नंबर 10 के तिलक वार्ड के निवासी वरिष्ठ योग प्रशिक्षक और मानवीय मूल्यों के उत्थान के लिए देश देश का प्रतिष्ठित -” आध्यात्मिक गौरव सम्मान “से सम्मानित सतीश उपाध्याय ने इस अवसर अपने पिता से जुड़ी की प्रेरक और भावनात्मक संस्मरण को याद करते हुए बताया कि -मेरे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं प्रकृति प्रेमी पिता एक बार बनारस से विशेष प्रजाति का आम और अमरूद का पौधा एवं फूलो के बीज लेकर आए और बोले इसे आज तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हारे हाथों से ही लगाना है। यही तुम्हारे जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए मेरी तरफ से एक तोहफा है। पिताजी वे पौधे एवं बीज लेकर आंगन की तरफ जा ही रहे थे कि गांधी आश्रम के कुछ कार्यकर्ता आ गये। पिताजी उनके साथ एक आवश्यक जनसभा को संबोधित करने चले गए। जाते-जाते उन्होंने मुझसे कहा- सतीश आंगन में ये दोनों पौधे लगा देना , तुम्हारे जन्मदिन पर ही इसे लगाना है। लेकिन मैं भूल गया। देर रात को पिताजी घर लौटे तो दूसरे दिन सुबह उन्होंने मुझे उन्होंने मुझसे पूछा लगा दिए दोनों पौधे बेटा?वो पौधों के बीज कहां है? वहां बीज नहीं थे। रात में उसे चूहे कुतर गए। मैंने बहाना बनाया- भैया को बोला था -चलो भैया पिताजी कुछ पौधे लाए हैं उसे लगाते हैं पर भैया कहीं चले गए थे।
पिताजी मेरे झूठ और बहाना को समझ गये। दूसरे दिन सुबह ही मुझे आंगन में लेकर गए बोले-एक छोटा काम भी यदि हम दूसरों के लिए छोड़ दें यह अच्छी बात नहीं, आज दोनों पौधों को अपने हाथ से लगाओगे मैं रहूं या ना रहूं बड़े होकर ये पौधे तुम्हें तुम्हारे जन्मदिन और मेरी याद दिलाते रहेंगे। पिताजी आंगन में गड्ढा खोदा मैंने वह पौधे लगाए। पिताजी ने कहा -लो अपने हाथ से इसमें खाद पानी डालो। पिताजी का 18 मार्च 2013 में निधन हो गया।आज वह विशेष प्रजाति का आम का वृक्ष हर वर्ष मीठे मीठे फल देता है । उस वृक्ष से पिताजी का अपनापन प्रकृति के प्रति मार्गदर्शन और उनकी याद जुड़ी हुई है। पिताजी की प्रेरणा से ही आगे चलकर मैं राष्ट्रीय हरित वाहिनी से जुड़ कर पर्यावरण के प्रति अपना फर्ज निभा रहा हूं ।यह पिताजी की ही सीख एवं मार्गदर्शन था कि मैं 17 वर्षों में 10000 से अधिक विद्यार्थियों शिक्षकों को पर्यावरण का प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया। हजारों स्कूली बच्चों को पौधे लगाने के लिए वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया। आज भी पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हूं।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!