जिले में अवैध ईटा भट्ठा का संचालन जोरों पर.. क्या वन,खनिज एवं राजस्व विभाग के द्वारा दी गई मौन स्वीकृत

सतीश मिश्रा
जनकपुर/ एमसीबी जिले के विकासखंड भरतपुर के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में बेखौफ अवैध ईंट भट्टों का कारोबार सैकड़ों से भी ज्यादा संचालित है। इन सब को वन अमला एवम राजस्व और खनिज विभाग की खुली छूट मिली हुई है। इस तरह इस क्षेत्रों में सालों से ईटा भट्टा संचालन कर रखे है। ईटा भट्टा संचालित कर लोग पर्यावरण के अलावा वन को भी नुकसान तो पहुंचा ही रहे है और साथ-साथ हर वर्ष बड़े-बड़े वृक्षों को काटकर लकड़ी से ईटा पकाते हैं जिसके कारण पेड़ कटाई जोरों पर है साथ ही राजस्व और खनिज विभाग को भी लाखों रुपये का चपत लगा रहे हैं। संचालकों के पास ना तो कोई किसी विभाग का परमिशन है आना डर है ना ख़ौफ़ बेधड़क धड़ल्ले ईटा भट्टा का संचालन किया जा रहा है और इनके पास ईंट निर्माण के लिए ग्राम पंचायत की कोई स्वीकृत एन ओ सी भी नहीं है ईंट निर्माण से भूमि का कटाव से लेकर जंगलों से लकड़ी की कटाई कर पर्यावरण को काफी हद तक नुकसान पहुंचा रहे है इस वनांचल क्षेत्र में वन विभाग एवम राजस्व व खनिज विभाग के द्वारा अवैध रूप से संचालित हो रहे ईटा भट्ठा पर कोई कार्यवाही नहीं की जारही है और न अंकुश लगाया जारहा है विकाशखंड में वैसे तो लगभग सौ से भी ज्यादा अवैध ईटा भट्टों संचालित हो रहे हैं पर कार्यवाही के नाम पर कोई प्रतिक्रिया नजर नही आ रही है जिससे इस क्षेत्र के अवैध ईट भट्टों के संचालक बेधड़क इस कारोबार को मोटी कमाई का जरिया बनाकर अंजाम दे रहे हैं। शासन ने लाल ईंटो को बनाने के लिए रोक लगा रखा है फिर भी लाल ईंटो का निर्माण धड़ल्ले से किया जा रहा है। यहां तक कि कुछ अवैध ईटा नदी एवम जिंदा नाला से लगे है जिससे ईट बनाने में मिटटी और पानी बड़ी आसानी से इन्हें उपलब्ध हो जाता है। इन सब की जानकारी होते हुए भी वन विभाग एवम राजस्व और खनिज विभाग खामोश बैठा हुआ है और संचालकों के ऊपर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही ना होना सवालिया निशान खड़ा करता है।
अवैध ईटा भट्टी
लगातार कुछ वर्षों से क्षेत्र में अधिक मात्रा में अवैध ईटा भट्टा संचालित हो रहे है जिसमें में वन विभाग के कर्मचारियों द्वरा बोला जाता है इसमें खनिज विभाग को कार्यवाही करनी चाहिये और उनके पास रसीद है पर सोचने वाली बात यह है की ईटा भट्ठा के कुछ संचालकों के पास केवल दो-तीन चट्टा की रसीद है इससे अनुमान लगाया सकता है की क्या इतना ईटा तीन-चार चट्टा से पकाया जा सकता है और इनके द्वरा कहा जाता है कि आप लोग खनिज एवम राजस्व विभाग से बात करें इस तरह का कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं अवैध ईटा भट्टो के बारे में जिला खनिज अधिकारी से चर्चा करने के लिये फोन लगाया गया तो महोदय फोन उठाना उचित नहीं समझते।
अब देखना होगा की वन राजस्व एवं खनिज विभाग इन अवैध ईटा भट्ठा के संचालकों पर कब करवाई करता है यह फिर इसी तरह यह अवैध कारोबार फलता-पुलता रहेगा।



