कोरिया के 5 प्रतिशत जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय नीति बनाने पर
उपाध्याय ने मुख्यमंत्री के प्रति व्यक्त किया आभार।

मनेद्रगढ़/ जल संरक्षण और भूजल संवर्धन की दिशा में कोरिया जिला के जल संरक्षण मॉडल को पूरे देश में लागू करने पर, वरिष्ठ पर्यावरणविद् एवं राष्ट्रीय हरित वाहिनी के पूर्व जिला समन्वयक सतीश उपाध्याय ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की उपस्थिति में लिया गया। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व भूजल संकट से ग्रसित है ऐसे में कोरिया का यह नवीन प्रोजेक्ट और नवाचार पूरे देश के लिए जल संकट आपूर्ति में अहम योगदान निभाएगा। कोरिया के इस नवाचार के लिए कोरिया कलेक्टर चंदन त्रिपाठी की उत्कृष्ट पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य की सराहना करते हुए सतीश उपाध्याय ने कहा कि कोरिया का यह नवाचार पूरे देश के लिए जल संरक्षण की दिशा में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। कोरिया जिले में;-” आवा पानी झोंकी “अभियान के अंतर्गत पूर्व में भी कलेक्टर के निर्देशन पर जल संरक्षण की दिशा में कार्य होते रहे हैं इससे कोरिया में भूजल स्तर में भी वृद्धि हुई है कोरिया के इस नवाचार को पूरे देश में लागू करने से निश्चित ही देश के किसानों ग्रामीणों एवं कृषि महाविद्यालय एवं शोधार्थियों के लिए यह नवाचार अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। पिछले 20 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण एवं स्कूली छात्राओं को पर्यावरण से जोड़ने की दिशा में सक्रिय पर्यावरणविद् उपाध्याय ने भारत सरकार के इस महत्वपूर्ण निर्णय को राष्ट्र की खुशहाली से जोड़ते हुए कहा कि -कोरिया का 5% मॉडल अब राष्ट्रीय नीति , जल संकट के निदान की दिशा में आगे बढ़ रहा है इसे पूरे देश में लागू करने से जहां एमसीबी जिले के पड़ोसी जिला कोरिया का मान सम्मान बढ़ा है वहीं इस नवाचार से वर्षा जल के संरक्षण, भूजल सुधार एवं कृषि उत्पादकता में इसका सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के माध्यम से भारत सरकार से भी मांग की है कि वे कोरिया के पांच प्रतिशत मॉडल को पूरे देश में लागू करने के साथ ही नवाचार के इच्छुक कृषक एवं कृषि वैज्ञानिकों को कोरिया के इस नवाचार कार्य पद्धति को समझने के लिए कोरिया जिले के नवीन जल संरक्षण क्षेत्र का भी भ्रमण करने हेतु अवसर प्रदान करें। श्री उपाध्याय ने कोरिया कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के पक्षी संरक्षण की दिशा में रुचि लेने पर भी प्रसन्नता व्यक्त किया है।



