कोरिया

मिशन 100 : विद्यार्थियों क्या आप सब तैयार हो : संवर्त कुमार ‘रूप’

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एस. के.‘रूप’

किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए अर्जुन की तरह लक्ष्य को साधना जरूरी है। अन्य की तरह पेड़, पत्ती, आकाश देखा तो लक्ष्य कैसे भेद किया जा सकता है।इसलिए अर्जुन के अतिरिक्त अन्य सभी को गुरु द्रोण ने लक्ष्य साधने मना कर दिया था लेकिन जब अर्जुन से पूछा गया कि ‘वत्स! (शिष्य) तुम्हे क्या दिख रहा है। उसका जवाब था ‘गुरुदेव मुझे तो केवल पक्षी की आंख ही दिख रही है। क्योंकि गुरु ने आंखो को ही लक्ष्य साधने कहा था। और अर्जुन ने सटीक निशाने पर लक्ष्य साधा।

महाभारत के इस प्रसंग से विद्यार्थियों को सीखना चाहिए कि केवल लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहे अन्य किसी भी प्रकार के भटकाव पर नही अन्यथा सही और सटीक लक्ष्य प्राप्त होने में कठिनाई हो सकती है। लाइटनिंग ओरेटर प्रकाशीय वक्ता, तूफानी हिंदू सन्यासी साइक्लोनिक हिंदू मांक यह नाम महान दार्शनिक, महापुरुष स्वामी विवेकानंद को विदेशों ने दिए क्यों? क्योंकि उनके पठन–पाठन,में कोई आलस्य प्रमाद अथवा भटकाव नही था। उन्हे कई भाषाओं का ज्ञान था वहीं गायन वादन में दक्ष। छठी इंद्रिय ऐसी जाग्रत के चार सौ पृष्ठ की पुस्तक घंटे भर में कंठस्थ कर लिया करते थे जिसकी एक लाइब्रेरियन ने परीक्षा भी ली थी और वे चकित रह गए थे विवेकानंद जी को प्रत्येक पृष्ठ में क्या वर्णित है यह पता था।

स्वामी जी का कथन है ‘उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्यवारन्नीबोधत’ उठो जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको।

स्वामी विवेकानंद ने कहा था: बालकपन से युवावस्था में ब्रह्मचर्य व्रत का ठीक ठीक पालन कर लेने मात्र से आने वाली पीढ़ी लौह सीना, मतिमान, और राष्ट्र नवनिर्माण के साथ जाग्रत करने वाली होगी।

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अर्थात विद्यार्थियों को सीख लेने की जरूरत है कि इन महापुरुषों ने ये बाते क्यों कही होंगी? क्योंकि उस काल में ऐसे लोग रहे जिन्हे जागृति की आवश्यकता थी। और आज ? आज तो पाश्चात्य के रंग में डूबी हमारी सभ्यता और संस्कृति को जरूरत है ऐसे ही अर्जुन की तरह लक्ष्य भेदने वाले तो स्वामी विवेकानंद के बताए मार्ग का कुछ ठीक ठाक अनुपालन करने वाले युवाओं की इससे वे अपना अपने परिवार का समाज का राष्ट्र का कीर्ति ही बढ़ाएंगे।

गुरुणा आज्ञा ह्विचारणीयम अर्थात गुरु की आज्ञा विचारने योग्य नहीं होती उन्हे बिना विचार किए पालन करना ही शिष्य धर्म है क्योंकि गुरु को अनुभव है और वह सत्य है।

एक और संस्कृत का सुभाषित श्लोक मुझे इस समय याद आ रहा है :

अभिवादनशिलस्य नित्यम वृद्धो पसेविनह:।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम।।

अर्थात कि जो व्यक्ति सुशील और विनम्र होता है, बड़ों का अभिवादन करता है और बुज़ुर्गों की सेवा करता है, उसकी आयु, विद्या, कीर्ति और बल में वृद्धि होती है।

इसलिए प्रिय विद्यार्थियों आप सब मिशन : 100 में अपना शत प्रतिशत योगदान दीजिए। अपना लक्ष्य बनाइए अर्जुन की तरह दृष्टि रखते हुए स्वामी विवेकानंद के मार्ग का अनुसरण करते हुए लक्ष्य प्राप्ति तक रुकिए नही।

माना के एक बार आप असफल भी हुए लेकिन इतिहास गवाह है जिसने असफलता पाई है, कर दी दूनी चढ़ाई है और विजय पताका लहराई है।

एक राजा थे ब्रूस। उनकी कहानी पढ़िए युद्ध में शत्रु से डरकर भाग किसी गुफा में जा छुपे थे। वहां बैठे एक मकड़ी को देखा जाल बना ऊपर की ओर चढ़ने के प्रयास में एक बार गिर पड़ी, फिर चढ़ी कुछ ऊपर फिर गिर गई, फिर चढ़ी गिर गई, इसी तरह कई बार गिर पड़ी लेकिन उसने हार नही माना और इस बार चढ़ ही गई। राजा देख रहे थे उन्हें लगा कि यह मकड़ी इतनी हार के बाद भी जीत गई और मैं एक बार में ही भागकर गुफा में छुपा बैठा हूं। उन्होंने प्रण किया सीख लिया और अपना राज्य पा लिया।

कठिनाई और परेशानियां आपको बना देती है यह आप पर निर्भर है के आप उसके नकारात्मक पहलू में नजर गड़ाए मानसिक रोगों के शिकार होना चाहते हो या सकारात्मक पहलू पर ध्यान केंद्रित करते हुए जीवन में दुगुने उत्साह के साथ कुछ करके दिखाते, कुछ बनकर दिखाते हो।

इसलिए विद्यार्थी जीवन में जरूरी है। थोड़ा आध्यात्म, बड़ों का सम्मान,गुरु की आज्ञा का पालन,योग,ध्यान,व्यायाम,नियमित दिनचर्या हेतु उचित समय सारणी,संतुलित आहार,श्रेष्ठ विचार,नशा,काम,क्रोध आदि से एकदम दूरी, पुस्तक से मित्रता, और कोई आपका मनपसंद खेल या अन्य उपक्रम।

यह सब मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैंने कुछ हद तक ही सही छात्र जीवन में उक्त मार्ग का अनुसरण किया है और बहुत कुछ पाया है। इसलिए आप सभी छात्रों से निवेदन है कि मिशन 100 को अपना लक्ष्य बनाए और कुछ करके दिखाए।

गीता में भगवान वासुदेव ने कहा है:
कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेशु कदाचन।।

अर्थात फल की चिंता को छोड़ तेरा कर्म करने में ही अधिकार हो।।

इसलिए अच्छा हो तो बढ़िया और अगर परिश्रम अनुकूल फल नही मिला तो भी खुद को मानसिक रोगी नही बनाना है। उत्साहित ही रहना है और राजा ब्रूस की तरह फिर से उठ खड़ा होना है और राज्य पा लेना है। हां।।मेरे प्रिय विद्यार्थियों लेकिन अकर्मण,भोगी,राजसी,तामसी,आलस्य प्रमाद,नशा,मोबाइल का दुरुपयोग, कुसंगत आदि से बचकर श्रेष्ठ मार्ग के पथिक बनाने का संकल्प ले लीजिए।

क्योंकि उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः’ एक संस्कृत श्लोक है।इसका मतलब है कि मेहनत करने से ही काम सफल होते हैं, सिर्फ़ मनोरथ करने से नहीं। ‘न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः’. इसका मतलब है कि सोते हुए शेर के मुंह में हिरण अपने आप नहीं आता।

हां एक बात और सुनिए।आप जान लीजिए ये मिशन 100 जिलाशिक्षाधिकारी श्री जितेंद्र गुप्ता जी का सार्थक मिशन है। जो छत्तीसगढ़ प्रदेश के कोरिया जिले के डीईओ है। उन्होंने कार्यभार ग्रहण करने के बाद से ही कोरिया जिले के शैक्षणिक गतिविधियों को स्तरीय किया है और आगे भी उनका मिशन 100 जारी है। इसलिए विद्यार्थियों,उनके परिजनों, विद्यालय के शिक्षकों (सार्थक शिक्षक की बात मैं यहां कर रहा हूं गप्पी,नशेड़ी,समय मिले तो आपस में केवल हा हा हू हू घंटों करने वाले,स्कूल नही जाने वाले,नशा करके स्कूल जाने वाले,गुटका पान खाकर पिच पिच पिचकने वाले,कदाचरण वाले,कई कई दिन छुट्टियां मारने वाले,स्कूल के कार्यों का सही से निर्वहन नहीं करने वाले,कोई भी मौका मिले स्कूल को पार्टी करने का केंद्र बनाने वाले, फुहड़ता वादी और स्कूल में स्वेटर बुनने वाले शिक्षक के लिए ये बातें नही है। जो बाते विद्यार्थियों के लिए है क्षमा करेंगे आप पर पहले लागू होती है क्योंकि आप शिक्षक है।गुरु जब चाणक्य होगा तब ही न शिष्य चंद्रगुप्त बन सकेगा।) प्राचार्यगण और समस्त स्टाफ से अनुरोध है कि कोरिया के डीईओ के मुहिम में योगदान दें। इससे कोरिया नव कीर्तिमान तो स्थापित करेगा ही राज्य और देश तक ये संदेश भी जायेगा।साथ ही विद्यार्थियों में अनंत साहस,धीरज,उत्साह,शक्ति,आत्मविश्वास,ऊर्जा,सकारात्मकता, ओज, तेज, बल,बौद्धिक गुणों का विकास होगा और ऐसा ही विद्यार्थी राज्य और राष्ट्र के लिए महान कार्य कर जाएगा।

शेष शुभ

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सदैव आपका
संवर्त कुमार ‘रूप’
वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी साहित्यकार
03 पुस्तकें प्रकाशित अन्य प्रकाशनाधीन। राज्य एवम राष्ट्र स्तर पर पुरुस्कार और सम्मान प्राप्त।
सम्पादक दैनिक सम्यक क्रान्ति सूरजपुर संस्करण ।
केंद्रीय उपाध्यक्ष जनहित संघ अंतर्गत पण्डो विकास समिति,
महासचिव प्रेस क्लब कोरिया,
संस्थापक : रुद्र प्रोडक्शन एंड इंटरटेनमेंट हाउस बैकुंठपुर।
संपर्क : 8462037009

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