नौनिहालों का आधारकार्ड ही नहीं शिक्षा से हुए वंचित परिजनों को बच्चों के भविष्य की चिंता प्रशासन से लगाई गुहार
बनेगा आधारकार्ड, कोई नही रहेगा शिक्षा से वंचित: कलेक्टर

सतीश मिश्रा
एमसीबी/ बरेल –मंटोलिया एमसीबी/मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले मे कई ऐसे बच्चे है जो पढ़ना तो चाहते है लेकिन आधार कार्ड ना रहने के कारण स्कूल से शिक्षक भगा देते हैं।राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पण्डो जनजाति के साथ अन्य आदिवासीयों का यही हाल है।इनके लिए शासन स्तर पर कई योजना चलाई जा रही हैं लेकिन यह केवल कागजो तक सीमित रह जाती हैं। जमीनी हकीकत कुछ और ही बया करती है इसका जीता जागता उदाहरण पंडो जनजाती बच्चो का आधार कार्ड न बनना है। ये स्कूलों से भागा दिये जाते हैं और मासूम नौनिहल मायूस हो कर घर चले आते है।

विदित हो कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर तमाम योजनाएं बनाई तो जाती है लेकिन उसकी जमीनी हकीकत क्या होती है इसे भरतपुर जनपद पंचायत के बरेल ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम मंटोलिया में देखकर आसानी से समझा जा सकता है। बड़े बड़े वायदों के बीच आज भी गांव के बच्चे शिक्षा का अलख जगाने के लिये स्कूल में पढ़ने के लिये तरस रहे है।
एमसीबी जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र विकासखंड भरतपुर का एक ऎसा भी ग्रामपंचायत है मुख्यालय भरतपुर विकासखंड से 39 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बरेल के आश्रित ग्राम मंटोलिया में लगभग 15-20 घर की बस्ती है जहां आदिवासी पंडों समाज जिन्हे देश के प्रथम राष्ट्रपति डा राजेंद्र प्रसाद ने गोद लिया और वे राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र कहलाए ऐसे लोग रहते हैं। इन पंडो बस्ती के बच्चे आधार कार्ड नही बनने के कारण स्कूल जाने से वंचित है। शासन के द्वारा शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के दावे तो बहुत किए जाते हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी अनेकों गांव में प्राथमिक शिक्षा की हालत बेहद खराब है।

लोग अपने बच्चों को पढ़ाना तो चाहते हैं लेकिन विद्यालय के ना होने से उनके सपनों को पंख नहीं लगा पा रहे है। शिक्षा एक ऐसी ज्योति है जो मनुष्य के चरित्र का निर्माण करती है। बिना शिक्षा के लोगो का विकास संभव ही नहीं है। इस समय जहां पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में शाला प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है पर एमसीबी जिले के भरतपुर तहसील के बरेल मंटोलिया एवम अन्य कई जगह बच्चों का आधार कार्ड नही होने के कारण स्कूली शिक्षा से वंचित हैं। बच्चों के माता-पिता द्वारा आधार कार्ड बनवाने के लिए तहसील, ग्राम पंचायत के सचिव, सरपंच के चक्कर लगाते थक गये हैं लेकिन आधार कार्ड नहीं बन पाया।कहा जाता है के जन्म प्रमाण पत्र लाओगे तब आधार कार्ड बन जाएगा। हमारे मौलिक अधिकारों में शिक्षा भी शामिल है पर दुर्भाग्य है की इस गांव के बड़े बुजुर्गों ने भी आज तक स्कूल का मुंह तक नहीं देखा है। देश 21वीं सदी में है। इस गांव में स्कूल होने के बाद भी बच्चे स्कूल नहीं जाने के कारण इधर उधर भटकते रहते हैं। परिजनों को बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।
सुनिए क्या कहते है बच्चे:–
पंडो जनजाति की बच्ची
वर्षा से बात करने पर वह बताती है कि मैं जब स्कूल जाती हूं तो गुरुजी लोग भगा देते हैं। कहते हैं की तुम्हारा आधार कार्ड नहीं है, तुमको स्कूल में नहीं बैठाया जायेगा।
क्या कहते है पालक:–
वहीं करमचंद्र पंडो से पूछने पर वह बताता हैं कि मेरा आधार कार्ड नहीं बना है और ना बच्चे का बन रहा है। सचिव को कहते हैं तो वह भी नहीं सुनता है और ना सरपंच सुनता है। जनकपुर कई बार गये तब भी नहीं बना। बच्चे को स्कूल में गुरुजी कहते हैं कि आधार कार्ड लाओगे तो पढ़ो नही तो मत पढ़ो। स्कूल जाने वाले 10-12 बच्चे हैं। कुछ मां-बाप भी हैं जिनके आधार कार्ड नहीं बने हैं। बहुत दिक्कत हो जा रही है आधार कार्ड बनवाने में।
इसी तरह मुन्नीबाई पंडो ग्रामीण महिला ने अपना दुखड़ा बताती है कि बच्ची स्कूल जाती है तो गुरुजी कहते हैं कि वर्षा अपना आधार कार्ड लाई हो। नही लाइ हूं नहीं बन पाया है कहने पर गुरुजी कहते हैं कि तुम जाओ तुम्हारा आधार कार्ड नहीं बन रहा है। हम तुम्हें नही बैठायेगें। अपने घर में बैठो। सचिव के पास जाते हैं तो वो भी नही ध्यान नहीं देता और सरपंच हमारे गांव का है वो भी ध्यान नहीं देता है सचिव ना सरपंच ध्यान देता है बच्चे पढ़ने के लिये परेशान है।
मंटोलिया के सबसे बृद्ध जनहित संघ पण्डो विकास समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी समयलाल पंडो से जब हमारी चर्चा हुई तो उन्होने बताया कि यहां किसी बच्चे का आधार कार्ड नहीं बन पाया है। जाति पंडो है। सरपंच और सचिव नहीं सुनते है। गुरुजी कहते हैं हम नहीं पढ़ाएंगे इनका आधार नहीं है। सब को बता चुके हैं सोचते हैं कि बनेगा की नहीं कोई नही पढ़ते हैं गुरुजी लोग आधार कार्ड ना बनने के कारण भगा देते है जिंदगी बर्बाद हो रही है इन बच्चों की।
अंतमें जब हमने ग्राम पंचायत के सरपंच पति विजय चेरवा से चर्चा की तो विजय चेरवा के द्वारा कहागया कि पुन: आदेश करे सीईओ करें।जिला सीईओ करे।कलेक्टर करे। मैं कहा बनाऊ ?हमारी गलती नहीं है कुछ लड़कों का बन गया कुछ का नहीं बना है। कुछ उपाय लगाना पड़ेगा। इनका जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना है ध्यान नहीं दे रहे तो कहा से बनेगा। एक मेरा भी भाई है उसका भी आधार कार्ड नहीं बना है कई जगह पैसा दे कर आया फिर भी नही बन रहा है। हमारी गलती नहीं है बच्चों के मां पिता की भी कमी है।
विगतदिनों विकासखण्ड भरतपुर में जनसमस्या निवारण शिविर थी उस शिविर में जिले के संवेदनशील कलेक्टर डी. राहुल व्यंकट आये हुए थे जब सम्यक क्रांति द्वारा प्रमुखता से इस विषय में चर्चा की गई तो उनके द्वारा आश्वस्त किया गया कि इसे देखा जाएगा। मैं आधार कार्ड बनेगा,कोई बच्चा शिक्षा से बंचित नहीं रहेगा।
आपको बता दें वनांचल क्षेत्र में आधार कार्ड बनाने के नाम पर आधार सेंटरों के मालिकों द्वारा ग्रामीणों को हजारों का चूना लगा दिया जाता है मनमाना पैसा लेकर बनाते है इसलिए उन्हें कई कई बार घुमाया भी जाता है। यूआईडीएआई आधार अधिनियम 2016 के अनुसार यदि बालक बालिका का आधार कार्ड नही है तो माता पिता के आधार नंबर के आधार पर एक फॉर्म भराया जाता है (एच ओ एफ), परिवार के मुखिया के आधार पर, पहचानकर्ता के आधार पर,परिचयकर्ता के दस्तावेज के आधार पर यथा तहसीलदार,शिक्षक प्रधान सरपंच लेकिन यह होता नही और पैसा मांगा जाता है नही मिलने पर नही बनेगा कहकर ग्रामीणों को सीधे भागा दिया जाता है।
अब देखना है यह है कि कब तक नौनिहाल सरपंच पति के बिना किसी उपाय के पल्ला झाड़ने, गुरुजी आदि के भगाने से बिना आधार के शिक्षा से वंचित रहते है। या जिले के प्रमुख के आश्वासन से उक्त आधार कार्ड बनाने में कर्मी विवेकपूर्ण कार्य करते है।



