
नई दिल्ली/ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए कई बड़े परिवहन प्रकल्पों को भी मंजूरी दी है। मध्य प्रदेश में उज्जैन को दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले बदनावर पेटलावद थांदला तिमरवानी मार्ग को चार लेन में विकसित करने की योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आज कई अहम फैसले लिये गये। मोदी सरकार ने देश के आर्थिक ढांचे, आधारभूत संरचना और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं संबंधी जो निर्णय लिये हैं वह दर्शा रहे हैं कि केवल विकास परियोजनाओं की घोषणा नहीं की जा रही है बल्कि उन्हें विकसित भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य से जोड़ते हुए क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक सशक्तिकरण और राजनीतिक संदेश को भी साधने की कोशिश की जा रही है।
सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में ग्रामीण जल आपूर्ति को लेकर जल जीवन मिशन को वर्ष 2028 तक बढ़ाने और उसके लिए आठ लाख उनहत्तर हजार करोड़ रुपये का विशाल प्रावधान करना शामिल है। इस योजना का उद्देश्य अब केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं बल्कि हर गांव में टिकाऊ जल सेवा व्यवस्था स्थापित करना है। सुजल भारत नामक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा बनाकर हर गांव की जल व्यवस्था को स्रोत से नल तक डिजिटल रूप से भी जोड़ा जायेगा।
हम आपको बता दें कि वर्ष 2019 में देश के केवल 17 प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल का जल पहुंचा था, जबकि अब यह आंकड़ा 81 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। इस विस्तार ने ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव किया है। अध्ययन बताते हैं कि करोड़ों महिलाएं रोज पानी लाने के श्रम से मुक्त हुई हैं और अब वे शिक्षा, रोजगार और अन्य आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर पा रही हैं। स्वास्थ्य पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा है क्योंकि स्वच्छ जल से जल जनित रोगों में कमी आयी है। जल जीवन मिशन 2.0 के माध्यम से सरकार ग्रामीण भारत में चौबीसों घंटे जल आपूर्ति का लक्ष्य तय कर रही है, जो विकसित भारत की आधारभूत आवश्यकता मानी जाती है।
इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए कई बड़े परिवहन प्रकल्पों को भी मंजूरी दी है। मध्य प्रदेश में उज्जैन को दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले बदनावर पेटलावद थांदला तिमरवानी मार्ग को चार लेन में विकसित करने की योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लगभग अस्सी किलोमीटर लम्बे इस गलियारे से यात्रा समय कम होगा और माल ढुलाई सस्ती होगी। आदिवासी बहुल धार और झाबुआ जिलों में यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगी तथा उद्योग केन्द्रों से संपर्क मजबूत करेगी।
इसी प्रकार उत्तर प्रदेश और हरियाणा में जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए हरित क्षेत्रीय संपर्क मार्ग के निर्माण को भी मंजूरी दी गयी है। लगभग 31 किलोमीटर लम्बा यह मार्ग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बहु परिवहन संपर्क को मजबूत करेगा। इसके माध्यम से दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से जेवर हवाई अड्डे तक तेज आवागमन संभव होगा, जिससे क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, रेल क्षेत्र में भी मंत्रिमंडल ने पश्चिम बंगाल और झारखंड के पांच जिलों में दो बहु पटरी परियोजनाओं को मंजूरी दी है। सैंथिया पाकुर और संतरागाछी खड्गपुर मार्गों पर चौथी पटरी बनने से रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और भीड़भाड़ कम होगी। इन परियोजनाओं से लगभग पांच हजार से अधिक गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। साथ ही कोयला, इस्पात, अनाज और अन्य वस्तुओं की ढुलाई तेज और सस्ती होगी। रेल परिवहन के विस्तार से तेल की खपत और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आयेगी, जो पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, दक्षिण भारत में पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने का फैसला भी विशेष महत्व रखता है। मदुरै प्राचीन मंदिरों और तीर्थ यात्राओं का प्रमुख केन्द्र है। अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से विदेशी यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, जिससे पर्यटन उद्योग, होटल व्यवसाय और स्थानीय रोजगार को लाभ होगा।



