अभावों से उठी ‘आयरन लेडी’: महज 14 की उम्र में शादी, 250 रुपये की नौकरी… आज नीलिमा की ‘आर्थिक फौज’ में 1000 महिलाएं जनकपुर की नीलिमा चतुर्वेदी ने ‘कोरिया महिला गृह उद्योग’ के जरिए हजारों महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर/ जनकपुर- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एमसीबी जिले के सुदूर वनांचल जनकपुर से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आती है, जो बताती है कि मजबूत इरादे और संघर्ष की ताकत से किस तरह जीवन की कठिनाइयों को सफलता में बदला जा सकता है। यह कहानी है 56 वर्षीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नीलिमा चतुर्वेदी की, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत संघर्षों को समाज की ताकत बना दिया।

आज उनके नेतृत्व में ‘कोरिया महिला गृह उद्योग’ के माध्यम से करीब 1000 महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और उनके उत्पाद छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली के प्रगति मैदान तक पहचान बना चुके हैं।

जब गुड़ियों से खेलने की उम्र में संभालनी पड़ी गृहस्थी
नीलिमा चतुर्वेदी का जीवन शुरू से ही संघर्षों से भरा रहा। महज 14 वर्ष की उम्र में, जब वह 8वीं कक्षा में पढ़ रही थीं, तब उनका विवाह कर दिया गया। शादी के कुछ समय बाद ही उनके पति गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित हो गए।
दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी और घर में आय का कोई साधन नहीं—ऐसी परिस्थितियों में कई लोगों ने उनके भविष्य को खत्म मान लिया था। लेकिन नीलिमा ने हार नहीं मानी।
अपनी मां की प्रेरणा से उन्होंने पढ़ाई फिर शुरू की और तमाम कठिनाइयों के बावजूद एम.ए. तक की शिक्षा पूरी की।
250 रुपये की नौकरी से शुरू हुआ बदलाव का सफर
साल 1992 में नीलिमा ने 250 रुपये मानदेय पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम शुरू किया।
इसके बाद 2001-02 में उन्होंने क्षेत्र की गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को संगठित करना शुरू किया। शुरुआत में सिर्फ 10 महिलाओं के साथ एक छोटा सा समूह बनाया गया।
शुरुआती दौर आसान नहीं था। समाज के कई लोगों ने उनका विरोध किया और ताने भी दिए। लेकिन नीलिमा ने हार नहीं मानी और लगातार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती रहीं।
900 से अधिक स्व-सहायता समूह, हजारों महिलाओं को रोजगार
आज नीलिमा चतुर्वेदी के प्रयासों से क्षेत्र में 900 से अधिक स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं।
उनके द्वारा संचालित ‘कोरिया महिला गृह उद्योग’ के माध्यम से महिलाएं कई तरह के उत्पाद तैयार कर रही हैं, जैसे—
अचार
पापड़
मसाले
कोसा धागाकरण
इन उत्पादों की मांग अब जिले और राज्य से बाहर भी बढ़ रही है। कई प्रदर्शनियों और मेलों में इन उत्पादों को सराहना मिली है।
‘कोरिया ब्रांड’ से मिली नई पहचान
नीलिमा ने जनकपुर और आसपास की महिलाओं को ‘कोरिया ब्रांड’ के नाम से एक नई पहचान दिलाई है।
उनका प्रयास सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं है। वे समूह से जुड़ी महिलाओं के बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देती हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी बेहतर भविष्य बना सके।
तानों के बीच भी नहीं टूटा हौसला
नीलिमा चतुर्वेदी बताती हैं कि जब उन्होंने यह काम शुरू किया था, तब लोगों ने उन्हें खूब ताने दिए।
“लोग कहते थे कि मैं औरतों को घर से बाहर निकालकर समाज बिगाड़ रही हूं। लेकिन मैंने किसी की बातों पर ध्यान नहीं दिया और चुपचाप काम करती रही। आज वही महिलाएं अपने दम पर घर चला रही हैं और बैंक का काम भी खुद संभालती हैं, यही मेरी सबसे बड़ी सफलता है।”
सिर्फ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नहीं, एक सामाजिक परिवर्तन की मिसाल
नीलिमा चतुर्वेदी आज केवल एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल बन चुकी हैं।
उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो छोटी सी शुरुआत भी हजारों लोगों की जिंदगी बदल सकती है।
जनकपुर की इस ‘आयरन लेडी’ की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को सच करने का साहस रखती हैं।



