छत्तीसगढ़

घघरा स्थित 10 वीं शताब्दी निर्मित मंदिर में जनहित संघ ने लगाया ध्वजा… हर हर महादेव के जयघोष से गूंज उठी हर दिशा

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एस. के.‘रूप’

घघरा जनकपुर(एमसीबी)/ जनास्था का केंद्र सुंदरतम प्राकृतिक नज़ारों के बीच प्रभु श्री राम वन गमन का साक्षी छत्तीसगढ़ प्रदेश के अविभाजित कोरिया जिले का वर्तमान एमसीबी जिले का वनांचल विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत घघरा में 10 वीं शताब्दी निर्मित प्राचीन मंदिर अपनी शिल्पकला,वास्तुकला,और भव्यता के लिए पुरात्व और सांस्कृतिक विशेषता सहित गौरवशाली इतिहास को बयां कर रहा है।

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आपको बता दें विगत 46 वर्षों से निःस्वार्थ जनसेवा की मिसाल कायम करने वाली संस्था जनहित संघ पण्डो विकास समिति के केंद्रीय उपाध्यक्ष संवर्त कुमार रूप, नंदलाल पण्डो केंद्रीय अध्यक्ष पण्डो विकास समिति,जिला प्रमुख सतीश मिश्रा, युवा प्रमुख रामशरण पण्डो,

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सोनसाय पण्डो प्रभारी पण्डो वर्ग कोटाडोल, जितेंद्र बैगा प्रभारी बैगा जनजाति एमसीबी,गणेश तिवारी प्रचार प्रसार सह मीडिया प्रमुख,हनुमान प्रसाद यादव जिला जनजाति विकास प्रमुख एमसीबी द्वारा इसी 10 वीं शताब्दी निर्मित शिव मंदिर में विगत 24 मार्च 2025 को ध्वज पताका फहराया गया।

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उपस्थित ग्रामीणों को प्रसाद का वितरण किया गया।

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हर हर महादेव के जय जय कार से दिशाएं गूंज उठी। इस मौके पर क्षेत्रीय अध्यक्ष घघरा कृष्णदत्त श्यामले, ग्राम अध्यक्ष बृजलाल पण्डो, शोभान पण्डो, सुखसेन पंडो,हीरालाल,तुलसी बाई,सुकवरिया,बेला बाई, अत्तू प्रसाद पण्डो,नीरज,बब्बू,धर्मपाल, पप्पू पण्डो,जगधारी पण्डो,भोला पण्डो,फुलकुंवर,कमलभान यादव,श्याम कली,चंपा पण्डो,गीता पण्डो,हिरमतिया पण्डो,सुमित्रा पंडो,रामभजन बैगा सहित भारी संख्या में जनहित संघ अंतर्गत पण्डो विकास समिति के पदाधिकारी,सदस्यगण एवम ग्रामीण मौजूद रहे।

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जानिए क्या है महत्व आध्यात्म में:–

मंदिर के शीर्ष पर ध्वजा लगाने का प्राथमिक कारण यह बताना है कि मंदिर के भीतर उस विशिष्ट दैवीय शक्ति की उपस्थिति है। मंदिर में लगा झंडा उस मंदिर की पवित्रता की उद्घोषणा करता है। यह केवल भक्तों को यह बताने के बारे में नहीं है कि मंदिर के अंदर भगवान कौन है बल्कि यह उस मंदिर की दिव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा को भी इंगित करता है। झंडे पर रंगों, प्रतीकों का चुनाव अक्सर उस मंदिर में विराजमान देवता के अनुरूप होता है। पूजा करने आने वाले श्रद्धालु जब उस ध्वज को देखते हैं तो उन्हें अपने भीतर विराजमान दैवीय शक्ति का स्मरण हो आता है। उदाहरण के लिए, अर्जुन के रथ पर एक कपिध्वज था जो हनुमान जी की शक्ति और आशीर्वाद का प्रतिनिधित्व करता था।सिर्फ हिंदू धर्म में ही नहीं, बल्कि अन्य बहुत सी संस्कृतियों में भी झंडा फहराना जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। शीर्ष पर स्थित झंडा महज एक सजावटी वस्तु नहीं बल्कि विजय का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि शीर्ष पर ध्वज फहराना उस पवित्र स्थान का प्रतीक है जहां अज्ञानता, अहंकार, ईर्ष्या और इच्छाओं के खिलाफ आध्यात्मिक लड़ाई जीती जाती है। मंदिर की चत पर लहराता झंडा भक्तों के लिए एक प्रतीक के रूप में देखा जाता है कि कैसे पवित्र स्थान और आध्यात्मिक ज्ञान हमेशा विकर्षणों पर विजय प्राप्त करेंगे

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