कीड़ा लगा झिल्ली पड़ा चावल खा रहे नौनिहाल.. “जी चावल घटिया है, सामग्री रखने को समान नहीं है झिल्ली कीड़ा साफ करके खिलाता हूं बच्चों को:– प्राचार्य
वनांचल क्षेत्र में मध्यान भोजन में बच्चों को खिलाया जा रहा है कीड़ा लगा(झिल्ली) वाला चावल

जिम्मेवार बनें मूक दर्शक व्यवस्था न होने का दे रहे हैं हवाला। सरकार के दावे फेल
सतीश मिश्रा
एमसीबी / जिले के वनांचल क्षेत्र विकासखण्ड भरतपुर संकुल केंद्र खमरौध के प्राथमिक शाला में बच्चों को मध्यान्ह भोजन में कीड़ा लगा चावल परोसना का मामला प्रकाश में आया है.

सरकार किसी की हो दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में सभी सरकारी योजनाओं का पतीला निकलता नजर आता है सरकार कुछ भी ढिंढोरा पिट ले लेकिन मैदानी इलाके में हकीकत कुछ और ही बया करती है जब जिम्मेदार ही अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ ले रहे हैं
जबकी शासकीय स्कूलों में ऐसे बच्चे पढ़ने आते हैं जो गरीब य निम्न वर्ग के होते हैं इन बच्चों को गर्म एवम पौस्टिक भोजन उपलब्ध हो ऐसी योजना चलाई जा रही है लेकिन सरकार की सभी योजना सिर्फ कागजों तक सीमित है,ऐसा ही मामला दूरस्थ वनांचल क्षेत्र भरतपुर के प्राथमिक शाला झिमडीपारा में मध्यान्ह भोजन में कीड़ा लगा हुआ चावल खिलाने का प्रकाश में आया है.इस विद्यालय में कुल 25 बच्चों का नाम रजिस्टर में दर्ज हैं.

बताया गया है एवम उपस्थिति 18 बच्चों की बतायी गयी इन 18 बच्चों को कीड़े वाला चावल परोसा गया.
खाना परोसने वली सहायिका को थी इसकी जानकारी
सहायिका को ये जानकारी होने के बाद भी कीड़ा लगा चावल खाना परोसा गया और बच्चों ने खाने से पहले चावल से कीड़ा निकालकर खाया.इससे अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि सुदूर वनांचल इलाकों में मध्यान्ह भोजन की क्या स्थिति होगी. स्कूल में मध्यान भोजन बनाने वाली सहायिका भवनिया यादव ने बताया कि चावल में कीड़ा लग गया है, तो क्या करें? अब वहीं बनाकर खिलाते हैं.
मध्यान भोजन करते समय
बच्चों ने हाथों से निकाला चावल से कीड़ा निकाल कर खाया
शिव दयाल सिंह, प्रधान पाठक ने झिल्ली कीड़ा लगा चावला होने को लेकर गैर जिम्मेदाराना जवाब दिया कि बरसात होने के कारण चावल में झिल्ली आ रही है और कीड़ा भी पड़ गया है. चावल पूरा घटिया है, लेकिन हम इसे रोज बिनवाते हैं और जो सही चावल निकलता है, उसे ही ले लेते हैं।
शाला अनुदान राशि का क्या करते है प्राचार्य??
सवाल उठता है कि शासन द्वारा विद्यालय में 25 विद्यार्थियों में 10000 और 25 विद्यार्थियों से ऊपर 25000 रु शाला अनुदान राशि दी जाती है ताकि विद्यालय गतिविधि कार्य आवश्यक कार्य सुचारू रूप से चल सके। प्रश्न उठता है कि प्राचार्य उस अनुदान राशि का करते क्या है जो बच्चों को कीड़ा लगा चावल खिला रहे हैं और स्वीकार भी करते हैं कि जी हां मैं खिल रहा हूं।
बच्चों ने कीड़ा निकालकर खाया खाना सोचने वाली बात यह है कि बच्चों ने अपने हाथों से चावल से कीड़े निकाले और फिर इसे खाया जो मध्यान्ह भोजन की हकीकत को बयां करता है. शहरी क्षेत्र में स्कूल के शिक्षक खुद मध्यान्ह भोजन का खाना खाते हैं,लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी तस्वीर अक्सर देखने को मिल जाती है. सरकार द्वारा बच्चों को पौष्टिक भोजन मिले,ऐसी योजना चलाई जा रही है, लेकिन कुछ स्कूलों में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.इस मामले ने एक बार फिर से सरकारी स्कूलों की लाचार व्यवस्था को उजागर किया है.कीड़े लगे चावल को बच्चों को परोसकर उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. सरकार को चाहिए कि वह स्कूलों में मध्यान भोजन की व्यवस्था को सुधारने के लिए कदम ठोस कदम उठाए और ये सुनिश्चित करे कि बच्चों को पौष्टिक भोजन मिले।
जब इस समस्या को लेकर इस संकुल केंद्र खमरौध के प्राचार्य मोहन साहू से चर्चा की गई तो उनके द्वारा कहा जारहा की स्कूल का भ्रमण सि.ये.सी.करते हैं उनको इन सब चीजों को देखना चाहिये में जनकपुर कुछ काम से आया हुआ हूँ।
अब देखना होगा कि ऐसे जिम्मेदार एवम मध्यान भोजन चलाने वाले समूह के ऊपर क्या कार्यवाही होती है ? संबंधित प्रशासन को विद्यालय प्रबंधन और समूह दोनो पर जांच बैठाना आवश्यक है ताकि नौनिहाल कीड़ा लगा चावल खाने से बच सके।



