
संवाददाता
कोरिया / अभी कुछ दिनों पहले कोरिया जिले का एक अखबार जो साप्ताहिक अपने को बताता है लेकिन वह त्रैमासिक या छमाही ही नजर में आता है जिसे लेकर अखबार की नियमित / अनियमित मासिक रिपोर्ट जनसम्पर्क विभाग कोरिया से मांगी गई है क्योंकि सूत्रों से पता चला है कि इसकी रिपोर्ट अनियमित रायपुर को भेजी जा रही है।
इस तथाकथित समाचार पत्र का पोर्टल भी है जिसमे विगत दिनों “पत्रकारिता के नाम पर अवैध वसूली फर्जी पत्रकारों की करतूत आई सामने” शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया जिसमे इनके सम्पादक के द्वारा सुरजपुर के एक दैनिक समाचार पत्र के संपादक जो कि आर एन आई से रजिस्टर्ड है उनका भी फोटो दुर्भावनावश छाप दिया उन्हें भी फर्जी पत्रकारों की लिस्ट में जोड़ने का कुत्सित कार्य किया जबकि वह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय नई दिल्ली से रजिस्टर्ड संपादक है बावजूद इसके उस तथाकथित पोर्टल के संपादक ने ऐसा गलत समाचार प्रकाशित किया है। पोर्टल में प्रकाशित समाचार में उस फोटो का कोई मतलब नहीं बनता है। क्या जानबूझकर या ऐसा किया गया या संपादक को मोतियाबिंद हो गया है कि उन्हें अपने अलावा कोई और संपादक नजर ही नहीं आता है। कोरिया जिले के पत्रकारों में इस खबर को लेकर रोष देखा गया है।
विरोध हुआ तो फ़ोटो को किया डिलीट
इस समाचार को लेकर जब पत्रकारों ने विरोध किया एवं स्थानीय सर्किट हाउस में बैठक की ठीक उसी दिन पोर्टल के संपादक ने अपने इस समाचार से फोटो को डिलीट कर दिया है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी जनता जनार्दन के बीच उक्त समाचार प्रसारित हो चुका था जिससे कई पत्रकारों की मानहानि हुई है।
प्रकाशित समाचार में फोटो से कोई संबंध नहीं ऐसे में होती है कानूनी कार्रवाई –
भारतीय कानून में ऐसे कई प्रावधान है जब पत्रकारों को खबरों के चयन को लेकर बहुत संवेदनशीलता बरतनी होती है यदि त्रुटिवश कोई समाचार प्रकाशित हो गया तब इसका खंडन भी छापने का नियम है लेकिन इस मामले में अभी तक तथाकथित समाचार पत्र के पोर्टल की ओर से किसी भी प्रकार का खंडन उक्त फोटो को लेकर जारी नही किया गया है।
बहरहाल कोरिया एवं सरगुजा संभाग के कई पत्रकारों को एकजुट होकर भ्रामक खबरों के विरोध में प्रकाशन एवं उचित कानूनी कार्यवाही करने की जरूरत है।



