संतोषी की कूची से संवर रही गणपति की मूर्ति
बिहान से मिली ताकत, परंपरागत मूर्तिकार परिवार को नई पहचान

कोरिया/ बैकुंठपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत कटोरा की ज्वाला महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी श्रीमती संतोषी प्रजापति ने अपने परंपरागत मूर्ति निर्माण कार्य को व्यवसायिक रूप देकर नई राह बनाई है। बिहान मिशन के सहयोग से लिए गए एक लाख रुपए के ऋण ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया।

पति से विरासत में मिले मूर्तिकार कला में संतोषी ने अपनी कूची और रंगों का हुनर जोड़कर कृष्ण, गणेश और दुर्गा की प्रतिमाओं को और आकर्षक रूप देना शुरू किया। बारहवीं तक पढ़ाई की तीन बच्चों की माँ संतोषी की मेहनत से उनके परिवार को प्रतिमाह 20 से 25 हजार की आमदनी होने लगी। साथ ही उन्होंने एक छोटी किराना दुकान भी शुरू की, जिससे 6 से 7 हजार रुपये मासिक अतिरिक्त लाभ मिलने लगा।
त्योहारों के मौसम में संतोषी और उनका परिवार मूर्ति निर्माण से 2 से 3 लाख रुपये की आमदनी की उम्मीद कर रहे हैं। पारंपरिक पेशे को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने वाली संतोषी अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ने वाली संतोषी आज अपने गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा और मिसाल बन गई है।



