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रामानुज महाविद्यालय में स्थापना दिवस एवं शिक्षक दिवस धूमधाम से मनाया गया

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बैकुण्ठपुर/ शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैकुण्ठपुर के सभाकक्ष में प्राचार्य डॉ0 एम.सी.हिमधर के संरक्षण एवं मार्गदर्शन और कार्यक्रम अधिकारी द्वय श्रीमती जयश्री प्रजापति एवं श्री अनुरंजन कुजूर के सह संयोजन में महाविद्यालय का 44 वां स्थापना दिवस एवं वरिष्ठ स्वयं सेवक कृष्णा राजवाड़े एवं तनुप्रिया यादव के नेतृत्व में शिक्षक दिवस समारोह का गरिमामयी आयोजन किया गया।

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श्री लक्ष्मण साहू, सेवानिवृत्त व्याख्याता के मुख्य आतिथ्य, श्री मनोज राय एवं श्रीमती ऊषा राय सेवानिवृत्त व्याख्याता के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य ने किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मॉं सरस्वती एवं भारत रत्न सर्वपल्ली डॉ0 एस0 राधाकृष्णन जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर अतिथियों के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के प्रथम चरण में अतिथियों के स्वागत उपरांत स्वागत एवं गुरू वन्दना की प्रस्तुति तनुप्रिया ने दी।

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स्वागत उद्बोधन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 एम.सी.हिमधर ने दिया और महाविद्यालय की स्थापना 05 सितम्बर 1982 से लेकर अब तक के महाविद्यालय के विकास एवं उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया कि यह महाविद्यालय पहले एक कच्चे मिट्टी के छप्पर वाले भवन में बहुत ही सीमित संसाधनों के साथ प्रारम्भ हुआ, जो आज लगातार अधेसरंचना विकास के साथ कला, वाणिज्य एवं विज्ञान में स्नातक तथा 10 विषयों में स्नातकोत्तर की अध्यापन कराने वाले जिले का अग्रणी महाविद्यालय है। जहां लगभग 2000 से अधिक नियमित विद्यार्थी अध्ययनरत है एवं 3500 परीक्षार्थी स्वाध्यायी रूप से शामिल होते है। नैक मूल्यांकन द्वारा इस महाविद्यालय को बी ग्रेड प्राप्त हुआ है। इस महाविद्यालय से पढ़कर निकले विद्यार्थी आज विभिन्न पदों एवं विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर अपने साथ – साथ इस कॉलेज का नाम भी रोशन कर रहे है। तदुपरांत प्राचार्य एवं महाविद्यालय परिवार के द्वारा आमंत्रित तीनों सेवानिवृत्त शिक्षकों का शाल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया। उद्बोधन के क्रम विशिष्ट अतिथि मनोज राय ने कहा कि- शिक्षकों के सम्मान के लिए यह दिन महत्वपूर्ण है महाविद्यालय व्यक्तित्व के सवारने का दिन होता है। अतः लक्ष्य साध कर आगे बढ़ें और अपने व्यक्तित्व को निखारें। उन्होनें अपने जीवन के विभिन्न चुनौतियों से अवगत कराया। श्रीमती ऊषा राय ने कहा कि जहां मेरा जन्म हुआ वहीं मेरी जीवन की सम्पूर्ण शैक्षणिक यात्रा भी पूर्ण हुआ। जिस स्कुल में विद्यार्थी थी वहीं व्याख्याता बनकर सेवानिवृत्त भी हुई। विद्यार्थियों को अच्छे कर्म करने और जीवन में अनुशासित रहकर सकारात्मक सोंच के साथ आगे बढ़ने को प्रेरित किया। मुख्य अतिथि श्री लक्ष्मण साहू ने कहा कि शिक्षक कुम्हार की तरह विद्यार्थियों को आकार देने वाला व्यक्ति होता है। जो उसे ज्ञान देने के साथ-साथ जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार भी करता है। उन्होंने पीड़ा व्यक्त किया और कहा कि वर्तमान समय के विद्यार्थी माता-पिता के पैसों का सदुपयोग नहीं कर रहे हैंं। उन्होंने हमेशा माता-पिता एवं गुरूओं का आदर करने के लिए प्रेरित किया। प्रथम चरण का संचालन डॉ. बृजेश कुमार पाण्डेय ने और आभार प्रदर्शन कार्यक्रम अधिकारी प्रो. अनुरंजन कुजूर ने किया। द्वितीय चरण में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने शिक्षक दिवस मनाते हुए अपने प्राचार्य एवं शिक्षकों का रोली चंदन लगाकर एवं उपहार भेंटकर सभी का सम्मान किया। शिक्षकों के सम्मान में तनिषा एवं ग्रुप के द्वारा करमा, अर्पणा एवं ग्रुप, साक्षी एवं ग्रुप के द्वारा साऊथ इण्डियन नृत्य, संध्या एवं ग्रुप के द्वारा देशभक्ति नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति दी गई। तदुपरांत प्राध्यापक डॉ0 श्रीमती प्रीति गुप्ता, डॉ0 गौरव मिश्र, श्री भूपेन्द्र सिंह, श्री अनुरंजन कुजूर, डॉ0 श्रीमती अर्चना पाण्डेय, श्रीमती अर्चना द्विवेदी, डॉ0 संदीप सिंह, श्री कुलदीप ओझा, डॉ. राम यश पाल, श्रीमती कंचन जायसवाल, श्री इम्तियाज अली, श्री पुष्पराज सिंह, श्री योगेश्वर साय, डॉ. सचिन सिंह, कु. आंशी पाटले, श्रीमती सपना जायसवाल ने अपने विचार रखे एवं विद्यार्थियों को अध्यापन एवं बेहतर कैरियर के लिए मार्गदर्शन दिया। द्वितीय चरण के कार्यक्रम का संचालन कृष्णा राजवाड़े ने किया एवं आभार प्रदर्शन तौफिक खान के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कार्यालयीन स्टॉफ, छात्र/ छात्राओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यक्रम सहायक मुख्य लिपिक मो0 आरीफ ढेबर, राजकुमार राजवाड़े, कृष्णा राजवाड़े, तौफिक खान, धनेश्वर, सुनील, निखिल, अंकित, शशि पोर्ते, लव, नीरज, अर्पणा, मुस्कान, खुशबू, सुप्रिया, तनिशा, ललिता, प्रियंका, चांदनी, संजय, संतोष, राम प्रसाद, पवन, चंद्रिका, अयुब्ब लकड़ा का सराहनीय योगदान रहा। इस अवसर पर वरिष्ठ छात्र टकेश्वर राजवाड़े शिवम सागर भी उपस्थित रहे।

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