राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस (डॉक्टर्स डे)1 जुलाई पर विशेष : आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति ही नहीं एक स्वस्थ जीवन शैली भी है- डॉ पूर्णिमा

मनेद्रगढ़’/ आयुर्वेद को 1976 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मान्यता दी थी ।आयुर्वेद बीमारियों के मूल कारणों का अनुसंधान करके उसका जड़ से इलाज करता है। यह स्वस्थ जीवन शैली, आहार, योग ,ध्यान के साथ जीवन जीने में मदद करता है।

आयुर्वेद सिर्फ एक चिकित्सा पद्धति नहीं एक जीवन शैली भी है-उक्ताशय के विचार आयुष विभाग की आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ पूर्णिमा सिंह राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस (डॉक्टर्स डे)पर व्यक्त कर रही थी। डॉक्टरों और चिकित्सकों की स्वास्थ्य सेवा में उनके विशिष्ट योगदान , समर्पण एवं उनके प्रयासों को समाजिक मान्यता देने के लिए 1 जुलाई को भारत में राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस मनाया जाता है। स्टेट मॉडल इंस्टिट्यूट धन्वंतरी आयुर्वैदिक कॉलेज में अपनी सेवा दे चुकी डॉ पूर्णिमा आयुर्वेदिक पंचकर्म की विशेषज्ञ एवं ह्यूमन साइकोलॉजी मे पीएचडी हैं । उनका कहना है अब आयुर्वेद की ओर लोगों की चेतना जागृत हुई है इसीलिए अब आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति और इसकी दवोओ से कोई भी अनजान नहीं है।रोग चाहे कोई भी हो परंतु मुख्य कारण जीवन शैली एवं खान-पान की आदतें प्रमुख है खाने की आदतों, एवं दिनचर्या में परिवर्तन करके गंभीर बीमारियों पर भी नियंत्रण किया जा सकता है। उनका कहना है कि आयुर्वेद में स्वास्थ्य को बनाए रखने के मुख्य तीन उपाय हैं आहार, नींद और जीवन शैली। आयुर्वेद भोजन को औषधि मानता है अपने पाचन शक्ति और शरीर की संरचना के अनुसार स्वाद युक्त स्वस्थ आहार ही लेना चाहिए -। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आयुष विभाग में आयुर्वेद के सफल उपचार एवं अच्छे परिणाम के कारण निरंतर मरीजों को आशातीत लाभ हो रहा है। भारत के ग्रामीण जनमानस पर जड़ी बूटियां के उपयोग के संबंध में उनका कहना है कि -औषधीय पौधों की जानकारी वैदिक काल से ही परंपरागत रूप से चली आ रही है, आज भारत की इस सहज, सरल , कम खर्चीली जनकल्याणकारी पद्धति को जन जन तक प्रचारित करने की आवश्यकता है। मनेद्रगढ़ एवं एमसीबी जिले के गांवों की जलवायु विभिन्न प्रकार के औषधि जड़ी बूटी जड़ी बूटियां के अनुकूल है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में डॉ पूर्णिमा ने कहा कि- छत्तीसगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश में जड़ी बूटियों की पर्याप्त खेती की जा सकती है। सर्पगंधा ,शंखपुष्पी ब्राह्मी, इसबगोल चिड़चिड़ी, भूमि आंवला ,पुनर्नवा, पारिजात ,अपराजिता, हरण ,बहेड़ा ,आंवला, नीम, दालचीनी ,तेज पत्ता आदि विशिष्ट आयुर्वेदिक औषधियां के गुण धर्म की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि आज चीन, अमेरिका इटली, रूस, फ्रांस ब्रिटेन जैसे तमाम विकसित देशों में आयुर्वेदिक दवाइयां का बड़ा कारोबार है। कोरोना कल के आपदा के समय आयुर्वेद को अस्त्र बताते हुए उन्होंने कहा आयुर्वेदिक दवाइयां से जहां इम्यूनिटी मजबूत होती है वही बीमारियों का जड़ से इलाज संभव है। इन जड़ी बूटियों से किसी प्रकार के दुष्परिणाम नहीं होते, पैसे कम खर्च होते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ पूर्णिमा के आयुर्वेदिक इलाज से बेहतर जीवन जीने वाले शीतल प्रसाद गुप्ता जैसे कई मरीज हड्डियों के विभिन्न बीमारियों से ग्रसित थे आज दर्जनों मरीज उनके इलाज से बेहतर महसूस कर रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आयुष विभाग में आज डॉ पूर्णिमा के निर्देशन में सीनियर सिटीजन निशक्तजनों के लिए प्रत्येक गुरुवार को प्राथमिकता से इलाज किया जाता है । अपनी चिकित्सा को ईश्वर की सेवा का दर्जा देने वाली डॉ पूर्णिमा वृद्धाश्रम, चलने फिरने में असमर्थ, वृद्ध, बुजुर्ग मरीजों के लिए विशेष सेवा देने का संकल्प के साथ अपने चिकित्सीय पेशा में पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य कर रही हैं, यही कारण है कि आज आयुर्वेदिक विभाग में मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। बी एच यू से योग एवं नेचुरोपैथी में पोस्ट ग्रेजुएट आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ पूर्णिमा बालोद में भी अपनी उत्कृष्ट सेवा दे चुकी हैं। आज आयुर्वेद की पंचकर्म विद्या के माध्यम से मरीज के शरीर से विजातीय तत्वों को बाहर निकालने में एवं बीमारियों के मूल कारण पता लगाने मैं महारथ हासिल है। उनका कहना है कि मैं अपने जिन गुरुओं से आयुर्वेद की शिक्षा ली और जो अनुभवी चिकित्सकों ने मुझे आयुर्वेदिक चिकित्सा करने के लिए प्रेरित किया उन गुरुओं के विश्वास और श्रद्धा को बरकरार रखते हुए मैं शुद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सा कर रही हूं। मनेद्रगढ़ शहर के अपने सेवा काल का अनुभव बताते हुए डॉ पूर्णिमा ने बताया कि जिन मरीजों को बड़े-बड़े शहर के बड़े अस्पताल ने बोल दिया था कि घर ले जाओ ज्यादा वक्त नहीं है वही रोगी आयुर्वेद पर भरोसा कर आज स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। महिलाओं को गर्भाशय से जुड़ी अनेक विकेट समस्याएं थीं जिनको गर्भाशय निकालने की सलाह दी गई थी वह आयुर्वेद चिकित्सा से स्वस्थ जीवन जी रही हैं ।कई कैंसर पीड़ित महिलाएं है जिनको कीमो और रेडिएशन के डर लगता था वह आयुर्वेद के शरण में आकर 10 वर्षों से ऊपर आज स्वस्थ जीवन जी रही हैं। डॉ पूर्णिमा के निर्देशन में आज आयुर्वेद विभाग में योग, मालिश, पंचकर्म और आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार कराने वाले असाध्य रोगियों के चेहरे में मुस्कान दिख रही है। यही कारण है कि मनेद्रगढ़ एवं आसपास के अंचलों से बड़ी संख्या में मरीज ,आकर आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति पर भरोसा कर रहे हैं एवं लाभान्वित हो रहे हैं।



