कोरिया

सदियों तक वही गीत जीवित रहते है जो लिखे नही जाते बल्कि जो दिल से निकलते है: जितेन्द्र सिंह सोढ़ी

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कोरिया/ कविता केवल मनोरंजन का साधन नही है ये तो क्रांति है सदियों तक वही गीत जीवित रहते है जो केवल लिखे नही जाते बल्कि जो दिल से निकलते है कोरिया जिले में साहित्य और इसके शिल्पकारों की कोई कमी नही रही है उक्ताशय के विचार साहित्यिक सामाजिक संस्था कोरिया रचना साहित्य मंच के महिला सम्मान समारोह एवम होली मिलन मासिक काव्य गोष्ठी के अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार जितेंद्र सिंह सोढ़ी ने व्यक्त किए उन्होंने आगे कहा कि सर्विस के सत्तर के दशक में बैकुंठपुर में रहा यह शहर और यहां के लोग स्नेही है।

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यहीं हमने सन सत्तर के जमाने में श्री गिरीश पंकज और श्री रूद्र प्रसाद रूप जी के साथ मिलकर संबोधन साहित्य का गठन किया था जो आज भी एमसीबी में उन्नति क्रम है।

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कार्यक्रम में हुए काव्यपाठ से भाव विभोर हुए श्री सोढ़ी ने युवा कवियों सहित शहर के गजलकारों की जमकर तारीफ की। कार्यक्रम में भूतपूर्व सैनिक पत्नी एवं परिवार को शाल श्रीफल स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

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इसके साथ ही समाज के लिए और परिवार के लिए दायित्व निभाने वाली मातृशक्तियो का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में भव्य काव्य गोष्ठी हुई,कई युवा साहित्यकारों ने अद्भुत काव्यपाठ करके उपस्थित जन समूह का दिल जीत लिया।कार्यक्रम का सफल संचालन ताहिर आज़मी ने किया।

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इनका हुआ सम्मान :–

भारतीय सेना में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों के परिजनों में सुखमन देवी, विनीता रामावत,फुलेश्वरी देवी, सुरजा बाई पांडेय, आदिवासी वर्ग उत्थान जनसेवा के लिए जनहित संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुखमंती सिंह, कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण वरिष्ठ साहित्य कार जितेंद्र सिंह सोढ़ी को दैनिक सम्यक क्रांति अखबार समूह एवम कोरिया रचना साहित्य मंच द्वारा शाल,श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। मातृशक्ति के क्रम में लीना धुरिया,अनिता चौहान,मनजीत कौर, संध्या रामावत,श्वेता मिश्रा,तारा पांडेय मुक्तांशा एवम अलीशा शेख को शाल श्रीफल स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में भोला प्रसाद मिश्रा, गीता प्रसाद नेमा, इंद्रा मिश्रा,नेसार नाज़,राजेंद्र सिंह दद्दा,शैलेंद्र श्रीवास्तव,पद्मनाभ मिश्रा, संवर्त कुमार ‘रूप’,विजय सोनी,शारदा गुप्ता विद्रूप सहित साहित्यकार कविगण मौजूद रहे।

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