आज भी जनमानस के हृदय पटल पर जीवंत है श्री रुद्र प्रसाद ‘रूप’ पंद्रहवीं पुण्य तिथि पर कोटि कोटि प्रणाम!
आपके विचार, आपके कर्म, आपके पदचिन्ह सभी के लिए प्रेरणादायी व ऊर्जास्रोत हैं

एस.के.‘रूप’
श्री रूप बचपन से ही मेधावी प्रवृत्ति के धनी थे अपने से बड़ों का आज्ञापालन, कर्तव्यनिष्ठा एवं समाजसेवा के गुण मौजूद रहे। श्री रूप ने कोरिया सरगुजा से प्रारंभिक एवं चिरमिरी बिलासपुर राजधानी रायपुर जबलपुर से उच्चशिक्षा प्राप्त की तत्पश्चात उन्होंने सर्वप्रथम अविभाजित सरगुजा जिले के शासकीय विभागों में अपनी सेवा दी आगे वे शिक्षा विभाग के साथ जुड़ गए।
कोरिया को जिला बनाने के लिए अपने अखबार में निरंतर प्रकाशन…

शिक्षक के रूप में 60 के दशक में सेवाएं दी 70 के दशक में बिलासपुर संभाग में शिक्षा विभाग के उच्च पद पर आसीन रहे ।
स्वतंत्र विचारधारा के पोषक क्रांतिकारी बदलावकारी,जनहित कारी,सोच के धनी श्री रूप ने स्वतंत्र अभिव्यक्ति जनसेवा मानवता के सही आयाम स्थापित करने के उद्देश्य से सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।
जनहित संघ की रैली का एक दृश्य साक्षरता चौक बैकुंठपुर वर्तमान कुमार चौक

70 के ही दशक में अविभाजित सरगुजा में प्रथम पाक्षिक सम्यक संपर्क समाचार संस्थान नागरिक प्रिंटिंग प्रेस डाला।
समाचार कवि हृदय के व्यक्तित्व सफल साहित्यकार तर्कशील आध्यात्मिक ज्ञान से पूर्ण परम ओजस्वी श्री रूप जी ने कोरिया के साहित्य पृष्ठभूमि पर बड़ा योगदान भी दिया।
साहित्य में कॉलेज के समय से ही सक्रिय रहे श्री रूप को राष्ट्रीय गौरव अलंकरण,काव्य विभूषण,साहित्य भूषण जैसे सम्मान प्राप्त हो चुके थे उनका काव्य ‘क्या कह दूं, कैसे कह दूं, जन मानस के बीच खासा लोकप्रिय रहा।
श्री रूप जी के काव्य का आकाशवाणी से निरंतर प्रसारण होता रहा है रेडियो में उनकी रचना धर्मिता के साथ जनसेवा के कार्यों पर साक्षात्कार भी हुए है।
उन्होंने समाचार पत्र सम्यक संपर्क का संपादन किया और कोरिया का गौरव राष्ट्रीय पटल पर ला दिया।
वे साहित्यिक संस्थाओं के प्रमुख रहे व नव कविगण लेखकों को आगे बढ़ाया साथ ही उन्हें साहित्य की बारीकियां सिखाई लेखन के तरीके बताए। अंचल के पहले पाक्षिक सम्यक संपर्क में सभी लेखकों के आलेख, कविताओं आदि को स्थान देते रहे।
संबोधन साहित्य एवं कला परिषद मनेंद्रगढ़ के गठन से लेकर स्थापित होने तक सक्रिय रहे।
श्री रूप ने उमंग नाट्य संघ बनाया और क्षेत्र के प्रतिभाओं को नाट्य मंचन से निखारा।
श्री रूप दुर्गा पूजा,गणेश उत्सव,रावण दहन ,होलिका दहन, बसंत उत्सव, फाग,कुश्ती दंगल जैसे आयोजनों के लिए सदैव अग्रणी रहा करते थे और समाज के साथ जुड़कर युवाओं को शुभअवसर उपलब्ध करवाते थे स्वस्थ मनोरंजन के कार्यवाहक रहे।
श्री रूप ने 70 के दशक में अत्यंत पिछड़ी जनजाति पण्डो वर्ग के उत्थान के लिए पण्डो विकास समिति बनाई जिसमें उनके जीवन स्तर में सुधार भी हुआ और कई गांव बसाया। वन अधिकार, राजस्व अधिकार प्रकरणों का निराकरण मूलभूत सुविधाएं दिलाई।
पण्डो जनजाति के साथ-साथ बैगा,अगरिया, बालंद, गोंड,हरिजन, कवंर, चेरवा भाई बंधु एवं अन्य सभी वर्ग के लोगों के लिए उनके हक अधिकार की लड़ाई लड़ते रहे।
श्री रूद्र प्रसाद रूप जी ने जनहित संघ बनाया जनहित संघ ने जैसा नाम वैसा काम किया इसमें सभी वर्ग के लोग समाहित रहे और सबके हितार्थ जनहित किया। वर्तमान में संघ उनके पुत्रों के द्वारा सक्रिय है।
‘अभियान’ नामक पत्रिका जिसे संभाग के प्रमुख परिवर्तनकारी प्रथम अखबार का दर्जा प्राप्त था जिसका संपादन प्रकाशन श्री त्रिपुरारी पांडेय घुघरा एवं श्री रूद्र प्रसाद रूप ने किया था।
उनके द्वारा शहर वह आसपास के युवाओं के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक, व्यवहारिक ज्ञान के लिए 80 के दशक से कई वर्षों तक प्रभात कालीन प्रभात फेरी निकाली जाती थी एवं शाखा का संचालन करके युवाओं का संपूर्ण विकास किया गया।
श्री रूद्र प्रसाद ‘रूप’ अविभाजित मध्यप्रदेश के श्रमजीवी पत्रकार संघ के सरगुजा संभाग के मुखिया रहे जो अब छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ हो गया है।
श्री रूप जिला कोरिया पत्रकार संघ के संस्थापक /अध्यक्ष रहकर पत्रकार हित में निरंतर कार्य करते थे उनके लिखने का तरीका उनके शैली को अपनाकर बहुत से कलमकारों ने अपना जीवन स्वर्णमय कर लिया।
श्री रूप के अखबार सम्यक संपर्क में एक कॉलम का लोगों को सदैव इंतजार रहता था और बड़े उत्सुकता से जनता पढ़ा करती थी वह रहा –‘क्यों भाई चाचा? हां भतीजा !
श्री रूप ने अपने प्रेस संस्थान में शासकीय पॉलीटेक्निक द्वारा संबंधता व मान्यता पर प्रशिक्षण देने का कार्य किया ।इसमें छपाई संबंधी वैवाहिक कार्ड, विजिटिंग कार्ड,बुक बाइंडिंग, पंपलेट, पोस्टर, बैनर, नंबरिंग, परफ्रेटिंग आदि ट्रेडल मशीन के दौर में सिखाए गए इस समय सरगुजा अंचल के लिए यह नवीनतम उद्योग हुआ।
श्री रूप ने रेडियो एवं टीवी इलेक्ट्रानिक प्रशिक्षण इसी बैनर के तले दिया जिसने क्षेत्र के युवाओं का भविष्य संवारा कई लाभान्वित हुए आज अपना व्यवसाय चला रहे हैं।
श्री रूद्र प्रसाद ‘रूप’ कृषि में रसायनों के प्रयोग के विरोधी रहे वे गोबर की देशी खाद,हरी खाद, राख आदि के प्रयोग से रासायनिक जहर रहित खेती के लिए सभी को प्रेरित किया करते थे।
श्री रूप नशे के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से लोगों को समझकर नशा उन्मूलन के लिए कार्य करते थे।
60 के दशक में श्री रूप ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई जैसे अस्पृश्यता, छुआछूत,भेदभाव, रंग भेद जातिगत दुर्भावना, टोनही प्रताड़ना, महिला प्रताड़ना, सती प्रथा, बाल विवाह, कालाबाजारी जमाखोरी आदि के खिलाफ खड़े रहना अपना कर्तव्य समझते थे। और लोग स्वत: उनके मिशन में उनके साथ जुड़कर बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाया करते थे।
श्री रूप ने कोरिया को जिला बनाने के लिए संघर्ष किया उनके द्वारा सभाएं रैली जुलूस निकालकर प्रशासन के सामने तर्कसंगत मांग रखी गई।
उन्होंने अपने अखबार सम्यक संपर्क में अनवरत एक कॉलम जनक्रांति/ जनआंदोलन छापा जिसमें शहर के प्रबुद्ध वर्ग गणमान्य जनता, जनहित संघ पण्डो विकास समिति के पदाधिकारी कार्यकर्तागण,वकील व्यापारीगण सभी एक स्वर में श्री रूप जी के सहयोगात्मक रहे।
सम्यक संपर्क अखबार में शीर्षक ‘पश्चिमी सरगुजा को कोरिया इंगित कर बैकुंठपुर को जिला मुख्यालय घोषित कीजिए’ के द्वारा निरंतर मध्यप्रदेश शासन मुख्यमंत्री श्री धर्मेंद्र पटवा से लेकर श्री दिग्विजय सिंह तक समाचार पत्र द्वारा पत्राचार करते रहे एवं देश के माननीय राष्ट्रपति प्रधानमंत्री तक उक्त बिंदु प्रेषित करते रहे।
दिल्ली सांसद तत्कालीन रमेश सिंह बैस ने श्री रूद्र प्रसाद रूप की प्रसंशा में कहा था –‘वर्तमान समय में श्री रूद्र प्रसाद रूप के नेतृत्व में जनहित संघ पण्डो विकास समिति ने आदिवासी जनजाति उत्थान से लेकर हर वर्ग के हितार्थ कार्य किया है जो एक इतिहास बनेगा।
श्री रूद्र प्रसाद रूप ही सत्तर के दशक में ऐसे प्रथम संपादक रहे जो गांधी परिवार द्वारा भी सम्मानित हो चुके थे । उस दौरान जिले के सोनहत विकासखंड के कटघोड़ी ग्राम में श्री राजीव गांधी के कार्यक्रम में श्री रूप ने मुखिया के तौर पर पत्रकार जगत का प्रतिनिधित्व किया था।
महान फिल्मकार और सीरियल निर्माता निर्देशक बी.आर.चोपड़ा के महाभारत में भगवान श्री कृष्ण का जीवंत किरदार निभाने वाले श्री नितीश भारद्वाज ने श्री रूद्र प्रसाद रूप जी के बौद्धिकता, तर्कपूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान की प्रशंसा स्थानीय विश्राम गृह भवन में 90 के दशक में बैकुंठपुर दौरे के दौरान की थी। इस समय श्री रूप के कनिष्ठ पुत्र एस. के.‘रूप ’को नितीश भारद्वाज ने गोद में बिठाकर गीता का ज्ञान साझा किया था ।
युगदृष्टा श्री रूद्र प्रसाद रूप जी की समृति में ‘स्व.रुद्र प्रसाद ‘रूप’ स्मृति साहित्य,सांस्कृतिक,सामाजिक एवं पत्रकारिता सम्मान’ का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन विगत वर्षों सफलता पूर्वक आहूत किया गया है जिसमे सुदूर वनांचल ग्राम से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाओं को मंच मिला और सम्मानित हुए है।
श्री रूद्र प्रसाद रूप जी पर 03 पुस्तकों का प्रकाशन हो रहा है जो अबाल वृद्ध,युवा वर्ग,महिलावर्ग सभी के लिए प्रेरणादायी व जीवनोपयोगी सिद्ध होगी।
श्री रूद्र प्रसाद रूप जी का संपूर्ण जीवन विशालकाय अध्याय है यहां पर केवल संक्षेप में कुछ बिंदुओं का उल्लेख किया गया है ताकि युवा पीढ़ी को यह ज्ञात रहे की कोरिया की धरा पर श्री रूद्र प्रसाद ‘रूप’ जी सरीखे महापुरुषों ने जन्म लिया है जिनका संपूर्ण जीवन कर्मण्येवाधिकाररस्ते मां फलेशु कदाचन व परहित सरिस धर्म नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमायी के सूत्र पर चला। जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में लेखनी से क्रांति की, जनसेवा के मिसाल बने, जो बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी, कुशलवक्ता, प्रखर लेखक, स्वतंत्र कलम के मालिक, शोषित, पीड़ित, दलित वर्ग की मुखर आवाज,भ्रष्टाचार के विरोधी,न्याय के प्रणेता रहेl यह राष्ट्र राज्य से लेकर सरगुजा कोरिया अंचल के कई व्यक्तित्व को ज्ञात है जो कोरिया के पृष्ठभूमि को 60 के दशक से समझते है। उन्हे भी जिन्होंने अपने बड़ों से सुना जाना है। श्री रूद्र प्रसाद ‘रूप’ द्वारा स्थापित सम्यक संपर्क पाक्षिक आज दैनिक सम्यक क्रांति के रूप में उन्नतिक्रम है जिसके तीन संस्करण भी हैं।



