किसानों का प्रदर्शन : वनांचल भरतपुर के सिंगरौली में खाद बीज की कालाबाजारी,जमकर हुआ हंगामा
2 बोरी खाद के लिए तरस रहे ग्रामीण,जांच में 90 बोरी इफ्को कम और प्रबंधक ने 3 किसानों को 90 बोरी खाद देना किया स्वीकार
सतीश मिश्रा
भरतपुर/ मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में स्थित सिंगरौली आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में उस समय हंगामा मच गया, जब सैकड़ों किसान खाद-बीज की किल्लत से परेशान होकर समिति कार्यालय पहुंच गए और जमकर प्रदर्शन किया। धान की रोपाई का मौसम शुरू होते ही किसानों को खाद-बीज की आवश्यकता महसूस हो रही है, लेकिन केंद्र में उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें खाद नहीं दी जा रही, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है।

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने समिति प्रबंधक रमाकांत पांडेय पर गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना है कि समिति में भरपूर मात्रा में खाद मौजूद है, फिर भी उन्हें रोजाना घंटों कतार में लगने के बावजूद खाद नहीं मिल रही। प्रबंधक तरह-तरह के बहाने बनाकर टालमटोल कर रहा है, जिससे उनकी खेती पिछड़ रही है।
हंगामे की जानकारी मिलते ही भरतपुर तहसीलदार, खाद्य निरीक्षक, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने जब खाद भंडारण की जांच की तो 90 बोरी इफ्को खाद कम पाया गया। पूछताछ में प्रबंधक ने यह कबूल किया कि यह खाद डोम्हरा और सिंगरौली के तीन बड़े किसानों को अग्रिम दी गई है। अधिकारियों ने मौके पर पंचनामा तैयार कर किसानों को आश्वासन दिया कि मामले में जांच कर सख्त कार्यवाही की जाएगी।

किसानों ने बताया कि वर्तमान प्रबंधक रमाकांत पांडेय जब कोटाडोल सहकारी समिति में पदस्थ था, तब भी उसके विरुद्ध कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें हुई थीं। किसानों के नाम पर फर्जी ऋण निकालने और व्यापारियों का धान किसानों के नाम पर खरीदने जैसे मामले सामने आए थे। कोटाडोल थाना और जिला प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
प्रदर्शन के दौरान किसान विशेषण प्रसाद गुप्ता, सुंदरलाल, देवेंद्र कुमार सिंह,रामदुलारे बैगा,कलावती, उर्मिला, शुक्रियाई,शिवचरण गिरी,बेनबहादुर सिंह, अयोध्या सिंह, रामलाल, अरविन्द सिंह, रामसजीवन, प्रवीण सिंह और अन्य ने एक सुर में प्रबंधक को तत्काल हटाने की मांग की। उनका कहना था कि बार-बार चक्कर लगाने से उनका कीमती समय बर्बाद हो रहा है, कृषि कार्य में देरी हो रही है और धान उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है।
सहकारी समिति के प्रबंधक रमाकांत पांडेय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, “90 बोरी इफ्को खाद ग्राम डोम्हरा और सिंगरौली के तीन किसानों की अग्रिम मांग पर दी गई है। इसमें कोई अनियमितता नहीं है।” हालांकि, किसानों और जनप्रतिनिधियों की मांग पर जिला प्रशासन जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
इस घटना ने शासन की उन योजनाओं की पोल खोल दी है जो किसानों की आर्थिक मजबूती के नाम पर चलाई जा रही हैं। अगर सहकारी समितियों में ही किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिलेगा, तो वे योजनाएं सिर्फ कागजों में ही सीमित रह जाएंगी। ग्रामीण क्षेत्रों के किसान आज भी समस्याओं के दलदल में फंसे हुए हैं और खाद-बीज के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
सिंगरौली सहकारी समिति में हुए इस हंगामे ने शासन-प्रशासन को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है। अगर समय रहते दोषियों पर सख्त कार्यवाही नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में ऐसे प्रदर्शन और उग्र हो सकते हैं। किसानों की नाराजगी इस बात का संकेत है कि उन्हें अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।



