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रामानुज महाविद्यालय में सीपीआर प्रशिक्षण आयोजित

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बैकुण्ठपुर/मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशान्त सिंह के मार्गदर्शन और प्राचार्य डॉ. ए.सी.गुप्ता के संरक्षण, युवा रेडक्रॅास प्रभारी एवं जिला संगठक प्रो. एम.सी.हिमधर, कार्यक्रम अधिकारी द्वय डॉ. प्रीति गुप्ता एवं अनुरंजन कुजूर तथा रेड रिबन क्लब प्रभारी डॉ. बी.के.पाण्डेय के संयोजन में शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैकुण्ठपुर के सभागार में प्राथमिक चिकित्सा अंतर्गत दो पाली में प्रशिक्षण का आयोजन किया गया जिसमें महाविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ-साथ प्राध्यापक एवं कार्यलयीन स्टाफ भी शामिल रहे।

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जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर में पदस्थ निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुर्रे द्वारा सीपीआर का सैद्वांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का प्रारंभ डॉ. मनीष कुर्रे एवं डॉ. आशुतोष देऊस्कर द्वारा मां सरस्वती एवं स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो. एम.सी.हिमधर ने कहा कि अनियमित दिनचर्या, खानपान, कार्य का तनाव और भाग-दौड़ की जिन्दगी में हार्ट अटैक, दुर्घटना, करेन्ट लगना, गाज गिरना, पानी में डुबना आदि कारणों से लोग बेहोश हो जाते हैं जिन्हे प्राथमिक चिकित्सा के रूप में सीपीआर देने की जरूरत पड़ती है। जिससे उसे अस्पताल तक पहुचानें में मदद मिलती है और उसका जीवन बच जाता है। अतः यह प्रशिक्षण प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक एवं लाभप्रद है। डॉ. मनीष कुर्रे ने सीपीआर प्रशिक्षण के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और कहा कि हर घर में एक जीवन रक्षक व्यक्ति होना चाहिए। क्योंकि किसी की जान बचाने के लिए हर जगह डॉक्टर उपलब्ध नही हो सकता। यदि घर का एक सदस्य प्रशिक्षित हो जाता है तो वह आसपास के लोगों को प्रशिक्षित कर मदद कर सकता है। उन्होंने बताया कि भारत में एक लाख जनसंख्या के पीछे चार हजार लोग सीपीआर न मिलने के कारण मर जाते हैं जबकि अमेरिका में सिर्फ साठ व्यक्ति की मृत्युदर है। सीपीआर का मुख्य उद्देश्य शरीर में ऑक्सीजन और रक्त संचरण को मेन्टेन करना है। सीपीआर के पांच चरण होते हैं – प्रभावित व्यक्ति को सुरक्षित जगह पर रखना, उसके बाद मदद के लिए आसपास के लोगों को बुलाना, नंबर 112 में कॉल कर के सूचना देना, सोल्डर को जोर-जोर से मारना और यदि शरीर में कोई हलचल नहीं हो रहा है तो सीपीआर देना शुरू कर देना चाहिए। समय रहने पर सेन्टर पल्स जांचा जा सकता है। मरीज के दायें तरफ से दोनो निपल के बीच हाथों को लॉक करके एक मिनट में क्रमशः एक बार में 30 और पांच चक्र में लगभग 150 बार 5 सेंटीमीटर या 2 इंच तक लगातार दबाना है। इस बीच 2 बार मुंह में रूमाल रखकर नांक बंद कर मरीज को सांस भी देना चाहिए। यह सब दो मिनट के अंदर करना है। अन्यथा 5 मिनट बाद ब्रेन डेथ हो जाता है। उन्होंने व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया साथ ही स्टाफ एवं विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से प्रशिक्षण दिया साथ ही पूछे गये सवालों का जवाब भी दिया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के श्री सुमित जायसवाल एवं श्री गोविन्द वर्मा भी प्रशिक्षण के लिए उपस्थित रहे। आभार प्रदर्शन डॉ. आशुतोष देऊस्कर ने किया। कार्यक्रम में प्राध्यापक डॉ. जे.आर.कवंर, डॉ. विनय शुक्ला, डॉ.जी.के. मिश्र, डॉ.बी.के पाण्डेय और समस्त अतिथि व्याख्याता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में कार्यक्रम अधिकारी अनुरंजन कुजूर के साथ-साथ श्री शम्भू प्रसाद रैदास, श्री योगेश्वर साय एवं स्वयं सेवक कृष्णा राजवाड़े, आकाश सिंह, तौफिक, शशि पोर्ते, धनेश्वर, विशु, तनुप्रिया, माही, तनिषा विशेष रूप से सक्रिय रहे।

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