रोज मर रहे गौ वंश, लोग हो रहे दुर्घटना से घायल, नगरपालिका प्रशासन का गैर जिम्मेदाराना फेल्ड अभियान
जिला कलेक्टर ने दिया था कड़ा निर्देशन, रोका छेका अभियान ने दम थोड़ा

नगरपालिका के 15 सदस्यीय टीम विफल केवल कागजी खानापूर्ति। पशुपालक भी दोषी उन पर कार्रवाई?
एस. के.‘रूप’
बैकुंठपुर/ सड़कें राहगीरों के चलने हेतु हो तो सही है। सड़कें आवागमन हेतु हो तो सही है सड़कें व्यक्ति विशेष को उसके नियत लक्ष्य स्थान तक पहुंचने को हो तो सही है सड़कें सुधरी हुई हो बढ़िया हो तो सही है और जब श्रावण मास में लगातार बारिश में सड़कों की स्थिति बद से बत्तर हो तो गलत है ऊपर से उन सड़कों में मवेशियों का आशियाना बन जाए तो गलत है। ऐसी परिस्थिति में वाहन चालक और राहगीरों के साथ अनहोनी हो रही है वही गौ जिनमे हिंदू धर्म मान्यता अनुसार सभी देवों का वास है उनका श्राप भी जिम्मेदार लोगो को अवश्य लगेगा क्योंकि जिनकी यह जिम्मेवारी है वे इसमें फेल हो रहे है सारे जतन दिखाए जाए रहे है के मवेशियों की उचित व्यवस्था की जा रही है लेकिन सब फेल। रोका छेंका पशुओं से खैर फसल को बचाने के लिए शुरू की गई अभियान रही छत्तीसगढ़ शासन की वह भी कोरिया जिले के बैकुंठपुर की तरह कई जगह फेल l क्या प्रशासन ने जो नगरपालिका की 15 सदस्यीय टीम बनाई थी वह केवल कागजी खानापूर्ति थी क्योंकि वह भी फेल। कुछ दिन पहले शहर के हाई स्कूल ग्राउंड में मवेशियों को हका के भर दिया गया था कुछ को खरवत के ओर और हो गया इनका काम खत्म। यही है प्रशासन का कड़ा निर्देश और उसका पालन। बात यही बस नही है यहां तो आए दिन मवेशियों की मौत हो रही है। क्योंकि सड़क में वे अपना डेरा जमा रहते है शहर के एसईसीएल तिराहा, बाजारपारा,फव्वारा चौक, गढ़ेलपारा, बस स्टैंड, स्कूलपारा,महलपारा, चेर, जुनापारा, खुटहन पारा, कचहरीपारा या फिर यह कहे के शहर का सारा सड़क ही गौ वंशों का डेरा रहता है उनका घर तो सड़क ही है।

पशुपालक ऐसे पशु पालकों पर कार्रवाई क्यों नही जो केवल दुग्ध काल या स्वार्थ से गौ वंश का पालन करते है मवेशियों के कान में पशु चिकत्सा विभाग का टैग भी लगा होता है जिसके माध्यम से उसके मालिक का पता चल जाता है ऐसे स्वार्थी पशुपालकों पर कार्रवाई भी जरूरी ही। पहले कांजी हाउस ही रहा करते थे कम से कम इसके डरे लोग की कहीं इनके मवेशियों को वहा बंद किया जाए तो छुड़ाने का एक और टेंशन यह भी अब नही दिखता क्योंकि गौठान योजना ने उनका संवर्धन कागजों में भी कर दिया और बड़ा भ्रष्ट योजना करोड़ों अरबों का साबित हो गया।

सड़कों पर मवेशियों की लाशें बिछी रहती है। लोग घायल टकरा के कई जान से चले जा रहे है। एक ट्रैफिक के संवेदनशील व्यक्तित्व ने एक लड़की की जान बचाई। 2 लड़के कुछ दिन पहले घायल हो गए । अनुराग दुबे जिलाध्यक्ष गौ रक्षा वाहिनी अलग चिल्ला चिल्ला गुहार लगा रहे है लेकिन परिणाम शून्य।
क्या नगर पालिका प्रशासन के पास मवेशियों को साधने का कोई साधन नहीं है। क्या नगरपालिका अकर्मण्य है? क्या नगरपालिका को लोगो के जान माल लेना देना नही है क्या यह अपने मामलों में ही उलझे रहेगा। सीएमओ पार्षदों को सुनते नही। बैठके हो नही रही या फिर पेमेंट नही मिला या निधि बस इन्ही में फंसे रहने से जनता का क्या होगा?फिर ये शिविर लगाकर क्या मिलेगा? नालियां तो जाम है ही, शहर में गंदगी का आलम है,जानलेवा गाजर घास फलित है। सिविल लाइन में जो शहर का मुख्य मार्ग होता था कंडम हो चुका है पुराने तहसील कार्यालय से लेकर सीईओ बंगला तक गन्दगी, घास फूंस का अंबार,पशु पक्षियों की लीद, और मच्छरों की भरमार है कुछ दिनों पहले 3 व्यक्ति गिरकर घायल हो गए थे इसी मार्ग पर, अगर अधिकारी बाइक पर या पैदल चलते तो उन्हें एहसाह जरूर होता। कभी इसी शहर बैकुंठपुर में विकासशील जैसे कलेक्टर थे जो इस सम्यक क्रांति के दिवंगत संपादक के साथ खुद पैदल चहल कदमी कर लिया करते थे किंतु आज कर्म कम अभिमान ज्यादा दिखता है। जो जनलोकोपकारी तो कभी नही है हा मर्यादा और निरीक्षण में फर्क है दायरे में रहकर उक्त कार्य का निर्देशन भी दिया जा सकता है और निर्देश के बाद उसके निरूपण और कार्य पूर्ण होते तक का दायित्व निर्वहन। जनता तो अब इस नगर पालिका को नरक पालिका का दर्जा दे रही है। जिसके पास कोई उचित विकल्प नही है और विकल्पहीन,लक्ष्यहीन विभाग और जन हितैषी नही होने से उसकी दुर्गति ही होगी। इसलिए गौ माता के श्राप से बचने,लोगो के लिए एक श्रेष्ठ चलने का साधन सड़क से उनके आशियाने को अलग किसी जगह व्यवस्थित करने,लोगो को घायल होने से बचने,और तमाम तरीके के कार्य जो अपूर्ण है उन्हे करने हेतु कार्य करना नितांत आवश्यक है। उच्चाधिकारियों को इस ओर जरूर ध्यान देने की आवश्यकता है अन्यथा विवश होकर जनता उठ खड़े होगी।
सुनिए एक गौ सेवक की अपील:–
‘मैं अनुराग कुमार दुबे, गौ सेवक बैकुंठपुर मेरा शासन प्रशासन से यही अनुरोध है कि कलेक्टर कोरिया का आदेश जो रहता है वह यहां के अधिकारी केवल कागज तक ही सीमित रखते हैं जमीनी हकीकत में उस तरह का कोई भी काम नहीं हो रहा है।कारण सिर्फ एक है कि फील्ड में चाहे बड़े अधिकारी हो चाहे छोटा अधिकारी। वह फील्ड में निकल कर देखते ही नहीं है की समस्या क्या है? अगर यह इमानदारी से फील्ड में उतरकर जमीनी स्तर में देखें तो यह सब काम होता है। जो बड़े अधिकारी छोटे अधिकारी को आदेश दे देते हैं छोटे अधिकारी अपने से और नीचे जो कर्मचारी रहते हैं उनको आदेश देते है सरकार का जो भी काम है केवल आदेश तक ही सीमित रह जाता है। हमारे जिले के कलेक्टर का साफ निर्देश आदेश है कि रोड में किसी भी प्रकार का कोई भी गौ वंश ना रहे । गौ वशो को किनारे करने के लिए कलेक्टर साहब के तमाम कोशिश नाकाम कर दिया अधीनस्थों ने। मैं गौ सेवक होने के नाते हाथ जोड़कर के शासन प्रशासन से निवेदन करता हूं की हाई कोर्ट और छत्तीसगढ़ शासन का आदेश है कि रोड में जो भी गौ वश में बैठे रहते हैं उन्हें किनारे करके सुरक्षित जगह रखवाया जाए पर यह आदेश को थोड़ी गंभीरता से लिया जाए कोई काम नहीं हो रहा है प्रतिदिन एक्सीडेंट में गौ वशो की मौत हो रही है। एक्सीडेंट होने से आम इंसानों को भी गंभीर चोट लग रही है।



