एमसीबी के कंजिया में चावल एवम चना की कालाबाजारी का ग्रामीणों ने लगाया अंदेशा
नही मिला विगत कई महीनो से चावल,चना और नमक

किसान हाईब्रीड धान खरीदकर परेशान उग ही नही रहा बीज
एस. के.‘रूप’
भरतपुर–एमसीबी/ यहां जंगलराज ऐसा हावी है जो रुकने का नाम नही लेता विगत दिनों एक भ्रष्ट समिति प्रबंधक जिसको लेकर सम्यक क्रान्ति ने प्रमुखता से प्रकाशन किया था और उच्चाधिकारियों को कार्यप्रणाली को लेकर अवगत कराया था जिस पर गाज गिरी है और उसे निलंबित किया गया है।कई जनहित के मुद्दे सम्यक क्रान्ति में प्रकाशित हुए है और कार्रवाई भी त्वरित हुई है खबर का असर भी तत्काल हुआ है। अभी एक और भ्रष्ट कारनामा संचालक उचित मूल्य के दुकान का सामने आया है।

आपको बता दें एमसी जिले के वनांचल भरतपुर अंतर्गत ग्राम कंजिया के ग्रामीणों ने स्थानीय शासकीय उचित मूल्य के दुकान के संचालक बाबूलाल सांधे पर चावल चना एवं नमक की कालाबाजारी का आरोप लगाते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तहसील भरतपुर को न्याय हेतु आवेदन दिया है।


ग्रामीणों के अनुसार माह अप्रैल 2024 का चना माह मई में 21/ 05/2024 को गोदाम से 10.48 क्विंटल जारी हुआ एवं माह मई 2024 का चना जून में गोदाम से 26/06/2024 को 9.90 क्विंटल जारी हुआ है जबकि दो माह का चना देने की जगह शासकीय उचित मूल्य की दुकान ग्राम कंजिया संचालक बाबूलाल विक्रेता द्वारा एक माह का ही चना वितरण किया गया शेष कई कार्ड धारी को चना का वितरण नहीं किया गया और नमक तो बिल्कुल ही नहीं दिया गया है। माह मई 2024 में फिंगरप्रिंट लेने के बाद लगभग 25 कार्डधारी को चावल नहीं दिया गया है वही माह अप्रैल में 2024 के चना का वितरण किया ही नहीं गया है। कुछ को एक माह के चना का वितरण किया गया है।ग्रामीण मेघा कहार ने बताया कि उसे जून माह का चावल मिल ही नहीं इसी तरह सुखराम ने बताया कि उसे 2 महीने का चावल प्राप्ति नहीं हुआ। वहीं रावेंद्र सिंह ने भी आपबीती सुनाते हुए बताया कि संचालक ने उसके जून का चावल नहीं दिया नमक तो मिलता ही नहीं।
ग्रामीण रामकुमार देवलाल सिंह अतुल सिंह राजबाई सिंह राम लखन रोशनी ढीमर मां कुमारी सिंह दुर्गेश सिंह सहित कई ग्रामीणों ने इसकी शिकायत कर उचित कार्यवाही की मांग की है जनहित में उच्च अधिकारियों को इस और त्वरित ध्यान आकर्षण की आवश्यकता है।
किसान चिंतित नहीं उग रहा है धान ।
क्षेत्र के किसान अच्छी पैदावार से बढ़िया लाभ की उम्मीद लिए हाइब्रिड धान के महंगे पैकेट बाजार से खरीद कर लाते हैं और जब वे उगते नहीं रहे तो किसानों पर आर्थिक व मानसिक बोझ पड़ ही जाता है और उन्हें कई प्रकार की परेशानी झेलनी पड़ती है।
आपको बता दें क्षेत्र में कई स्थानों पर हाइब्रिड धान बाजार से लेकर ग्रामीणों ने यह सोचकर थहरा किया के पैदावार बढ़िया होगी लेकिन कई जगह यह हाइब्रिड धान उगा ही नहीं तत्काल प्रशासन को हाइब्रिड धान बेचने वालों पर नकेल कसते हुए इसकी जांच करनी चाहिए हो सकता है बीज डुप्लीकेट अथवा अमानक हो कभी-कभी एक्सपायरी बीजों के कारण भी ऐसा हो सकता है।



